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सोने की कीमतों में 50% से अधिक का उछाल. (File Image)
Akshaya Tritiya 2026: 'कभी न घटने वाली समृद्धि" का प्रतीक मानी जाने वाली अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya) देशभर में आज भी गहरी आस्था और आर्थिक महत्व के साथ मनाई जा रही है. सोना-चांदी (Gold-Silver) की कीमतों में अभूतपूर्व बढ़ोतरी के बावजूद, भारतीय उपभोक्ताओं की आस्था कीमतों पर भारी पड़ती दिख रही है. कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के अनुसार, इस वर्ष अक्षय तृतीया पर देशभर में लगभग ₹20,000 करोड़ के कुल व्यापार का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के ₹16,000 करोड़ के मुकाबले करीब 25% ग्रोथ है.
अकेले देश की राजधानी दिल्ली में यह व्यापार लगभग ₹6,000 करोड़ के करीब पहुंचने की उम्मीद है. हालांकि, व्यापार की इस चमक के पीछे मात्रा और वैल्यू का एक दिलचस्प गणित भी छिपा है.
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इस वर्ष सोने की कीमतें पिछले वर्ष के लगभग ₹1,00,000 प्रति 10 ग्राम से बढ़कर लगभग ₹1.58 लाख तक पहुंच गई हैं.
जबकि चांदी ₹85,000 प्रति किलो से बढ़कर ₹2.55 लाख प्रति किलो के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई है.
चांदनी चौक से सांसद और कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने बताया कि कीमतों में इस तेज बढ़ोतरी ने मध्यम वर्ग के उपभोक्ता व्यवहार को पूरी तरह बदल दिया है. लोग आस्था के चलते खरीदारी तो कर रहे हैं, लेकिन अब वे 'ग्राम' के बजाय अपने 'बजट' को प्राथमिकता दे रहे हैं.
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कैट के सहयोगी संगठन 'ऑल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन' (AIJGF) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज अरोड़ा द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, ₹16,000 करोड़ के अनुमानित सोने के व्यापार का अर्थ वर्तमान कीमतों पर लगभग 10,000 किलो (10 टन) सोने की बिक्री है.
पंकज अरोड़ा के अनुसार, भले ही कुल टर्नओवर बड़ा दिख रहा हो, लेकिन वास्तविक खपत में गिरावट आई है. अगर इसे देशभर के अनुमानित 2 से 4 लाख ज्वैलर्स में बांटा जाए, तो प्रति ज्वेलर औसतन केवल 25 से 50 ग्राम सोने की बिक्री होती है, जो मात्रा में स्पष्ट गिरावट को दर्शाता है.
इसी प्रकार ₹4,000 करोड़ के चांदी के व्यापार का अर्थ लगभग 1,56,800 किलो (करीब 157 टन) चांदी की बिक्री है, जिससे प्रति ज्वैलर औसतन केवल 400 से 800 ग्राम चांदी की बिक्री होती है.
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बदलती कीमतों के कारण इस बार अक्षय तृतीया पर बाजार का स्वरूप बिल्कुल नया दिख रहा है-
लाइटवेट और डेली वियर का दबदबा
भारी हार और कंगन की जगह अब 'लाइटवेट' ज्वेलरी ने ले ली है. कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी. सी. भरतिया ने बताया कि ज्वैलर्स ने इस बार ऐसे डिजाइन तैयार किए हैं जो दिखने में बड़े लेकिन वजन में हल्के हैं. चांदी और हीरे जड़ित उत्पादों की मांग में भी भारी उछाल आया है क्योंकि ये सोने के मुकाबले किफायती विकल्प पेश करते हैं.
डिजिटल गोल्ड और SGB का बढ़ता रुझान
फिजिकल गोल्ड रखने की सुरक्षा चिंताओं और ऊंची कीमतों के कारण युवा पीढ़ी अब डिजिटल गोल्ड, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) और गोल्ड ETF की ओर रुख कर रही है. ये विकल्प न केवल शुद्धता की गारंटी देते हैं बल्कि छोटे निवेश की सुविधा भी प्रदान करते हैं।
Gold Coin और मेकिंग चार्ज में छूट
ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए ज्वैलर्स ने 0.5 ग्राम और 1 ग्राम के गोल्ड कॉइन के साथ-साथ चांदी के सिक्कों का बड़ा स्टॉक रखा है. साथ ही, मेकिंग चार्ज पर 50% से 100% तक की छूट और पुराने सोने के एक्सचेंज पर बोनस जैसे ऑफर्स की भरमार है.
पारदर्शिता के लिए HUID अनिवार्य
बाजार में बढ़ती मांग के बीच धोखाधड़ी से बचने के लिए कैट और AIJGF ने सभी ज्वेलर्स से अनिवार्य हॉलमार्किंग (HUID) का सख्ती से पालन करने की अपील की है. उपभोक्ताओं को सलाह दी गई है कि वे आभूषण पर लगे 6 अंकों के अल्फ़ान्यूमेरिक कोड की जांच BIS Care App पर जरूर करें और पक्का बिल ही लें.
अक्षय तृतीया 2026 इस बात का प्रमाण है कि भारतीय समाज में सोने के प्रति मोह कभी कम नहीं हो सकता. हालांकि कीमतें आसमान छू रही हैं, लेकिन उपभोक्ताओं ने आस्था और आधुनिक वित्तीय प्रबंधन के बीच एक नया संतुलन बना लिया है- जहां निवेश अब सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि एक सोची-समझी आर्थिक रणनीति है.
आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1. इस वर्ष अक्षय तृतीया पर सोने और चांदी की अनुमानित कीमत क्या है?
सोने की कीमत लगभग ₹1.58 लाख प्रति 10 ग्राम और चांदी की कीमत लगभग ₹2.55 लाख प्रति किलो के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई है.
Q2. क्या इतनी ऊंची कीमतों पर सोना खरीदना फायदे का सौदा है?
सोना लंबे समय में महंगाई के खिलाफ सबसे सुरक्षित निवेश है.
Q3. सोने की शुद्धता की पहचान करने के लिए मोबाइल ऐप का उपयोग कैसे करें?
आप 'BIS Care App' डाउनलोड कर सकते हैं. इसमें 'Verify HUID' विकल्प पर जाकर ज्वेलरी पर लिखे 6 अंकों के अल्फ़ान्यूमेरिक कोड को दर्ज करें.
Q4. HUID नंबर क्या है और यह क्यों जरूरी है?
HUID एक 6 अंकों का अनूठा कोड है. यह हर आभूषण की पहचान सुनिश्चित करता है और पारदर्शिता लाता है.