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अमेरिका द्वारा भारतीय सामान पर लगाए गए भारी टैरिफ के कारण भारत के एक्सपोर्ट पर बड़ा असर पड़ा है. इसी स्थिति से निपटने और आने वाले महीनों की रणनीति तय करने के लिए सरकार ने मंगलवार को बोर्ड ऑफ ट्रेड यानी BoT की बड़ी बैठक बुलाई है. इस बैठक की अध्यक्षता वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल करेंगे. बैठक में राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, उद्योग से जुड़े बड़े प्रतिनिधियों और एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के लोग शामिल होंगे.
अक्टूबर महीने में भारत के एक्सपोर्ट में 11.8% की गिरावट दर्ज की गई. यह बड़ी गिरावट अमेरिका द्वारा लगाई गई भारी फीस और टैक्स का सीधा असर है. टैरिफ बढ़ने से भारतीय उत्पाद महंगे हो गए हैं और उनकी मांग कम हो रही है. इसी वजह से अक्टूबर में एक्सपोर्ट केवल 34.38 अरब डॉलर रह गए.
इसके साथ ही देश का ट्रेड डिफिसिट यानी व्यापार घाटा भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है. अक्टूबर में ट्रेड डिफिसिट 41.68 अरब डॉलर रहा, जिसमें सोने के भारी इंपोर्ट का बड़ा हाथ है. सोना, चांदी, कपास, खाद और सल्फर के इंपोर्ट में बढ़ोतरी होने से इंपोर्ट तेजी से बढ़ गया.
भारत और अमेरिका के बीच एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय व्यापार समझौते की बातचीत चल रही है. माना जा रहा है कि इसका पहला चरण जल्द ही घोषित किया जा सकता है. इस समझौते में टैरिफ को लेकर भारत की चिंता को प्राथमिकता दी जाएगी. सरकार उम्मीद कर रही है कि समझौते के बाद अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान को पहले की तरह जगह मिल सकेगी.
अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती अनिश्चितताओं को देखते हुए सरकार ने 12 नवंबर को एक बड़ा निर्यात प्रमोशन मिशन भी मंजूर किया है. इसकी कुल लागत 25,060 करोड़ रुपये होगी और यह 2025-26 से शुरू होकर छह साल तक चलेगा.
इस मिशन को दो योजनाओं के जरिए लागू किया जाएगा.
निर्यात प्रोत्साहन: 10,401 करोड़ रुपये.
निर्यात दिशा: 14,659 करोड़ रुपये.
इस मिशन का मकसद एक्सपोर्टर्स को कठिन परिस्थितियों में मदद देना, नए बाजार ढूंढना और अमेरिकी टैरिफ जैसे भारी दबाव का सामना करने में सहायता देना है.
अक्टूबर में भारत से अमेरिका को किया जाने वाला एक्सपोर्ट लगातार दूसरे महीने गिरा है. इस बार गिरावट 8.58% रही और एक्सपोर्ट 6.3 अरब डॉलर तक नीचे आ गया. इसकी मुख्य वजह अमेरिका द्वारा लगाया गया 50% भारी टैरिफ है, जिसने भारतीय सामान को वहां कम प्रतिस्पर्धी बना दिया है.
बोर्ड ऑफ ट्रेड की बैठक सिर्फ एक औपचारिक बैठक नहीं है. यह वह मंच है जहां राज्य सरकारें, उद्योग जगत और केंद्र सरकार एक साथ बैठकर व्यापार नीति पर खुलकर बात कर सकते हैं. इस बैठक में कई सवालों पर चर्चा होगी.
• अमेरिका के भारी टैरिफ से कैसे निपटा जाए.
• किन उत्पादों पर असर सबसे ज्यादा है.
• एक्सपोर्ट बढ़ाने के लिए किन सेक्टरों को प्राथमिकता दी जाए.
• कैश फ्लो सुधारने और खर्च कम करने के उपाय क्या हों.
• एक्सपोर्ट बढ़ाने के लिए राज्यों की भूमिका क्या हो.
अप्रैल से अक्टूबर के बीच भारत के एक्सपोर्ट में सिर्फ 0.63% की हल्की बढ़त दर्ज हुई है. लेकिन इंपोर्ट 6.37% बढ़कर 451.08 अरब डॉलर तक पहुंच गया है. इससे साफ है कि आने वाले महीनों में एक्सपोर्ट बढ़ाने के लिए मजबूत रणनीति बनानी होगी.
भारत ने 2030 तक 2 ट्रिलियन डॉलर के सामान और सेवाओं के एक्सपोर्ट का लक्ष्य रखा है. सरकार चाहती है कि भारतीय उत्पाद दुनिया के ज्यादा से ज्यादा बाजारों में पहुंचे और देश की अर्थव्यवस्था मजबूत बने.
Q1. बोर्ड ऑफ ट्रेड की बैठक क्यों बुलाई गई है.
अमेरिका के भारी टैरिफ से गिरते एक्सपोर्ट पर रणनीति बनाने के लिए.
Q2. अक्टूबर में भारत का एक्सपोर्ट कितना गिरा.
11.8% की भारी गिरावट दर्ज हुई है.
Q3. ट्रेड डिफिसिट रिकॉर्ड क्यों हुआ.
सोना और दूसरी वस्तुओं के इंपोर्ट बढ़ने से.
Q4. अमेरिका के साथ नया व्यापार समझौता कब आएगा.
पहला चरण जल्द घोषित होने की उम्मीद है.
Q5. सरकार का 2030 वाला एक्सपोर्ट लक्ष्य क्या है.
2 ट्रिलियन डॉलर के सामान और सेवाओं का एक्सपोर्ट.