इंजीनियरिंग से लेकर ऑटो पार्ट्स तक, हर तरफ बज रहा भारत का डंका! $72 बिलियन के पार पहुंचा US एक्सपोर्ट, अब बड़ी डील की तैयारी

भारत का विदेशी व्यापार $860 बिलियन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने को तैयार है. जानें अमेरिका के साथ होने वाली महा-डील का मास्टरप्लान और कैसे चीन से आयात के बीच भारतीय निर्यात रच रहा है नया इतिहास.
इंजीनियरिंग से लेकर ऑटो पार्ट्स तक, हर तरफ बज रहा भारत का डंका! $72 बिलियन के पार पहुंचा US एक्सपोर्ट, अब बड़ी डील की तैयारी

अमेरिका भारत का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट मार्केट बना हुआ है, जहां निर्यात $72 बिलियन को पार कर चुका है.

भारत की अर्थव्यवस्था इस समय एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहां से वैश्विक बाजार की नई तस्वीर लिखी जा रही है. हालिया आंकड़े गवाह हैं कि भारत का विदेशी व्यापार अब सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि देश की बढ़ती विनिर्माण शक्ति का प्रमाण है. अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 के बीच भारत का कुल व्यापार (वस्तुएं और सेवाएं) $720.76 बिलियन के आंकड़े को छू चुका है, जो पिछले साल के मुकाबले 6% से अधिक की वृद्धि दर्शाता है.

अगर मौजूदा रफ्तार इसी तरह जारी रहती है, तो इस वित्त वर्ष के समापन तक भारत $860 बिलियन से ज्यादा का कुल व्यापार कर एक नया कीर्तिमान स्थापित करेगा. इसी मजबूत माहौल के बीच भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील को एक 'मास्टरप्लान' के तौर पर देखा जा रहा है.

व्यापार का विशाल कैनवास और निर्यात की नई उड़ान

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भारत की व्यापारिक यात्रा इस समय रिकॉर्ड बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है. अप्रैल-जनवरी FY2025-26 के आंकड़े बताते हैं कि देश ने इस दौरान कुल $720.76 बिलियन का निर्यात किया है. हालांकि, आयात $823.41 बिलियन रहने से व्यापार घाटा $102.65 बिलियन दर्ज किया गया है.

सिर्फ जनवरी 2026 के महीने की बात करें, तो सकारात्मक संकेत और भी गहरे हुए हैं-

  • जनवरी में भारत का कुल निर्यात $80.45 बिलियन रहा.
  • कुल आयात का आंकड़ा $90.83 बिलियन दर्ज किया गया.
  • इस महीने व्यापार घाटा $10.38 बिलियन के स्तर पर रहा.

विशेष रूप से, गैर-पेट्रोलियम निर्यात (Non-petroleum exports) में जनवरी के दौरान 4.89% की बढ़ोतरी देखी गई है. यह इस बात का सबूत है कि भारतीय उत्पाद अब तेल से इतर भी वैश्विक बाजारों में अपनी पैठ बना रहे हैं.

किन सेक्टर्स ने दिखाया सबसे ज्यादा दम?

भारत अब दुनिया को सिर्फ कच्चा माल नहीं, बल्कि तैयार और तकनीकी उत्पाद भेज रहा है. अप्रैल-जनवरी के दौरान बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले मुख्य क्षेत्रों की सूची यहां दी गई है-

  • इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स: इंजीनियरिंग गुड्स और इलेक्ट्रॉनिक सामानों की मांग वैश्विक स्तर पर बढ़ी है.
  • फार्मा और ड्रग्स: दवाइयों के निर्यात में भारत अपनी साख को लगातार मजबूत कर रहा है.
  • खेती और समुद्री उत्पाद: समुद्री उत्पाद, कॉफी और अनाज के निर्यात में मजबूती दिखी है.

ऑटो कंपोनेंट्स का जलवा: यूरोपीय संघ (EU) के बाजार में भारतीय ऑटोमोबाइल और पार्ट्स का निर्यात $2.2 बिलियन तक पहुंच गया है. विशेष रूप से वाहन के पुर्जों (HS 87089900) के निर्यात में 28.1% की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

सोने की चमक और आयात का बदलता गणित

भारत के आयात बिल में सोने की भूमिका हमेशा से चर्चा में रहती है, लेकिन मौजूदा आंकड़ों ने एक अलग कहानी बयान की है. पिछले पांच सालों में सोने के आयात की कीमत तो बढ़ी है, लेकिन इसकी भौतिक मात्रा में गिरावट आई है.

वित्त वर्ष 2019 में $32.91 बिलियन का सोना आया था, जो वित्त वर्ष 2025 में बढ़कर $58.01 बिलियन हो गया. हालांकि, मात्रा 982 टन से घटकर लगभग 757 टन रह गई है.

अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान सोने के आयात बिल में वृद्धि की मुख्य वजह वैश्विक कीमतों में 24.62% का उछाल रहा, जबकि आयात की मात्रा में 18.29% की कमी आई.

भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदार

निर्यात और आयात के मामले में भारत के शीर्ष पार्टनर्स की स्थिति आंकड़ों के जरिए यहां समझें-

शीर्ष निर्यात गंतव्यअमेरिका (USA)$72 बिलियन से अधिक का निर्यात
शीर्ष आयात स्रोतचीन (China)भारत के लिए आयात का सबसे बड़ा केंद्र
अन्य बड़े आयात पार्टनरयूएई और रूसचीन के बाद आयात के मुख्य स्रोत

यूएस-इंडिया ट्रेड डील क्यों है सबसे बड़ा मास्टरप्लान?

अमेरिका भारत का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट मार्केट बना हुआ है, जहां निर्यात $72 बिलियन को पार कर चुका है. प्रस्तावित ट्रेड डील इस रिश्ते को एक रणनीतिक ऊंचाई प्रदान करेगी. इस डील के मुख्य स्तंभों में शामिल हैं-

  • टैरिफ और टैक्स में कमी: इससे भारतीय सामान अमेरिकी बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी होंगे.
  • बाजार तक आसान पहुंच: इंजीनियरिंग, फार्मा और एग्री प्रोडक्ट्स के लिए नए रास्ते खुलेंगे.
  • नियमों में सुगमता: रेगुलेटरी और व्यापार सुविधा सुधारों से व्यापार करना आसान होगा.

भारत का विदेशी व्यापार आज एक ऐतिहासिक मोड़ पर है. $860 बिलियन के अनुमानित लक्ष्य और अमेरिका के साथ होने वाली यह डील भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में सबसे निर्णायक कदम साबित हो सकती है. जहां एक तरफ चीन से आयात का दबाव है, वहीं दूसरी तरफ इंजीनियरिंग, फार्मा और ऑटो सेक्टर में भारत की बढ़ती ताकत यह भरोसा दिलाती है कि 'मेक इन इंडिया' अब 'सेल टू वर्ल्ड' के मंत्र के साथ सफल हो रहा है.

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