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यूपी बजट में महिलाओं को क्या मिला खास?
उत्तर प्रदेश सरकार ने बुधवार को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए बजट पेश किया. सुबह 11 बजे विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बजट पढ़ना शुरू किया. उन्होंने बताया कि यह बजट पिछले साल की तुलना में करीब 12.2 प्रतिशत अधिक है, यानी सरकार ने इस बार खर्च और योजनाओं का दायरा और बढ़ा दिया है.
इस बजट में इस बार महिलाओं का भी खास ध्यान रखा गया है. सरकार ने गांव से लेकर शहर तक महिलाओं के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं. इस बार का बजट बताता है कि महिला सशक्तिकरण अब भाषण नहीं, बल्कि जमीनी योजनाओं में दिख रहा है.
यूपी बजट 2026 में महिलाओं के रोजगार और आत्मनिर्भरता पर खास जोर दिया गया है. वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने घोषणा की कि प्रदेश में महिलाओं के लिए विशेष स्किल डेवलपमेंट सेंटर खोले जाएंगे. इन केंद्रों पर महिलाओं को आधुनिक तकनीकी और व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे समय की जरूरत के हिसाब से काम सीख सकें.
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इसके साथ ही अलग से जॉब प्लेसमेंट सेंटर भी बनाए जाएंगे, जो प्रशिक्षित महिलाओं को कंपनियों और संस्थानों से जोड़ेंगे. सरकार का उद्देश्य है कि महिलाएं ट्रेनिंग के बाद सीधे रोजगार से जुड़ें और आर्थिक रूप से मजबूत बन सकें.
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वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश की 58,000 ग्राम पंचायतों में 39,880 बी0सी0 सखियों ने 39,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का वित्तीय लेन-देन किया. इतना ही नहीं, इससे लगभग 107 करोड़ रुपये का लाभ अर्जित हुआ.
यह योजना केवल बैंकिंग सुविधा नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए आय का स्थायी स्रोत बन गई है. गांव की महिलाएं अब बैंक प्रतिनिधि के रूप में काम कर रही हैं और डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा दे रही हैं.
महिला सामर्थ्य योजना के तहत प्रदेश में 5 मिल्क प्रोड्यूसर कंपनियों के गठन का लक्ष्य रखा गया था. इनमें गोरखपुर, बरेली और रायबरेली में कंपनियां बन चुकी हैं और दुग्ध संग्रहण व विपणन शुरू हो गया है. प्रयागराज और लखनऊ में कंपनियां बनना प्रस्तावित हैं.
यह पहल ग्रामीण महिलाओं को डेयरी क्षेत्र में संगठित कर बाजार से जोड़ती है. यानी अब दूध बेचने वाली महिलाएं सिर्फ उत्पादक नहीं, बल्कि कंपनी की हिस्सेदार भी बन रही हैं.
उत्तर प्रदेश गन्ना उत्पादन में अग्रणी राज्य है, लेकिन इस बार बजट में महिला किसानों को खास प्राथमिकता दी गई है. लगभग 60,000 महिला गन्ना किसानों को पर्ची निर्गमन में प्राथमिकता मिल रही है. इसका मतलब है कि उन्हें समय पर भुगतान और उत्पादन प्रक्रिया में बेहतर अवसर मिल रहे हैं. इससे महिला किसानों की पहचान और आय दोनों बढ़ेंगी.
महिलाओं की सुरक्षा हमेशा बड़ा मुद्दा रहा है. सेफ सिटी परियोजना के तहत महिला पुलिस बीट, व्यापक सीसीटीवी नेटवर्क और एंटी-रोमियो स्क्वॉड की तैनाती की गई है. अब सार्वजनिक स्थलों, बाजारों और कार्यस्थलों पर निगरानी बढ़ी है. इससे खासतौर पर कामकाजी महिलाओं और छात्राओं को राहत मिली है.
नए शहरों में नौकरी के लिए आने वाली महिलाओं के लिए नगर निगमों में वर्किंग वूमेन हॉस्टल बनाए जा रहे हैं. इसका उद्देश्य है सुरक्षित और किफायती आवास उपलब्ध कराना. यह कदम खासकर उन महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण है, जो छोटे शहरों या गांवों से बड़े शहरों में काम की तलाश में आती हैं.
मिशन शक्ति के अंतर्गत सुरक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार सेवाओं को एक साथ जोड़ा गया है. यह केवल एक योजना नहीं, बल्कि एक समग्र रणनीति है जिसमें महिला हेल्पलाइन, स्वास्थ्य सेवाएं और रोजगार प्रशिक्षण शामिल हैं. इससे महिलाओं की सामाजिक भागीदारी और आत्मनिर्भरता को नई गति मिल रही है.
मुख्यमंत्री सुमंगला योजना के तहत जनवरी 2026 तक 26.81 लाख बालिकाएं लाभान्वित हो चुकी हैं. यह योजना जन्म से लेकर शिक्षा तक विभिन्न चरणों में आर्थिक सहायता देती है. इससे परिवारों में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच बढ़ी है और शिक्षा में निरंतरता सुनिश्चित हुई है.