'आग का दरिया' किया पार! हॉर्मुज से सुरक्षित निकले 2 जहाज, लेकर आ रहे हैं 92,612 मीट्रिक टन LPG, जानें कब तक पहुंचेंगे भारत

ईरान युद्ध के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर आई है. पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अनुसार, दो भारतीय ध्वज वाले LPG टैंकर- 'जग वसंत' (Jag Vasant) और 'पाइन गैस' (Pine Gas)- आज शाम सफलतापूर्वक हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पार कर गए हैं. इन जहाजों में कुल 92,612.59 मीट्रिक टन LPG लदी है, जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है.
'आग का दरिया' किया पार! हॉर्मुज से सुरक्षित निकले 2 जहाज, लेकर आ रहे हैं 92,612 मीट्रिक टन LPG, जानें कब तक पहुंचेंगे भारत

फोटो- एआई जनरेटेड

पिछले कुछ दिनों से ईरान युद्ध की वजह से जिस तरह से हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव बना हुआ था, उसे देखते हुए भारत की गैस सप्लाई को लेकर काफी चिंताएं थीं. लेकिन आज शाम Ministry of Ports, Shipping and Waterways ने जो जानकारी दी है, वह हर भारतीय के लिए सुकून देने वाली है.

युद्ध के मुहाने पर खड़े इस सबसे खतरनाक समुद्री रास्ते से दो भारतीय 'योद्धा' जहाज सफलतापूर्वक निकल चुके हैं, जो LPG लेकर आ रहे हैं. आइए, इसकी मुख्य बातों को विस्तार से समझते हैं.

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मिशन 'सेफ ट्रांजिट': कौन हैं ये जहाज?

हॉर्मुज जलडमरूमध्य वह संकरा रास्ता है, जहां से दुनिया का एक-तिहाई तेल और गैस गुजरता है. युद्ध की स्थिति में यहां से गुजरना किसी चुनौती से कम नहीं था.

जहाजों के नाम: 'जग वसंत' (Jag Vasant) और 'पाइन गैस' (Pine Gas).

क्या लेकर आ रहे हैं: इन जहाजों में 92,612.59 मीट्रिक टन एलपीजी (LPG) है. यह गैस हमारे घरों की रसोई और उद्योगों के लिए ईंधन का मुख्य स्रोत है.

भारतीय पहचान: दोनों ही जहाज 'इंडियन फ्लैग' (Indian Flag) वाहक हैं, जिसका मतलब है कि इन पर भारत सरकार का पूरा संरक्षण है.

हमारे जांबाज नाविकों की सुरक्षा

सबसे बड़ी चिंता उन 60 भारतीयों की थी जो इन जहाजों पर तैनात हैं:

जग वसंत: इस पर 33 भारतीय नाविक सवार हैं.

पाइन गैस: इस पर 27 भारतीय नाविक तैनात हैं.

मंत्रालय के अनुसार, सभी नाविक पूरी तरह सुरक्षित हैं और जहाज अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहे हैं.

भारत कब पहुंचेंगे?

ये जहाज अब खुले समुद्र में हैं और बिना किसी रुकावट के भारत की ओर बढ़ रहे हैं.

तारीख: इनके 26 मार्च से 28 मार्च 2026 के बीच भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने की संभावना है.

महत्व: ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतें आसमान छू रही हैं और सप्लाई बाधित है, इन दो जहाजों का समय पर पहुंचना भारत में गैस की कीमतों को स्थिर रखने में मदद करेगा.

भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए यह क्यों जरूरी है?

हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरना इस वक्त 'आग के दरिया' को पार करने जैसा है.

युद्ध का साया: ईरान युद्ध के कारण इस रूट पर जहाजों के अपहरण या हमले का खतरा बना हुआ था.

सप्लाई चेन: अगर ये जहाज अटक जाते, तो भारत में LPG की किल्लत हो सकती थी.

नेवी का साथ: माना जा रहा है कि भारतीय नौसेना (Indian Navy) के जहाजों ने इन टैंकरों को सुरक्षित रास्ता दिलाने के लिए निगरानी रखी होगी.

Conclusion

यह खबर बताती है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों और अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए कितना मुस्तैद है. 'जग वसंत' और 'पाइन गैस' का हॉर्मुज से निकलना हमारी कूटनीतिक और समुद्री शक्ति की जीत है. अब बस 26 से 28 मार्च का इंतजार है, जब ये सुरक्षित हमारे तटों पर लंगर डालेंगे.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1- Strait of Hormuz (हॉर्मुज जलडमरूमध्य) इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

यह ओमान की खाड़ी और फारस की खाड़ी के बीच एकमात्र समुद्री रास्ता है. दुनिया का लगभग 20-30% कच्चा तेल और भारी मात्रा में गैस इसी रास्ते से गुजरती है.

2- क्या युद्ध की वजह से गैस की कीमतें बढ़ेंगी?

हां, युद्ध के कारण सप्लाई में रिस्क बढ़ता है जिससे कीमतें बढ़ती हैं. लेकिन भारत जैसे देशों के लिए अपने जहाजों का सुरक्षित आना एक राहत की बात है.

3- क्या भारतीय नौसेना इन जहाजों को एस्कॉर्ट कर रही है?

मंत्रालय ने 'एस्कॉर्ट' शब्द का इस्तेमाल नहीं किया है, लेकिन आमतौर पर संकट के समय भारतीय नौसेना 'ऑपरेशन संकल्प' के तहत भारतीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है.

4- इन जहाजों में कितनी गैस है?

कुल 92,612.59 मीट्रिक टन, जो लाखों सिलेंडरों को भरने के लिए पर्याप्त है.

5- क्या और भी जहाज इस रास्ते में फंसे हैं?

मंत्रालय अन्य जहाजों की स्थिति पर भी नजर बनाए हुए है और स्थिति के अनुसार उन्हें सुरक्षित रास्ता दिलाने के लिए अलर्ट पर है.

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