गांधी जयंती पर अमित शाह की खास अपील: हर परिवार सालाना ₹5000 की खादी खरीदे

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गांधी जयंती के मौके पर देशवासियों से अपील की है कि वे हर साल कम से कम ₹5,000 के खादी प्रोडक्‍ट खरीदें और स्वदेशी वस्तुओं को अपनाएं. उन्होंने खादी और स्वदेशी को स्वतंत्रता आंदोलन का अभिन्न अंग बताते हुए कहा कि ये पहल गरीबों के लिए रोज़गार पैदा करेगी और भारत को 2047 तक शीर्ष स्थान पर पहुंचाने में मदद करेगी.
गांधी जयंती पर अमित शाह की खास अपील: हर परिवार सालाना ₹5000 की खादी खरीदे

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को महात्मा गांधी की जयंती के पावन अवसर पर देशवासियों से एक खास अपील की है. उन्होंने कहा कि हर भारतीय परिवार को सालभर में कम से कम 5,000 रुपए के खादी प्रोडक्‍ट खरीदने का संकल्प लेना चाहिए, जिससे महात्मा गांधी के सपनों को साकार किया जा सके और देश को आत्मनिर्भर बनाया जा सके.

खादी ग्रामोद्योग स्टोर से दिया संदेश

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह गुरुवार को दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित खादी ग्रामोद्योग के स्टोर पर पहुंचे. इस मौके पर उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, "ये महात्मा गांधी ही थे जिन्होंने भारत की आत्मा को पहचाना."

शाह ने याद दिलाया कि कैसे गांधीजी ने भारत के लोगों को जागरूक कर उन्हें अंग्रेजों के खिलाफ खड़ा किया. उन्होंने कहा, "आज़ादी के आंदोलन के दौरान कई सारी चीज़ों को उन्होंने बुना है, भारत के भविष्य का नक्शा आज तक उससे बंधा है. उन्हीं में से दो बड़े विचार खादी और स्वदेशी निकले."

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन को खादी और स्वदेशी से अलग नहीं किया जा सकता. उस समय पूरा भारत अंग्रेजी कपड़ा मिलों का बाज़ार बना हुआ था. महात्मा गांधी ने देश को स्वदेशी और खादी की विचारधारा देकर न केवल स्वतंत्रता आंदोलन को गति दी, बल्कि कई गरीब लोगों के जीवन में उजाला भी लाए. लेकिन बहुत लंबे समय तक खादी और स्वदेशी दोनों को भुला दिया गया था.

पीएम मोदी के नेतृत्व में खादी का पुनरुत्थान

गृह मंत्री ने याद दिलाया कि खादी को पुनर्जीवित करने का अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2003 में ही गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए शुरू किया था. उन्होंने कहा, "मुझे याद है कि 2003 में जब पीएम नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे तो उन्होंने गुजरात में खादी को पुनर्जीवित करने के लिए एक बड़ा अभियान चलाया. वहीं से इस आंदोलन की शुरुआत हुई."

शाह ने इस बात पर खुशी ज़ाहिर की कि फिर से खादी जन-जन के उपयोग की चीज़ बनी है. उन्होंने कहा, "उसका प्रत्यक्ष प्रमाण है कि 2014 से आज तक खादी सैकड़ों गुना बढ़ गई है. आज ये कारोबार 1.7 अरब रुपए तक पहुंच गया है. मेरा मानना ​​है कि ये एक बहुत बड़ी उपलब्धि है." ये आंकड़ा खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) के अथक प्रयासों और सरकार के समर्थन का परिणाम है.

₹5,000 की खादी और स्वदेशी का संकल्प: क्यों ज़रूरी?

अमित शाह ने देश की जनता से दो महत्वपूर्ण अभियानों को सफल बनाने की अपील की. उन्होंने कहा, "हजारों परिवारों ने अपने घरों में किसी भी विदेशी सामान का इस्तेमाल न करने का संकल्प लिया है. लाखों दुकानदारों ने तय किया है कि हमारी दुकानों में विदेशी सामान बिक्री नहीं होगा."

उन्होंने अपनी मुख्य अपील दोहराते हुए कहा, "आज मैं देश की जनता से इन दोनों अभियानों को सफल बनाने की अपील करना चाहता हूँ. हर परिवार को सालाना कम से कम 5,000 रुपए की खादी खरीदनी चाहिए, चाहे वो चादर हो, तकिए के कवर हों, पर्दे हों या फिर तौलिए."

शाह ने समझाया कि ये सिर्फ़ खरीददारी नहीं है, बल्कि एक सामाजिक और आर्थिक आंदोलन है. उन्होंने कहा, "जब ​​आप ये चीज़ें खरीदते हैं तो आप किसी के लिए रोज़गार पैदा करते हैं और हजारों-लाखों गरीबों के जीवन में उजाला लाते हैं."

ये सीधे तौर पर स्थानीय कारीगरों, बुनकरों और ग्रामीण उद्योगों को सशक्त करेगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूती मिलेगी. खादी सिर्फ़ एक कपड़ा नहीं, बल्कि एक विचार है जो आत्मनिर्भरता और ग्रामीण विकास का प्रतीक है.

2047 तक भारत को शीर्ष पर पहुंचाने का विजन

गृह मंत्री अमित शाह ने स्वदेशी अपनाने के पीछे के बड़े विज़न को भी स्पष्ट किया. उन्होंने कहा, "जब आप स्वदेशी को अपनाते हैं तो आप 2047 तक भारत को दुनिया में शीर्ष स्थान पर पहुंचाने के एक महत्वाकांक्षी अभियान से जुड़ जाते हो."

ये 'आत्मनिर्भर भारत' के प्रधानमंत्री मोदी के सपने को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. स्वदेशी उत्पादों का उपयोग करके, हम अपनी अर्थव्यवस्था को मज़बूत करते हैं, स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देते हैं और आयात पर हमारी निर्भरता को कम करते हैं.

उन्होंने गांधी जयंती के दिन देश की जनता से एक बार फिर अपील की, "पीएम मोदी ने दो अभियान चलाए हैं: खादी के उपयोग और स्वदेशी अपनाना, इन दोनों अभियानों को ताकत दें और उन्हें अपने स्वभाव का हिस्सा बनाएँ." ये अपील सिर्फ़ आर्थिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और राष्ट्रवादी भावना से भी प्रेरित है, जो देश को एक नई दिशा देने का प्रयास है.

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