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नेट जीरो की राह में भारत की बड़ी छलांग.
भारत की छतों पर अब सूरज की रोशनी से सिर्फ उजाला नहीं होगा, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण को नई ऊर्जा मिलेगी. वाशिंगटन से एक बड़ी और सुखद खबर आई है. मंगलवार, 17 फरवरी 2026 को वर्ल्ड बैंक ग्रुप की गारंटी देने वाली शाखा ने भारत के रूफटॉप सोलर प्लान के लिए करीब 19.76 करोड़ डॉलर की भारी-भरकम गारंटी को मंजूरी दे दी है. यह फैसला भारत के उस सपने को सच करने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जहां हर फैक्ट्री और दफ्तर की छत अपनी बिजली खुद बनाएगी.
यह पांच साल का सपोर्ट असल में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को दिए गए 500 मिलियन डॉलर के पुराने कर्ज को रिफाइनेंस करने के लिए है. सरल शब्दों में कहें तो, इस गारंटी की मदद से अब सोलर प्रोजेक्ट्स के लिए पैसा जुटाना और उसे मैनेज करना काफी सस्ता और आसान हो जाएगा.
इस पूरी डील के पीछे मल्टीलैटरल इन्वेस्टमेंट गारंटी एजेंसी यानी मीगा (MIGA) का हाथ है. मीगा ने यह गारंटी सिटी बैंक (Citibank N.A.) को दी है. सिटी बैंक ने एसबीआई को यह लोन दिया है. इस पार्टनरशिप का सबसे बड़ा फायदा उन कमर्शियल और इंडस्ट्रियल ग्राहकों को होगा जो अपनी छतों पर ग्रिड से जुड़े सोलर सिस्टम लगाना चाहते हैं.
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जब छतों पर सोलर पैनल लगते हैं, तो न केवल बिजली के बिल कम होते हैं, बल्कि कोयले से बनने वाली महंगी और प्रदूषण फैलाने वाली बिजली पर निर्भरता भी घटती है. इससे जहरीली गैसों का उत्सर्जन कम होता है और हम एक स्वच्छ भविष्य की ओर बढ़ते हैं.
देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई को सरकार ने एक खास जिम्मा सौंपा है. एसबीआई को अपने कुल कर्ज का कम से कम 7.5 फीसदी हिस्सा 'ग्रीन फाइनेंसिंग' यानी पर्यावरण के अनुकूल प्रोजेक्ट्स के लिए देना है. एसबीआई ने इस रूफटॉप सोलर प्रोजेक्ट की शुरुआत साल 2016 में ही कर दी थी. उस समय वर्ल्ड बैंक ने तकनीकी मदद और पैसा देकर यह साबित किया था कि छतों पर सोलर पैनल लगाना बिजनेस के लिहाज से कितना फायदेमंद है.
आज नतीजे सबके सामने हैं. वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट बताती है कि इस प्रोग्राम के तहत अब तक 1,004 मेगावाट के सोलर सिस्टम लगाए जा चुके हैं. यह आंकड़ा बताता है कि भारत की इंडस्ट्री अब सौर ऊर्जा को अपनाने के लिए पूरी तरह तैयार है.
सिटी बैंक इस प्रोजेक्ट में अकेले कर्जदाता के तौर पर काम कर रहा है. सिटी बैंक की अधिकारी स्टेफनी वॉन फ्रीडबर्ग का कहना है कि यह ट्रांजैक्शन भारत की ग्रीन इकोनॉमी को मजबूत करने के लिए उनकी प्रतिबद्धता को दिखाता है. यह पिछले दो सालों में सिटी, मीगा और एसबीआई के बीच दूसरी बड़ी साझेदारी है.
एसबीआई के मैनेजिंग डायरेक्टर राणा आशुतोष कुमार सिंह ने इसे एक 'पायनियरिंग' यानी मिसाल पेश करने वाला सौदा बताया है. उनके मुताबिक, यह गठबंधन भारत के कार्बन फुटप्रिंट को कम करने और 'नेट जीरो' के लक्ष्य को पाने में मदद करेगा.
इस गारंटी का एक बड़ा फायदा यह भी है कि इससे एसबीआई के लिए कर्ज लेने की लागत कम हो जाएगी. जब गारंटी मिलती है, तो बैंक को बाजार से पैसा उठाने में कम ब्याज देना पड़ता है. साथ ही, मीगा की इस गारंटी की वजह से वर्ल्ड बैंक के पास अब भारत सरकार को और ज्यादा कर्ज देने की जगह (Headroom) बन गई है, क्योंकि पुराने लोन का बोझ अब कमर्शियल कर्जदाताओं के बैलेंस शीट पर शिफ्ट हो गया है. मीगा अब अपने गारंटी प्रोडक्ट्स को और बढ़ाने की तैयारी में है. साल 2030 तक उसका लक्ष्य सालाना 20 अरब डॉलर की गारंटी जारी करने का है, ताकि विकासशील देशों में प्राइवेट निवेश को बढ़ावा दिया जा सके.