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WPI Data
थोक बाजार से महंगाई की एक नई तस्वीर सामने आई है. सोमवार को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जनवरी में थोक महंगाई दर 1.81% रही. यह दिसंबर के 0.83% से साफ तौर पर ज्यादा है. महीने-दर-महीने (MoM) आधार पर WPI में 0.51% की बढ़ोतरी दर्ज की गई. यह उछाल बताता है कि थोक स्तर पर कीमतों में दबाव तेजी से बढ़ रहा है.
जनवरी में पॉजिटिव महंगाई दर मुख्य रूप से इन क्षेत्रों में ऊंची कीमतों के कारण रही:
मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की महंगाई दिसंबर के 1.82% से बढ़कर जनवरी में 2.86% हो गई. यह साफ संकेत है कि उत्पादन लागत में इजाफा हो रहा है.
दिसंबर में फूड महंगाई शून्य (0.00%) पर थी, लेकिन जनवरी में यह बढ़कर 1.41% पर पहुंच गई. यानी खाने-पीने की चीजों के दाम थोक स्तर पर बढ़े हैं. यह ट्रेंड इसलिए अहम है क्योंकि थोक में बढ़त अक्सर कुछ समय बाद खुदरा बाजार में भी दिखाई देती है.
दिलचस्प बात यह है कि फ्यूल और पावर सेक्टर में महंगाई नकारात्मक रही. जनवरी में यह -4.01% रही, जबकि दिसंबर में इसमें 2.31% की गिरावट दर्ज की गई थी. यानी ऊर्जा की कीमतों में नरमी बनी हुई है, जिसने कुल महंगाई को और ज्यादा तेज होने से कुछ हद तक रोका.
प्राइमरी आर्टिकल्स (जैसे कृषि उत्पाद) की महंगाई जनवरी में 2.21% पर पहुंच गई, जो दिसंबर में सिर्फ 0.21% थी. यह बड़ा बदलाव बताता है कि कच्चे माल की कीमतों में तेजी आई है.
जहां थोक महंगाई 1.81% पर पहुंची, वहीं CPI के अनुसार जनवरी 2026 में खुदरा महंगाई 2.75% रही. खाद्य वस्तुओं और कीमती धातुओं की कीमतों में बढ़ोतरी ने खुदरा महंगाई को भी ऊपर धकेला है.
| इंडेक्स | दिसंबर (%) | जनवरी (%) |
| फूड | 0.00 | 1.41 |
| प्राइमरी आर्टिकल | 0.21 | 2.21 |
| मैन्युफैक्चरिंग | 1.82 | 2.86 |
| फ्यूल एंड पावर | -2.31 | -4.01 |
| WPI (टोटल) | 0.83 | 1.81 |
तालिका से साफ दिखता है कि महंगाई का दबाव मुख्यतः मैन्युफैक्चरिंग और प्राइमरी आर्टिकल्स से आया है।
थोक महंगाई बढ़ने का सीधा असर तुरंत जेब पर नहीं दिखता, लेकिन अगर यह ट्रेंड जारी रहता है तो कुछ महीनों में खुदरा कीमतों पर भी दबाव बन सकता है.