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प्रतीकात्मक तस्वीर
मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव का असर अब भारत में दिखने लगा है. भारत में प्रीमियम पेट्रोल के बाद अब पीने का पानी भी महंगा हो गया है. बोतलबंद पानी की कीमतों में कंपनियों की ओर से इजाफा किया गया है, जो सीधा ग्राहकों की जेब पर असर डालता है. रॉयटर्स की खबर के मुताबिक, हालिया जियो पॉलिटिकल टेंशन, खासकर ईरान युद्ध के चलते भारत में बोतलबंद पानी (पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर) की कीमतों में करीब 11% तक की बढ़ोतरी हो गई है.
यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब कुछ महीने पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बोतलबंद पानी पर टैक्स घटाकर उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश की थी. लेकिन अब कच्चे माल की बढ़ती लागत ने उस राहत को लगभग खत्म कर दिया है.
1.4 अरब आबादी वाले भारत में साफ पानी आज भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है. रिसर्च के मुताबिक देश के करीब 70% भूजल में किसी न किसी तरह का प्रदूषण पाया जाता है. ऐसे में बोतलबंद पानी की मांग लगातार बढ़ रही है.
भारत का बोतलबंद पानी बाजार करीब 5 अरब डॉलर का है, जहां कई बड़ी कंपनियां हिस्सेदारी के लिए प्रतिस्पर्धा कर रही हैं. इनमें Bisleri, Coca-Cola, PepsiCo, Reliance Industries और Tata Group शामिल हैं.
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर प्लास्टिक इंडस्ट्री पर पड़ा है. प्लास्टिक बोतल बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाला पॉलिमर महंगा हो गया है, जिससे पैकेजिंग लागत बढ़ गई है.
भारत की सबसे बड़ी बोतलबंद पानी कंपनी Bisleri, जो बाजार का करीब एक-तिहाई हिस्सा रखती है, ने अपने उत्पादों की कीमतों में 11% तक की बढ़ोतरी कर दी है. अब 1 लीटर की 12 बोतलों का एक बॉक्स 240 रुपए में मिलेगा, जो पहले 216 रुपए का था.
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रॉयटर्स की खबर के मुताबिक,कंपनी के सीईओ Angelo George ने कहा कि पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर की कीमत बढ़कर 20 रुपये प्रति लीटर हो गई है, क्योंकि पैकेजिंग मटेरियल की लागत में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है, जो पिछले दो हफ्तों में 70% से ज्यादा बढ़ चुकी है. इसी तरह Parle Agro ने भी अपने Bailley ब्रांड के पानी की कीमतों में करीब 11% तक की बढ़ोतरी की है.
सितंबर में सरकार ने बोतलबंद पानी पर टैक्स 18% से घटाकर 5% कर दिया था. इस फैसले के बाद कंपनियों ने कीमतें कम की थीं, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिली थी. लेकिन अब कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और पैकेजिंग लागत बढ़ने के कारण यह फायदा पूरी तरह खत्म हो गया है.
सिर्फ बड़ी कंपनियां ही नहीं, छोटे और मिड-साइज ब्रांड्स भी इस दबाव का सामना कर रहे हैं. क्लियर प्रीमियम वॉटर के सीईओ नयन शाह ने कहा कि उन्होंने भी अपने प्रोडक्ट्स की कीमतों में 8% से 11% तक की बढ़ोतरी की है. उनके मुताबिक, “भू-राजनीतिक हालात के कारण लागत इतनी बढ़ गई है कि कीमत बढ़ाना अब जरूरी हो गया है.”
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