Aadhaar Card बनवाते समय मत करना ये गलती, वरना खानी पड़ सकती है जेल की हवा! समझ लीजिए UIDAI का ये नियम

आधार कार्ड में गलत जानकारी देना, किसी और का आधार इस्तेमाल करना या बिना सहमति डेटा शेयर करना गंभीर अपराध है. जानें UIDAI के नियम, सजा और जुर्माने के प्रावधान और सुरक्षित रहने के आसान तरीके.
Aadhaar Card बनवाते समय मत करना ये गलती, वरना खानी पड़ सकती है जेल की हवा! समझ लीजिए UIDAI का ये नियम

आधार कार्ड आज हर भारतीय के लिए सबसे जरूरी पहचान पत्र बन चुका है. बैंक खाता खोलना हो, मोबाइल सिम लेना हो या किसी सरकारी योजना का लाभ उठाना हो, हर जगह इसकी जरूरत पड़ती है. लेकिन इसकी अहमियत जितनी बड़ी है, उतनी ही इसके साथ सावधानी बरतना भी जरूरी है. कई बार लोग आधार कार्ड अपडेट या नामांकन के समय अनजाने में या जानबूझकर गलत जानकारी दे देते हैं, ये एक गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है. ऐसे में आपको इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है. जानिए किन स्थितियों में आपके लिए बढ़ती है परेशानी.

गलत जानकारी देने पर बढ़ती है मुश्किल

अगर आप अपने आधार में नाम, पता, जन्मतिथि या मोबाइल नंबर जैसे डीटेल्‍स जानबूझकर गलत देते हैं तो ये कानूनन अपराध है. फर्जी दस्तावेज जमा करना या किसी और की पहचान का इस्‍तेमाल करके आधार बनवाना भी दंडनीय है. UIDAI ऐसे मामलों पर कड़ी कार्रवाई कर सकता है. भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने ऐसे मामलों से निपटने के लिए सख्त नियम बनाए हैं.

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सजा और जुर्माने का प्रावधान

जानबूझकर गलत जानकारी देने पर सज़ा

आधार एक्ट के मुताबिक, अगर कोई पर्सन एनरोलमेंट या अपडेट के दौरान जानबूझकर गलत डेमोग्राफिक या बायोमेट्रिक इंफॉर्मेशन देता है, तो उसे तीन साल तक की जेल और 10,000 रुपए तक का जुर्माना हो सकता है.

दूसरे के आधार का इस्तेमाल

अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी दूसरे व्यक्ति के आधार कार्ड का इस्तेमाल करता है, तो उसे तीन साल तक की कैद और 10,000 रुपए से लेकर एक लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.

बिना सहमति जानकारी स्टोर करना

अगर आप किसी दूसरे व्यक्ति के आधार की जानकारी उसकी सहमति के बिना अपने पास रखते हैं या किसी और के साथ साझा करते हैं, तो ये भी एक गंभीर अपराध है. आधार एक्ट की धारा 39 के तहत इसके लिए 3 साल की जेल और जुर्माना हो सकता है.

फर्जी एजेंसी बनना

अगर कोई व्यक्ति या संस्था खुद को UIDAI द्वारा अधिकृत एजेंसी बताकर लोगों की जानकारी इकट्ठा करती है, तो उस व्यक्ति को 3 साल तक की जेल और 10,000 रुपए का जुर्माना, और अगर ये काम कोई कंपनी करती है तो उस पर 1 लाख रुपए का जुर्माना लगाया जा सकता है.

डेटाबेस से छेड़छाड़

आधार के सेंट्रल आइडेंटिटीज डेटा रिपॉजिटरी (CIDR) यानी डेटाबेस से छेड़छाड़ या हैकिंग की कोशिश करने पर सबसे कड़ी सजा का प्रावधान है. ऐसे मामले में 10 साल तक की जेल और 10 लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है.

कानूनी पचड़ों से बचने के स्मार्ट तरीके

  • सही जानकारी दें: आधार नामांकन या अपडेट करते समय हमेशा वास्तविक और सटीक जानकारी ही दें.
  • फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल न करें: किसी भी जाली कागजात से आधार अपडेट कराने की कोशिश न करें.
  • दूसरे का आधार न प्रयोग करें: किसी और के आधार को डाउनलोड या उपयोग न करें.
  • अनधिकृत शेयरिंग से बचें: बिना अनुमति किसी की आधार जानकारी साझा न करें.

आधार फ्रॉड से बचने के जरूरी कदम

  • UIDAI वेबसाइट या mAadhaar ऐप से अपने फिंगरप्रिंट और आइरिस डेटा को लॉक करें. इससे कोई और आपके बायोमेट्रिक का गलत इस्तेमाल नहीं कर पाएगा.
  • अपने आधार से हमेशा लेटेस्ट मोबाइल नंबर लिंक करें ताकि किसी भी गतिविधि का अलर्ट तुरंत मिल सके.
  • जहां सिर्फ पहचान की जरूरत हो वहां मास्क्ड आधार दें. इसमें आपके नंबर के शुरुआती 8 अंक छिपे रहते हैं.
  • कोई भी संदिग्ध गतिविधि दिखे तो UIDAI हेल्पलाइन 1947 पर तुरंत शिकायत करें.

FAQs

1. अगर आधार में गलती अनजाने में हुई तो क्या सजा होगी?

नहीं, अगर गलती अनजाने में हुई है तो आप सही दस्तावेजों के साथ अपडेट कर सकते हैं. सजा जानबूझकर धोखाधड़ी करने पर होती है.

2. क्या हर जगह आधार नंबर देना सुरक्षित है?

नहीं, जहां जरूरी हो वहीं दें. फोटोकॉपी के लिए मास्क्ड आधार का प्रयोग करें.

3. अगर मेरे आधार से कोई और सिम ले रहा है तो क्या करें?

तुरंत टेलीकॉम कंपनी और UIDAI के 1947 नंबर पर शिकायत दर्ज कराएं.

4. मृत व्यक्ति का आधार कैसे डीएक्टिवेट करें?

myAadhaar पोर्टल पर मृत्यु प्रमाणपत्र देकर डीएक्टिवेशन का आवेदन कर सकते हैं.

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