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इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गेनाइजेशन (इसरो) ने शनिवार को कहा कि भारत की स्पेस बेस्ड सोलर ऑब्जर्वेटरी आदित्य-एल1 पृथ्वी के प्रभाव क्षेत्र से सफलतापूर्वक बाहर चली गई है. आदित्य-एल1 ने अब तक 9.2 लाख किमी से अधिक की यात्रा तय कर ली है. साथ ही भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ने ये भी बताया कि आदित्य-एल1 अब सन-अर्थ लैग्रेंज प्वाइंट 1 (एल1) की ओर अपना रास्ता तय कर रहा है.
ISRO ने दि जानकारी
इसरो ने बताया कि ये लगातार दूसरी बार है कि इसरो ने पृथ्वी के प्रभाव क्षेत्र के बाहर एक अंतरिक्ष यान भेजा है जो पहली बार मंगल ऑर्बिटर मिशन को पृथ्वी की कक्षा से बाहर भेजा गया था और साथ ही ये लगातार पांचवीं बार है जब इसरो ने किसी वस्तु को किसी केलेस्टिल बॉडी या स्पेस में सफलतापूर्वक ट्रांन्सफर किया है. बता दें कि इसरो ने अंतरिक्ष यान को तीन बार चंद्रमा और एक बार मंगल की ओर ट्रांन्सफर किया है.
आदित्य-एल1 को 2 सितंबर को भारतीय रॉकेट, पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल-एक्सएल (पीएसएलवी-एक्सएल) से निम्न पृथ्वी कक्षा (एलईओ) में स्थापित किया गया. उस समय से इसरो ने अंतरिक्ष यान की कक्षा को चार बार बढ़ाया है.
जैसे ही अंतरिक्ष यान पृथ्वी के ग्ररैवीटेशनल इनफ्लूएंस जोन (एसओआई) से बाहर निकलने के बाद लैग्रेंज प्वाइंट (एल1) की ओर यात्रा करेगा, क्रूज़ चरण शुरू हो जाएगा. फिर, इसे एल1 के चारों ओर एक बड़े हैलो ऑर्बिट में इंजेक्ट किया जाएगा.
इतना लगेगा समय
लॉन्च से एल1 तक की कुल यात्रा में आदित्य-एल1 को लगभग चार महीने यानी 125 दिन और लगेंगे और पृथ्वी से दूरी लगभग 1.5 मिलियन किमी होगी.
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