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आजकल ऑफिस की चर्चाओं में एक ही नाम सबसे ज्यादा सुनाई देता है, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI. लोग कह रहे हैं कि यह काम आसान कर देगा, कोई कह रहा है कि यह नौकरियां छीन लेगा. लेकिन असली सच क्या है? एक नई रिपोर्ट ने इस पर्दे को हटा दिया है. जीनियस एचआरटेक और डिजीपोल ने मिलकर एक सर्वे किया, जिसमें 1704 प्रोफेशनल्स से बात की गई. इस रिपोर्ट के नतीजे चौंकाने वाले हैं. यह साफ दिखा रहा है कि कंपनियां AI को दफ्तर में लाने की जल्दी में तो हैं, लेकिन अपने कर्मचारियों को यह सिखाना भूल गई हैं कि इसका इस्तेमाल कैसे करना है.
अगर आप भी किसी दफ्तर में काम करते हैं, तो आपको यह जानकर हैरानी होगी कि 71 परसेंट लोगों को पक्का यकीन है कि अगले दो-तीन साल में उनका जॉब रोल वैसा नहीं रहेगा जैसा आज है. यानी काम करने का तरीका, जिम्मेदारियां और शायद आपकी कुर्सी की अहमियत भी AI के हिसाब से बदल जाएगी.
रिपोर्ट में एक बहुत बड़ी कमी सामने आई है. कंपनियों ने तकनीक तो अपना ली, लेकिन इंसान को पीछे छोड़ दिया. सर्वे में शामिल 61 परसेंट लोगों ने साफ कहा कि उनकी कंपनी ने उन्हें AI इस्तेमाल करने के लिए कोई ठोस गाइडेंस या ट्रेनिंग नहीं दी है. सिर्फ 37 परसेंट खुशकिस्मत लोग ऐसे हैं जिन्हें सही तरीके से सिखाया गया है.
यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे किसी को बिना ड्राइविंग सिखाए एक सुपरफास्ट कार की चाबी थमा दी जाए. लोग अपनी मर्जी से टूल्स इस्तेमाल तो कर रहे हैं, लेकिन बिना ट्रेनिंग के. यही वजह है कि आधे से ज्यादा यानी 55 परसेंट लोगों को लगता है कि कंपनियां सिर्फ मजबूरी में AI अपना रही हैं, जबकि 37 परसेंट को लगता है कि यह सिर्फ एक दिखावा या ट्रेंड है जिसकी शायद बिजनेस को उतनी जरूरत भी नहीं है.
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भले ही ट्रेनिंग न मिली हो, लेकिन काम का बोझ कम करने के लिए 67 परसेंट प्रोफेशनल्स ने खुद ही AI टूल्स का सहारा लेना शुरू कर दिया है. ये लोग छोटे-मोटे और रोजमर्रा के काम को ऑटोमेट कर रहे हैं. अनुभव की बात करें तो करीब 69 परसेंट लोगों को लगता है कि इससे उनका काम आसान हुआ है.
लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू भी है. करीब 25 परसेंट लोग ऐसे भी हैं जिन्हें लगता है कि AI ने उनके काम को और भी ज्यादा जटिल या मुश्किल बना दिया है. इसका मतलब यह है कि AI हर किसी के लिए वरदान साबित नहीं हो रहा है. अगर इसे सही तरीके से लागू न किया जाए, तो यह काम घटाने के बजाय उलझाने का जरिया बन सकता है.
डाटा और नतीजों की बात आती है, तो आज भी इंसान का दिमाग ही सबसे आगे है. रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ 49 परसेंट लोग ही ऐसे हैं जो AI के दिए हुए सुझावों या डाटा पर आंख बंद करके भरोसा करते हैं. वहीं, 36 परसेंट लोग तो इस पर बिल्कुल भी यकीन नहीं करते और उसे दोबारा चेक करना जरूरी समझते हैं. 15 परसेंट लोग ऐसे हैं जिनका भरोसा इस बात पर टिका होता है कि काम किस तरह का है. यह दिखाता है कि दफ्तरों में मशीन और इंसान के बीच भरोसे की दीवार अभी काफी ऊंची है.
यह रिपोर्ट नवंबर 2025 के आंकड़ों पर आधारित है और 2026 की शुरुआत में जो संकेत मिल रहे हैं, वे साफ हैं. AI कोई ऐसी चीज नहीं है जो कल आएगी, वह आज आपके डेस्क पर पहुंच चुकी है. अगर आप एक प्रोफेशनल हैं, तो आपको खुद को अपडेट करना ही होगा. कंपनियों को भी समझना होगा कि सिर्फ टूल खरीदने से काम नहीं चलेगा, उन्हें अपने वर्कफोर्स पर भी निवेश करना होगा. आने वाले दो-तीन सालों में जो लोग इस बदलाव के साथ तालमेल बिठा लेंगे, वही इस डिजिटल दौर में टिक पाएंगे.
जीनियस एचआरटेक की यह रिपोर्ट हम सबके लिए एक वेक-अप कॉल है. AI दफ्तरों में अपनी जगह बना चुका है, लेकिन इंसान और मशीन के बीच का तालमेल अब भी अधूरा है. 71 परसेंट प्रोफेशनल्स का अपनी भूमिका बदलने की उम्मीद करना यह बताता है कि हम एक बड़े बदलाव के मुहाने पर खड़े हैं.
अगर कंपनियां ट्रेनिंग पर ध्यान नहीं देती हैं, तो यह तकनीक फायदे से ज्यादा तनाव पैदा कर सकती है. अब समय आ गया है कि हम सिर्फ टूल्स के पीछे न भागें, बल्कि अपनी स्किल्स को भी उसी रफ्तार से बढ़ाएं. याद रखें, AI शायद आपकी नौकरी न ले, लेकिन जो इंसान AI चलाना जानता होगा, वह आपकी जगह जरूर ले सकता है.
Q1: कितने प्रतिशत लोगों को लगता है कि AI से उनका जॉब रोल बदल जाएगा?
A: रिपोर्ट के अनुसार, 71 प्रतिशत प्रोफेशनल्स का मानना है कि अगले दो से तीन सालों में AI और नए वर्कफ्लो की वजह से उनकी जिम्मेदारियां और काम करने का तरीका काफी हद तक बदल जाएगा.
Q2: क्या कंपनियां अपने कर्मचारियों को AI की ट्रेनिंग दे रही हैं?
A: नहीं, सर्वे में शामिल 61 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उनकी कंपनियों ने उन्हें AI के प्रभावी इस्तेमाल के लिए कोई पर्याप्त ट्रेनिंग या गाइडेंस नहीं दी है. केवल 37 प्रतिशत लोगों को ही सही ट्रेनिंग मिली है.
Q3: क्या लोग अपने डेली रूटीन में AI टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं?
A: हां, ट्रेनिंग की कमी के बावजूद 67 प्रतिशत प्रोफेशनल्स ने अपने रोजाना के कामों को आसान बनाने और ऑटोमेट करने के लिए AI टूल्स का इस्तेमाल शुरू कर दिया है.
Q4: AI पर प्रोफेशनल्स का भरोसा कितना है?
A: AI पर भरोसे को लेकर राय बंटी हुई है. केवल 49 प्रतिशत लोग ही इसके डाटा पर भरोसा करते हैं, जबकि 36 प्रतिशत बिल्कुल भरोसा नहीं करते और बाकी लोग काम के आधार पर तय करते हैं.
Q5: AI के इस्तेमाल से काम के अनुभव पर क्या असर पड़ा है?
A: करीब 69 प्रतिशत लोगों का मानना है कि AI ने उनके काम की प्रक्रिया को आसान बनाया है, जबकि 25 प्रतिशत लोगों को लगता है कि इससे काम में जटिलता और बढ़ गई है.