कर्ज की वजह से खराब हो रहे विकासशील देशों के हालात, गरीब देशों पर सालाना कर्ज 35 प्रतिशत बढ़ा

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) ने शुक्रवार को कई विकासशील देशों की कर्ज को लेकर नाजुक होती स्थिति का मुद्दा उठाया. वित्त मंत्री ने कर्ज के भार से निपटने के लिए ‘बहुपक्षीय समन्वय’ के बारे में जी20 के सदस्य देशों से विचार आमंत्रित किए.
कर्ज की वजह से खराब हो रहे विकासशील देशों के हालात, गरीब देशों पर सालाना कर्ज 35 प्रतिशत बढ़ा

कर्ज की वजह से खराब हो रहे विकासशील देशों के हालात, गरीब देशों पर सालाना कर्ज 35 प्रतिशत बढ़ा (PTI)

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) ने शुक्रवार को कई विकासशील देशों की कर्ज को लेकर नाजुक होती स्थिति का मुद्दा उठाया. वित्त मंत्री ने कर्ज के भार से निपटने के लिए ‘बहुपक्षीय समन्वय’ के बारे में जी20 के सदस्य देशों से विचार आमंत्रित किए. G-20 वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नरों (FMCBG) की बैठक के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए निर्मला सीतारमण ने इस मुद्दे पर भी विचारों को आमंत्रित किया कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक जैसे बहुपक्षीय विकास बैंकों को किस तरह मजबूत किया जा सकता है, जिससे वे 21वीं सदी की साझा वैश्विक चुनौतियों का सामना कर सके और इसके साथ ही सतत विकास लक्ष्यों और गरीबी उन्मूलन पर ध्यान केंद्रित रख सकें.

कर्ज के बोझ से बढ़ी रही अस्थिरता पर मांगे विचार

G20 एफएमसीबीजी बैठक के पहले सत्र में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय ढांचे, सतत वित्त और अवसंरचना पर बात हुई. वित्त मंत्रालय ने ट्वीट किया, ‘‘वित्त मंत्री ने अनेक संवेदनशील देशों में कर्ज को लेकर बढ़ते अस्थिरता के हालात का जिक्र किया और बहुपक्षीय सहयोग पर जी-20 के सदस्य देशों से विचार मांगे. उन्होंने कहा कि वैश्विक कर्ज अस्थिरता का प्रबंधन करना विश्व अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी होगा.’’

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गरीब देशों पर 35 फीसदी बढ़ा सालाना कर्ज

बताते चलें कि विश्व बैंक के अध्यक्ष डेविड मालपास ने पिछले साल दिसंबर में कहा था कि दुनिया के सबसे गरीब देशों पर सालाना 62 अरब डॉलर का कर्ज है जो साल 2021 के 46 अरब डॉलर की तुलना में 35 फीसदी बढ़ गया है और इसके साथ ही चूक का जोखिम भी बढ़ गया है. ऐसी आशंका है कि कर्ज को लेकर विकासशील देशों की जो नाजुक स्थिति है, यदि उस पर ध्यान नहीं दिया गया तो ये वैश्विक मंदी का कारण बन सकती है और लाखों लोगों को भीषण गरीबी में धकेल सकती है.

भाषा इनपुट्स के साथ

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