भारत ही नहीं अब दुनिया के सभी देश खरीद सकेंगे समुद्र में फंसा रूसी तेल, अमेरिका ने 1 महीने के लिए हटाई पाबंदी

मध्यपूर्व में चल रहे तनाव के कारण उपजे तेल संकट को देखते हुए अमेरिका ने समुद्र में फंसे रूसी तेल की खरीद पर लगी पाबंदी को एक महीने के लिए हटा दिया है. पहले यह छूट केवल भारत को दी थी अब सभी देशों को यह छूट दे दी है.
भारत ही नहीं अब दुनिया के सभी देश खरीद सकेंगे समुद्र में फंसा रूसी तेल, अमेरिका ने 1 महीने के लिए हटाई पाबंदी

ईरान-इजरायल और अमेरिका युद्ध के कारण ग्लोबल मार्केट्स में तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के मकसद से अमेरिका ने समुद्र में फंसे रूसी तेल की खरीद पर लगी पाबंद को एक महीने (अप्रैल तक) हटा दिया है. अमेरिका के ट्रेजेरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसें ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इसकी जनकारी दी है. गौरतलब है कि अमेरिका ने पहले यह छूट केवल भारत को दी थी, लेकिन अब सभी देशों को इसका फायदा होगा. स्कॉट बेसेंट के मुताबिक इस फैसले का मकसद एनर्जी मार्केट को स्थिर रखना है.

रूसी तेल को दी अस्थाई मंजूरी

अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, "मौजूदा सप्लाई की वैश्विक पहुंच बढ़ाने के लिए ट्रेजरी डिपार्टमेंट समुद्र में फंसे रूसी तेल को खरीदने की अस्थाई मंजूरी दे रहा है."

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रूस को नहीं मिला आर्थिक फायदा

  • स्कॉट ने अपने पोस्ट में आगे लिखा कि यह एक बेहद सीमित और कम समय के लिए किया गया उपाय है जो केवल उन तेल शिपमेंट्स पर लागू होगा जो ट्रांजिट में हैं.
  • अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी के मुताबिक इस फैसले से रूसी सरकार को कोई महत्वपूर्ण वित्तीय लाभ नहीं होगा, क्योंकि रूस की तेल से होने वाली कमाई का बड़ा हिस्सा उस टैक्स से होता है जो तेल को जमीन से निकालते वक्त वसूल किया जाता है.
  • बेसेंट ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप की ऊर्जा को समर्थन करने की नीतियों की वजह से अमेरिका मे तेल और गैस का प्रोडक्शन फिलहाल रिकॉर्ड स्तर पर है.
  • बेसेंट के मुताबिक जो मौजूदा वक्त में तेल की कीमतों में उछाल देखा गया है वह एक छोटी अवधि की रुकावट है, इसके लंबे वक्त में नतीजे दूसरे देश और अमेरिका की अर्थव्यवस्था के लिए बेहतर होंगे.

तेल और गैसोलीन की कीमतों में भारी उछाल

एसोसिएट प्रेस के मुताबिक अमेरिका द्वारा एक महीने की छूट ऐसे वक्त में दी गई है जब ईरान से युद्ध के कारण तेल और गैसोलीन की कीमतों में भारी उछाल देखा गया है.

हॉर्मज स्ट्रेट से रोजाना गुजरता 2 करोड़ बैरल तेल

  • एपी के मुताबिक आम तौर पर हर दिन लगभग 2 करोड़ बैरल तेल स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से गुजरता है, लेकिन हमले के डर से अब ज्यादातर टैंक इस इलाके से गुजरने से बच रहे हैं.
  • हमले के डर से ग्लोबल कच्चे तेल की बेंचमार्क कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है. अमेरिका में गैस की कीमतें, जो कुछ वक्त पहले 2.30 डॉलर प्रति गैलन थीं, अब 50 फीसदी से ज्यादा बढ़कर औसतन 3.60 डॉलर प्रति गैलन हो गई है.
  • एपी के मुताबिक ट्रेजरी डिपार्टमेंट का यह फैसला पिछले हफ्ते भारत रूसी तेल खरीद के लिए दी गई अस्थाई मंजूरी का विस्तार है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक पिछले हफ्ते तक समुद्र में टैंकरों पर लगभग 12.5 करोड़ बैरल रूसी तेल लदा था.

बढ़ सकती है महंगाई

एसोसिएट प्रेस के मुताबिक अमेरिका के एनर्जी सेक्रेटरी क्रिस राइट ने माना है कि अमेरिकन नेवी अभी हॉर्मुज स्ट्रेट से टैंकरों को सुरक्षित निकालने के लिए फिलहाल तैयार नहीं है, क्योंकि सेना का इस वक्त पूरा ध्यान ईरान की आक्रमक क्षमताओं को खत्म करने पर है. वहीं, इन्वेस्टमेंट बैंक गोल्डमैन सैक्स ने चेतावनी दी है तेल की ऊंची कीमतों के कारण अमेरिका में साल के आखिरी तक महंगाई बढ़ सकती है और विकास दर धीमी हो सकती है. इसके साथ ही बेरोजगारी की दर में बढ़ोतरी हो सकती है.

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