हवाई हमले के बीच बजने वाले सायरन का इतिहास क्या है? आपको ये आवाज सुनाई दे तो क्या करें…

भारत-पाकिस्तान के बीच चल रहे टेंशन में सायरन की आवाज देश के कई हिस्सों में सुनाई दे रही है.सायरन की आवाज आने वाले खतरे का अलर्ट होता है. तो हम जानेंगे सायरन का इतिहास क्या है, और अगर कभी इसे सुनने की नौबत आए तो हमें क्या करना चाहिए?
हवाई हमले के बीच बजने वाले सायरन का इतिहास क्या है? आपको ये आवाज सुनाई दे तो क्या करें…

रात के सन्नाटे को केवल दो ही चीजें कानों में सुनाई दे रही हैं, एक पाकिस्तान से बरसते ड्रोन को तबाह करते भारत के हथियार और दूसरी तरफ जमीं पर बजते सायरन. फिल्मों में और कहानियों में अक्सर हम सभी ने सायरन की आवाज सुनी ही होगी लेकिन अब भारत-पाकिस्तान के बीच चल रहे हमले में इसकी आवाज सबसे अहम हो गई है.फिलहाल कश्मीर से लेकर पंजाब, राजस्थान और गुजरात के कई हिस्सों में सायरन की आवाज सुनने को मिल रही है.

सायरन की आवाज अगर सुनाई देती है तो दो चीजें होती हैं,पहले पूरे इलाके की बिजली बंद होगी और लोगों को अपने घरों में अंधेरा करना होगा. पूरा इलाका ब्लैकआउट में चला जाएगा. इसके अलावा लोगों किसी छत के नीचे या सुरक्षित स्थानों पर जाकर खुद को पहुंचाना होगा. तो फिर अब हम जानेंगे कि अगर सायरन सुनाई देता है तो फिर क्या करना है. इसके अलावा सायरन सिस्टम शुरू कब हुआ था, क्या है इसका इतिहास.


सायरन का सफर: इतिहास के पन्नों से

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एयर रेड सायरन का यूज खास रूप से दूसरे विश्व युद्ध (1939-1945) के दौरान शुरू हुआ था. उस समय दुश्मन के लड़ाकू विमान बम को बरसाने आते थे, तो फिर शहरों में ये सायरन बजाए जाते थे.इन सायरन की आवाज सुनाई देने पर भयानक गूंज सुनकर लोग बंकरों में, बेसमेंट में या अन्य सेफ प्लेस पर खुद को छुपाते थे. उस समय ये सायरन लोगों के लिए जीवन रक्षक बने थे. उस समय लंदन, बर्लिन जैसे शहरों में भी इन सायरनों के बजने से लोगों की जान बची थीं. हालांकि अब टाइम के साथ सायरन की तकनीक में भी बदलाव आए हैं, लेकिन इसका अहम उद्देश्य - खतरे की घंटी बजाना ही है.

युद्ध में सायरन का संकेत?

द्वितीय विश्व युद्ध (1939-1945) में जर्मनी में करीब 11,000 सायरन बजाए जाते थे ताकि वो इससे अपने यहां की जनता को हवाई हमले की चेतावनी दे सकें. इसके अलावा सायरन का यूज कहीं और करने की इजाजत नहीं थी. सायरन को केवल हवाई हमले की चेतावनियों और खतरे के गुजर जाने के बाद ऑल-क्लियर बताने के लिए ही यूज किया जाता था. इजरायल-गाजा युद्ध हो या फिर रूस-यूक्रेन युद्ध में भी इसका उपयोग खतरे के अलर्ट के लिए किया गया है. अब भारत में पाकिस्तान के बीच चल रही टेंशन में सायरन की आवाज कुछ जगहों पर सुनाई दे रही है.

सायरन की अहमियत

भले ही तकनीकि ने तरक्की कर ली हो, लेकिन मिसाइल डिफेंस सिस्टम और अर्ली वॉर्निंग रडार आ गए हों लेकिन एयर रेड सायरन की अहमियत कम नहीं हुई है.कई देशों में खतरे के समय आज भी इसका यूज किया जाता है.सायरन हर किसी के लिए एक ऐसी चेतावनी है जो बिना किसी व्यक्तिगत डिवाइस के भी बड़े जनसमूह तक आसानी से पहुंच सकती है.

अगर सायरन बजने पर क्या करें

यह जानना जरूरी है कि अगर कभी हवाई हमले का सायरन बजे तो घबराने के बजाय सबसे पहले खुद को शांत रखें.अगर आसपास बंकर या बेसमेंट है, तो वहां जाएं अगर बंकर ना मिले तो किसी मजबूत इमारत के अंदरूनी हिस्से में, दीवारों से दूर और खिड़कियों से अलग हटकर शरण लें,बिजली जाने का खतरा रहता है, जिससे आप लिफ्ट में फंस सकते हैं. सीढ़ियों का प्रयोग करें.सायरन बजते ही तुरंत ही घर की लाइट पूरी तरह से बंद कर देना चाहिए.रेडियो, टेलीविजन या सरकार द्वारा जारी आधिकारिक मोबाइल ऐप्स पर नवीनतम जानकारी और निर्देशों के लिए नज़र रखें. फर्स्ट-एड, पानी, कुछ सूखे खाद्य पदार्थ, टॉर्च, और ज़रूरी दवाएं अपने पास रखें.


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