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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिर्फ एक ट्रेंडी तकनीक नहीं, बल्कि ये हमारे देश के कोने-कोने में बड़े बदलाव ला रहा है. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में इस बात पर जोर दिया कि AI किस तरह से जमीनी स्तर पर लोगों की जिंदगी आसान बना रहा है. चाहे वो बच्चों की पढ़ाई हो, स्वास्थ्य सेवाएं हों या फिर खेती-बाड़ी, AI हर जगह एक गेम चेंजर साबित हो रहा है. उन्होंने इस बीच ये भी बताया कि अगले साल फरवरी में भारत में एआई इम्पैक्ट समिट का आयोजन होगा.
अश्विनी वैष्णव ने AI के सकारात्मक प्रभावों को समझाने के लिए राजस्थान के टोंक जिले का उदाहरण दिया. उन्होंने बताया कि टोंक में AI की मदद से बच्चों को गणित पढ़ने में जबरदस्त मदद मिली है, जिससे उनके सीखने की क्षमता में 100 प्रतिशत तक का सुधार देखा गया है. ये दिखाता है कि कैसे सही तरीके से इस्तेमाल किया गया AI, बच्चों के भविष्य को उज्जवल बना सकता है. महाराष्ट्र और हिमाचल प्रदेश में भी AI के ऐसे ही सकारात्मक नतीजे देखने को मिले हैं, जो शिक्षा के क्षेत्र में इसकी असीमित संभावनाओं को दर्शाते हैं.
ये दिखाता है कि AI सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के ग्रामीण इलाकों में भी अपनी छाप छोड़ रहा है. ये एक ऐसा टूल है जो हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने में मदद कर सकता है, भले ही वो किसी भी पृष्ठभूमि से आता हो. शिक्षा के साथ-साथ AI स्वास्थ्य और कृषि क्षेत्रों में भी अहम भूमिका निभा रहा है.
भारत AI के क्षेत्र में अपनी बढ़ती भूमिका को दुनिया के सामने रखने के लिए तैयार है. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि AI इम्पैक्ट समिट फरवरी 2026 में भारत में आयोजित होगी. ये एक महत्वपूर्ण वैश्विक आयोजन है जो इससे पहले लंदन, सोल और पेरिस जैसे बड़े शहरों में हो चुका है. इस समिट की तैयारी के लिए, नीति आयोग ने देशभर के सभी जिलों में AI को लेकर हो रहे कामों की समीक्षा की है और उन अनुभवों को एक बैठक में साझा किया गया है. ये दिखाता है कि भारत AI के वैश्विक नेतृत्व के लिए कितना गंभीर है.
नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रमण्यम ने AI की क्षमता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि AI का उपयोग देश की उत्पादक क्षमता को बढ़ाने में किया जा सकता है. उनका मानना है कि AI देश में इनोवेशन को बढ़ावा देगा, जिससे भारत 8 प्रतिशत की विकास दर को भी आसानी से हासिल कर सकता है.
सुब्रमण्यम ने एक चौंकाने वाला आंकड़ा भी शेयर किया. उन्होंने कहा कि अगर भारत AI का सही ढंग से इस्तेमाल करता है, तो 2035 तक ये हमारी अर्थव्यवस्था में 2 ट्रिलियन डॉलर का योगदान दे सकता है. ये आंकड़ा AI की जबरदस्त आर्थिक क्षमता को दर्शाता है. उन्होंने बताया कि AI का उपयोग इंडस्ट्री, ट्रेनिंग और सरकार के लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है. नीति आयोग जल्द ही AI के लिए एक विस्तृत रोडमैप भी प्रस्तुत करेगा, जिससे इसके सही उपयोग और विकास की दिशा तय की जा सकेगी.
AI को लेकर अक्सर नौकरियों के जाने का डर सताता है. इस सवाल पर नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रमण्यम ने स्पष्ट किया कि AI से उत्पादक क्षमता में इजाफा होगा. उन्होंने इसकी तुलना कंप्यूटर के आगमन से की, जब लोगों को लगा था कि कंप्यूटर नौकरियां छीन लेंगे. लेकिन हुआ इसका उल्टा, कंप्यूटर ने नई तरह की नौकरियां पैदा कीं. ठीक वैसे ही, AI भी नई नौकरियों के अवसर पैदा करेगा और लोगों को नए स्किल्स सीखने के लिए प्रेरित करेगा.
AI उन कामों को ऑटोमेट करेगा जो दोहराव वाले होते हैं, जिससे इंसान ज्यादा रचनात्मक और रणनीतिक कामों पर ध्यान दे पाएंगे. ये कार्यबल की दक्षता को बढ़ाएगा और अर्थव्यवस्था के लिए नए रास्ते खोलेगा.