खुशखबरी: अब गोद लेने वाली हर मां को मिलेगा मैटरनिटी लीव! सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, खत्म हुई 3 महीने की शर्त

सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद अब गोद लेने वाली सभी महिलाओं को मैटरनिटी लीव का पूरा अधिकार मिलेगा, चाहे बच्चा किसी भी उम्र का हो. कोर्ट ने साफ कहा कि मातृत्व सिर्फ जन्म नहीं, बल्कि देखभाल और जिम्मेदारी भी है.
खुशखबरी: अब गोद लेने वाली हर मां को मिलेगा मैटरनिटी लीव! सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, खत्म हुई 3 महीने की शर्त

सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम और दूरगामी फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया है कि अब गोद लेने वाली महिलाओं को भी मैटरनिटी लीव का पूरा अधिकार मिलेगा,फिर चाहे बच्चा 3 महीने से छोटा हो या बड़ा.सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मातृत्व सिर्फ जन्म देने तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चे की देखभाल और परवरिश भी उतनी ही जरूरी है.

सवाल: क्या था पुराना नियम?

  • अब तक कानून के तहत सिर्फ उन्हीं महिलाओं को मातृत्व अवकाश मिलता था, जो 3 महीने से कम उम्र के बच्चे को गोद लेती थीं
  • 12 हफ्ते की छुट्टी का प्रावधान
  • 3 महीने से बड़े बच्चे को गोद लेने पर यह सुविधा नहीं
  • यानी बड़ी उम्र के बच्चे को गोद लेने वाली महिलाओं को इस हक से वंचित रखा जाता था.
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सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

  • कोर्ट ने Code on Social Security, 2020 की धारा 60(4) को असंवैधानिक करार दे दिया है.
  • यह प्रावधान अनुच्छेद 14 (समानता) और अनुच्छेद 21 (जीवन और गरिमा का अधिकार) का उल्लंघन था
  • कोर्ट ने साफ कहा कि गोद लिया बच्चा और जैविक बच्चा अलग नहीं है
  • मातृत्व एक मानवाधिकार है
  • परिवार बनाने के गैर-जैविक तरीके भी उतने ही वैध हैं

“मां, मां होती है”-कोर्ट का साफ संदेश

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि मातृत्व का मतलब सिर्फ जन्म देना नहीं है, जी हां गोद लेने वाली मां को भी बच्चे के साथ समय चाहिए. तो फिर बच्चे की देखभाल के लिए छुट्टी जरूरी है. असल में कोर्ट ने यह भी माना कि रिप्रोडक्टिव ऑटोनॉमी (Reproductive autonomy) केवल र्फ जैविक प्रक्रिया तक सीमित नहीं है.

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समझें लीव को लेकर साफ शब्दों में कोर्ट का फैसला

कोर्ट ने Code on social Security एक्ट के सेक्शन 60(4) को रद्द कर दिया जिसके मुताबिक 3 महीने तक के बच्चे को गोद लेने पर 12 हफ्ते की छुट्टी का प्रावधान था.कोर्ट ने कहा कि क़ानून का यह प्रावधान आर्टिकल 14 और 21 के तहत मिले मौलिक अधिकार का हनन है,तो अगर इसके तहत बच्चे की आयु सीमा की यह शर्त बरकार रखी जाती है तो क़ानून का कोई औचित्य नहीं रह जाएगा.सुप्रीम कोर्ट के फैसले का मतलब है कि अब हर उम्र के बच्चों को गोद लेने हर मां को maternity leave मिलेगी. अभी तक सिर्फ 3 महीने तक के बच्चों को गोद लेने वाले महिलाओं को यह 12 महीने की छुट्टी मिलती थी.

देशभर की कामकाजी महिलाओं को बड़ा फायदा

इस फैसले का असर पूरे देश में दिखेगा, खासकर कामकाजी महिलाओं पर, दत्तक (adoptive) माताओं पर कॉर्पोरेट और सरकारी कर्मचारियों पर. यानी कि अब अब कोई भी कंपनी या संस्था 3 महीने से बड़े बच्चे को गोद लेने पर छुट्टी देने से इनकार नहीं कर सकती.

क्या पितृत्व अवकाश (Paternity Leave) भी आएगा?

कोर्ट ने केंद्र सरकार से यह भी कहा है कि पितृत्व अवकाश नीति (Paternity Leave Policy) पर भी विचार किया जाएगा.यानी कि इसका मतलब है कि भविष्य में पिता को भी बच्चे की देखभाल के लिए छुट्टी मिल सकती है.


कानून से लेकर समाज तक बदलाव

  • यह फैसला सिर्फ कानूनी बदलाव नहीं, बल्कि सोच में भी बदलाव लाता है.
  • गोद लेने को बढ़ावा मिलेगा
  • बच्चों को बेहतर परवरिश मिलेगी
  • महिलाओं के साथ भेदभाव कम होगा
  • अब मातृत्व को सिर्फ जन्म नहीं, बल्कि जिम्मेदारी के रूप में देखा जाएगा

मातृत्व का असली मतलब समझा कोर्ट ने

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला साफ करता है कि मां होने का हक सिर्फ जैविक नहीं, भावनात्मक और सामाजिक भी है तो अब गोद लेने वाली हर महिला को वह सम्मान और अधिकार मिलेगा, जिसकी वह हकदार है.जी हां यह फैसला हजारों कामकाजी महिलाओं के लिए राहत लेकर आया है और आने वाले समय में परिवार और समाज दोनों पर इसका सकारात्मक असर दिखेगा.

FAQs

1. सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया है?
कोर्ट ने गोद लेने वाली महिलाओं को बच्चे की उम्र की सीमा के बिना मैटरनिटी लीव देने का अधिकार दिया है

2. पहले क्या नियम था?
पहले सिर्फ 3 महीने से कम उम्र के बच्चे को गोद लेने पर ही 12 हफ्ते की छुट्टी मिलती थी

3. कोर्ट ने किस कानून को असंवैधानिक बताया?
Code on Social Security, 2020 की धारा 60(4) को असंवैधानिक घोषित किया गया

4. इस फैसले से किसे फायदा होगा?
देशभर की कामकाजी महिलाओं, खासकर adoptive mothers को इसका बड़ा लाभ मिलेगा

5. क्या पितृत्व अवकाश पर भी कुछ कहा गया है?
कोर्ट ने सरकार को पितृत्व अवकाश नीति पर विचार करने की सलाह दी है

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