लगातार बढ़ती ब्याज दरों ने बढ़ाई UN की टेंशन, कहा- इससे ग्लोबल मंदी का खतरा

RBI का भी मानना है कि कोरोना महामारी, रूस-युक्रेन युद्ध के बाद विकसित देशों के सेंट्रल बैंकों द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी तीसरी सबसे बड़ी चिंता है, जिससे ग्लोबल इकोनॉमी के लिए मुश्किलें बढ़ी हैं.
लगातार बढ़ती ब्याज दरों ने बढ़ाई UN की टेंशन, कहा- इससे ग्लोबल मंदी का खतरा

बेतहासा बढ़ती महंगाई ने ग्लोबल इकोनॉमी की चिंताएं बढ़ा दी है. इससे केंद्रीय बैंकों पर दबाव बढ़ा है. नतीजतन, केंद्रीय बैंक महंगाई पर लगाम कसने के लिए लगातार ब्याज दरों में इजाफा कर रहे हैं. लेकिन इस पर संयुक्त राष्ट्रसंघ (UN) ने चिंता जताई है. यूनाइटेड नेशन कॉन्फ्रेंस ऑन ट्रेड एंड डेवलपमेंट (UNCTAD) के मुताबिक लगातार दरों में बढ़ोतरी ग्लोबल इकोनॉमी को मंदी तरफ ढकेल रहा है. केंद्रीय बैंकों को दरों में बढ़ोतरी को रोकना चाहिए.

विकसित देशों में दरें बढ़ने से चिंतित UN

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UNCTAD ने अमेरिकी सेंट्रल बैंक समेत अन्य सेंट्रल बैंकों से दरों में बढ़ोतरी रोकने की बात कही है. RBI का भी मानना है कि कोरोना महामारी, रूस-युक्रेन युद्ध के बाद विकसित देशों के सेंट्रल बैंकों द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी तीसरी सबसे बड़ी चिंता है, जिससे ग्लोबल इकोनॉमी के लिए मुश्किलें बढ़ी हैं. ग्लोबल इकोनॉमिक आउटलुक पर सालाना रिपोर्ट में UN ने कहा कि फेड अगर आगे ब्याज दरों में बढ़ाता है तो इसका विकासशील देशों पर बुरा असर पड़ेगा.

विकासशील देशों को हो रही दिक्कत

एजेंसी के मुताबिक इस साल अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने से विकासशील देशों के लिए फ्यूचर इनकम का अनुमान घटकर 360 अरब डॉलर हो गया. हालांकि, विकासशील देशों में चीन को बाहर रखा गया है. बता दें कि पिछले महीने फेड और बैंक ऑफ इंग्लैंड ने महंगाई दर 2 फीसदी तक लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. 2022 के अंत तक ब्याज दरें बढ़कर 4.4 फीसदी और 2023 में 4.6 फीसदी होगी. ऊंची ब्याज दरों का मतलब है कि आम लोगों को ज्यादा EMI भरना होगा. भारत में RBI ने अबतक लगातार 4 बार दरों में बढ़ोतरी की

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