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सीबीआईसी ने जीएसटी अधिकारियों को जांच में तेजी लाने और चोरी के मामलों में कारण बताओ नोटिस जारी करने के लिए भी कहा.
GST evasion: केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने क्षेत्रीय कार्यालयों से एक कार्य योजना तैयार करने को कहा है ताकि जीएसटी चोरी (GST evasion) का कोई मामला एक साल से ज्यादा पेंडिंग न हो. पीटीआई की खबर के मुताबिक, सीबीआईसी ने जीएसटी अधिकारियों को जांच में तेजी लाने और चोरी के मामलों में कारण बताओ नोटिस जारी करने के लिए भी कहा है, ताकि फैसला लेने वाले प्राधिकरण के पास आदेश पारित करने के लिए पर्याप्त समय रहे.
अतिरिक्त प्रयास करने और कड़ी निगरानी की जरूरत
खबर के मुताबिक, सीबीआईसी ने कहा कि 2017-18, 2018-19 और 2019-20 के वित्त वर्षों के लिए वार्षिक रिटर्न दाखिल करने की आखिरी तारीख पहले ही समाप्त हो चुकी है. सीबीआईसी ने पाया कि जीएसटी चोरी और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) लाभ में धोखाधड़ी के कुछ मामलों में ही कारण बताओ नोटिस जारी किया गया. बोर्ड ने कहा कि मौजूदा स्थिति में फील्ड अधिकारियों की तरफ से अतिरिक्त प्रयास करने और कड़ी निगरानी की जरूरत है.
वर्ष 2020-21 में जीएसटी चोरी
हाल ही में वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा सत्र के दौरान बताया था कि वर्ष 2020-21 में जीएसटी चोरी के 12,596 मामलों में 49,384 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी की जानकारी सामने आई. वहीं, चालू वित्त वर्ष में जून तक जीएसटी चोरी के 1,580 मामले पकड़ में आए. वर्ष 2019-20 में 40,853.27 करोड़ रुपये के 10,657 जीएसटी चोरी के मामले सामने आए. इनमें 18,464 करोड़ रुपये की वसूली हुई. पिछले वित्त वर्ष में जीएसटी चोरी में चार्टर्ड अकाउंटेंट, वकील जैसे 14 पेशेवर समेत 426 लोगों को गिरफ्तार किया गया था.
पान मसाला कंपनी के यहां जुलाई में पड़े थे छापे
देशभर में टैक्स चोरी के कई मामले हैं. लेकिन कुछ बड़े मामले भी हैं. इसी साल जुलाई महीने में Income Tax Department ने कानपुर और दिल्ली स्थित एक बड़े पान मसाला मेकर ग्रुप पर छापेमारी की थी. पान मसाला मेकर ग्रुप पान मसाला बनाने के साथ-साथ रियल एस्टेट के कारोबार में भी शामिल हैं. कानपुर, नोएडा, गाजियाबाद, दिल्ली और कोलकाता में फैले कुल 31 जगहों की तलाशी ली गई थी. इस छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने कई गड़बड़ी पकड़ी. तलाशी के दौरान कई डिजिटल और कागजी सबूत सामने आए. इन सबूतों से कई चीजों की जानकारी सामने आई. इन कंपनियों को चलाने वाले लोग इनकम टैक्स भी नहीं भर रहे थे. वहीं कुछ लोग इनकम टैक्स दे भी रहे थे तो वो बहुत ही सीमित मात्रा में ऐसा कर रहे थे.