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देश की राजनीति में अहम भूमिका निभाने वाले बिहार राज्य में एक बार फिर चुनावी गहमागहमी तेज़ होने वाली है. बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान आज, यानी 6 अक्टूबर को हो सकता है. चुनाव आयोग ने शाम 4 बजे एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं. माना जा रहा है कि इसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में बिहार के अगले सियासी संग्राम का बिगुल बजेगा. राज्य की 243 सदस्यीय विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल 22 नवंबर को खत्म हो रहा है, इसलिए इस तारीख से पहले चुनाव संपन्न कराना ज़रूरी है.
बता दें कि पिछला विधानसभा चुनाव साल 2020 में हुआ था. इस चुनाव को तीन चरणों में संपन्न कराया गया था.
मतगणना 10 नवंबर को हुई थी, जिसने राज्य में नई सरकार का रास्ता साफ किया था. इस बार भी देखना होगा कि चुनाव आयोग कितने चरणों में मतदान कराने का फैसला लेता है.
चुनाव आयोग के अधिकारियों ने रविवार को ही अपना दो दिवसीय बिहार दौरा खत्म किया है. इस दौरे के दौरान, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के साथ मिलकर राज्य में चुनाव तैयारियों की बारीकी से समीक्षा की. इस समीक्षा के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने ये घोषणा की कि बिहार विधानसभा चुनाव से कई नई पहलों की शुरुआत की जाएगी, जिसका मकसद चुनावी प्रक्रिया को और बेहतर बनाना है.
चुनाव आयोग ने इस बार मतदाताओं की सुविधा और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं. ये पहलें निश्चित रूप से इस बार के चुनाव को और भी खास बनाएंगी:
इस बार सभी मतदान केंद्रों पर वेबकास्टिंग की सुविधा लागू की जाएगी. इसका मतलब है कि मतदान प्रक्रिया की लाइव मॉनिटरिंग की जा सकेगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और किसी भी तरह की धांधली की संभावना कम होगी.
अब जब मतदाता वोट डालने जाएंगे, तो उन्हें EVM मतपत्र पर उम्मीदवारों के नाम के साथ उनकी रंगीन तस्वीरें भी दिखाई देंगी. इससे मतदाताओं को सही उम्मीदवार की पहचान करने में आसानी होगी और गलती की गुंजाइश कम होगी.
मतदाताओं को अपने मतदान केंद्र ढूंढने में आसानी हो, इसके लिए मतदाता पर्ची पर नाम बड़े अक्षरों में छपे होंगे. ये छोटी-सी सुविधा भी मतदाताओं के लिए काफी मददगार साबित होगी.
ये एक बिल्कुल नई सुविधा है! मतदाताओं को अब मतदान केंद्रों के बाहरी क्षेत्र में अपने मोबाइल फोन ले जाने की अनुमति होगी. ये सुविधा पहली बार शुरू की जा रही है और इससे मतदाताओं को सहूलियत मिलेगी.
पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए, राजनीतिक दलों को मतदान केंद्रों से मात्र 100 मीटर की दूरी पर पोलिंग एजेंट बूथ स्थापित करने की अनुमति होगी.
राजनीतिक दलों के बूथ स्तरीय एजेंटों (BLA) को मतदान शुरू होने से पहले मॉक पोल में भाग लेने और मतदान समाप्त होने के बाद फॉर्म 17C जमा करने की सलाह दी गई है. ये कदम चुनावी प्रक्रिया में विश्वास और पारदर्शिता को बढ़ावा देंगे.