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Iran-Israel War: मिडिल ईस्ट से आ रही खबरें ट्रंप प्रशासन के लिए किसी बुरे सपने जैसी साबित हो रही हैं. जिस युद्ध की शुरुआत को ट्रंप एक "त्वरित और सफल" ऑपरेशन बता रहे थे, वह अब एक लंबी और थका देने वाली जंग में बदलता दिख रहा है. बताया जा रहा है कि व्हाइट हाउस के अंदर इस वक्त भारी अफरा-तफरी का माहौल है. अब ट्रंप प्रशासन इस युद्ध को सितंबर तक चलने के हिसाब से तैयारियां कर रहा है.
ऐसे में एक बड़ा सवाल ये उठता है कि अगर वाकई ये युद्ध 100 दिनों तक चला तो क्या होगा? सबसे बड़ा संकट तो तेल और गैस पर आ सकता है, जिसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर देखने को मिल सकता है. आइए, समझते हैं कि दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति इस वक्त किन चुनौतियों से जूझ रही है और अगर यह युद्ध लंबा चला तो इसके क्या नतीजे हो सकते हैं.
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राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले संकेत दिया था कि यह युद्ध केवल चार सप्ताह चलेगा, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कह रही है:
खुफिया अधिकारियों की मांग: अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने फ्लोरिडा टैम्पा स्थित अपने मुख्यालय के लिए और अधिक सैन्य खुफिया अधिकारियों की मांग की है. ऐसा इसलिए ताकि ईरान के खिलाफ चल रहे ऑपरेशनों में कम से कम 100 दिनों तक सहायता मिल सके.
सितंबर तक की तैयारी: पेंटागन अब सितंबर तक चलने वाले ऑपरेशनों के लिए फंड आवंटित कर रहा है, जो ट्रंप के शुरुआती अनुमान से कहीं ज्यादा लंबा समय है.
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यह पहली बार है जब प्रशासन ने ईरान युद्ध के लिए अतिरिक्त खुफिया कर्मियों की मांग की है, और यह संकेत है कि पेंटागन पहले ही ऐसे ऑपरेशनों के लिए फंड आवंटित कर रहा है जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शुरुआती चार सप्ताह के युद्ध टाइमलाइन से कहीं ज्यादा लंबे चल सकते हैं.
आमतौर पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से पहले जिन तैयारियों की योजना काफी पहले से बनाई जाती है, उनके लिए अचानक लोगों और संसाधनों को जोड़ने की यह जल्दबाजी दिखाती है कि ट्रंप टीम ने शनिवार को इजरायल के साथ मिलकर शुरू किए गए युद्ध के व्यापक परिणामों का पूरी तरह अनुमान नहीं लगाया था.
मिडिल ईस्ट में बढ़ता युद्ध सिर्फ सैन्य टकराव नहीं है, बल्कि यह पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिला सकता है. दुनिया की करीब 30% तेल सप्लाई और 20% LNG व्यापार इसी क्षेत्र से होकर गुजरता है. अगर यह युद्ध 100 दिनों तक चलता है, तो इसका असर तेल की कीमतों, गैस, एविएशन, डॉलर-रुपया और आम लोगों की रसोई तक महसूस हो सकता है. आइए समझते हैं कि अगर युद्ध लंबा चला तो क्या-क्या बदल सकता है.
अभी वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड आमतौर पर 80-85 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है. लेकिन अगर युद्ध लंबा चला और होर्मुज जलसंधि प्रभावित हुई, तो तेल की कीमतें बढ़ सकती है.
कितनी अहम है होर्मुज जलसंधि: होर्मुज जलसंधि से दुनिया का लगभग 20% तेल गुजरता है. ऐसे में टैंकर रूट बदलने पड़ेंगे, जिससे ट्रांसपोर्ट महंगा होगा और नतीजा होगा कि कच्चा तेल महंगा हो जाएगा.
100 डॉलर का लेवल क्रॉस: उम्मीद जताई जा रही है कि ऐसे में कच्चा तेल 100-120 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है.
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पिछले कई सालों से डीजल पेट्रोल के दाम स्थिर हैं, लेकिन अगर कच्चा तेल लगातार महंगा हुआ तो सरकार डीजल-पेट्रोल के दाम कम से कम 10-20 रुपये तक तो बढ़ाने पड़ ही सकते हैं.
अभी 50 दिन का स्टॉक: सरकार ने कहा है कि भारत के पास अभी 50 दिन के तेल का स्टॉक है. सरकार को उम्मीद है कि अभी भले ही कच्चे तेल के दाम बढ़े हैं, लेकिन युद्ध खत्म होते ही इसकी कीमत गिरकर 70 डॉलर के आस-पास आ जाएगी.
टेंशन वाली बात: सरकार का अनुमान अधिकतम 50 दिन के हिसाब से है, जबकि पेंटागन की तैयारी 100 दिन की लग रही है, जो टेंशन वाली बात है. ऐसे में अगर युद्ध लंबा खिंचा, तो सरकार की 50 दिन की तैयारी काम नहीं आएगी.
अगर LNG और गैस सप्लाई बाधित हुई, तो इसका असर LPG सिलेंडर पर भी पड़ेगा.
हर घर पर असर: भारत में खाना बनाने के लिए एलपीजी और पीएनजी गैस का इस्तेमाल होता है. गैस सप्लाई बाधित होने का मतलब है कि इनके दामों में तेजी आ सकती है. यानी हर घर पर असर देखने को मिलेगा.
बाहर खाना भी होगा महंगा: गैस महंगी होने के मतलब है कि कमर्शियल सिलेंडर के भाव भी तेजी से बढ़ेंगे. भाव ज्यादा ही बढ़ गए तो होटल और रेस्टोरेंट में भी खाना महंगा हो सकता है.
भारत LNG आयात करता है, और उसका बड़ा हिस्सा कतर से आता है. अगर LNG सप्लाई में बाधा आई तो:
कार चलाना महंगा: सीएनजी के दामों पर सीधा असर देखने को मिलेगा. जिसकी वजह से कार चलाना महंगा हो जाएगा.
युद्ध के समय निवेशक सुरक्षित मुद्रा की तरफ जाते हैं. इसलिए डॉलर मजबूत हो सकता है.
रुपया होगा और कमजोर: डॉलर मजबूत होने का मतलब है कि रुपया और कमजोर हो सकता है, जो पहले ही काफी कमजोर है. अभी एक डॉलर 85 रुपये के आस-पास रहता है. बाद में हालात और बिगड़ सकते हैं.
आयात हो जाएगा महंगा: डॉलर में मजबूती आने का मतलब है कि आयात में पहले की तुलना में ज्यादा रुपये खर्च करने होंगे. इस तरह आयात की जाने वाली चीजों के दाम ऑटोमेटिक बढ़ जाएंगे.
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अगर युद्ध लंबा खिंचा तो एविएशन सेक्टर को तो दोहरी मार झेलनी पड़ेगी:
एयरस्पेस बंद: मिडिल ईस्ट एयरस्पेस कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का मुख्य रूट है. अगर युद्ध लंबा चला तो कई एयरस्पेस बंद रह सकते हैं.
महंगे टिकट: मिडिल ईस्ट एयरस्पेस बंद रहने का मतलब है कि फ्लाइट रूट लंबा होगा और ईंधन खर्च बढ़ेगा. यानी हवाई टिकट भी महंगा हो जाएगा.
एटीएफ भी महंगा: कच्चा तेल महंगा होने का मतलब है कि एटीएफ यानी एविएशन टरबाइन फ्यूल का भाव भी बढ़ेगा. यानी एक तो फ्यूल महंगा हो जाएगा, ऊपर से एयरस्पेस बंद होने के चलते लंबा रूट लेने की वजह से ज्याद प्यूल खर्च होगा. मतलब एविएशन सेक्टर पर दोहरी मार पड़ेगी.
होर्मुज जलसंधि और लाल सागर क्षेत्र से बहुत बड़ा व्यापार गुजरता है. अगर जहाजों को लंबा रास्ता लेना पड़ा तो शिपिंग लागत बढ़ जाएगी. इससे कंटेनर किराया महंगा हो जाएगा. नतीजा ये होगा कि इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और कई सामान महंगे हो सकते हैं, जो विदेशों से आ रहे हैं.
अगर ईरान-इजराइल युद्ध 100 दिनों तक चलता है तो इसका असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा. तेल और गैस की कीमतों से लेकर डॉलर-रुपये, एयरलाइन टिकट, शिपिंग और आपकी रसोई तक इसका असर दिख सकता है. हालांकि, भारत के पास अभी लगभग 50 दिनों का तेल स्टॉक और कई वैकल्पिक सप्लाई स्रोत हैं, जिससे तत्काल संकट टल सकता है, लेकिन लंबा युद्ध वैश्विक महंगाई बढ़ा सकता है.
1- क्या भारत के पास 100 दिन का तेल स्टॉक है?
नहीं, भारत सरकार के आधिकारिक डेटा के अनुसार हमारे पास वर्तमान में लगभग 50 दिनों का तेल स्टॉक (क्रूड + प्रोडक्ट्स) है.
2- युद्ध लंबा चलने पर पेट्रोल कितना महंगा हो सकता है?
कच्चे तेल के $120 पहुंचने पर पेट्रोल की कीमतों में ₹15 से ₹20 प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की आशंका है.
3- होर्मुज जलसंधि बंद होने से क्या होगा?
दुनिया की 20% तेल और गैस सप्लाई रुक जाएगी, जिससे वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट पैदा हो जाएगा और कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाएंगी.
4- क्या इस युद्ध से डॉलर और महंगा होगा?
जी हां, युद्ध जैसी अनिश्चितता में डॉलर की मांग बढ़ती है, जिससे रुपया और कमजोर हो सकता है.
5- हवाई टिकट क्यों महंगे होंगे?
एक तो ईंधन (ATF) महंगा होगा और दूसरा, एयरस्पेस बंद होने के कारण लंबे रूट से जाने पर ज्यादा तेल खर्च होगा.
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