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सिर्फ किसान ही नहीं, बल्कि सूरत और आसपास के व्यापारी भी इस डील से बेहद उत्साहित हैं.
भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुआ व्यापार समझौता सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर अब जमीन पर दिखने लगा है. इस डील ने गुजरात, खासकर दक्षिण गुजरात के किसानों और व्यापारियों के बीच एक नई उम्मीद जगा दी है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह समझौता घरेलू हितों को सुरक्षित रखते हुए किसानों की आमदनी दोगुनी करने के सपने को सच करने की दिशा में एक बड़ा कदम है.
सूरत एपीएमसी (APMC) के डायरेक्टर बाबूभाई शेख के मुताबिक, यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विजन को दिखाता है जिसमें देश के हर वर्ग का विकास शामिल है. इस डील की सबसे बड़ी खूबसूरती यह है कि इसमें भारतीय किसानों के हितों के साथ कोई समझौता नहीं किया गया है.
दक्षिण गुजरात अपनी उपजाऊ जमीन और रसीले फलों के लिए मशहूर है. इस नई ट्रेड डील के बाद यहां के किसानों को सबसे ज्यादा राहत मिलने वाली है.
फलों की लिस्ट: आम, चीकू (Sapota), पपीता और केला जैसे फलों के एक्सपोर्ट पर अब जीरो परसेंट टैरिफ लगेगा.
क्या होगा असर: टैक्स खत्म होने से ये फल अमेरिकी मार्केट में सस्ते होंगे और वहां इनकी डिमांड तेजी से बढ़ेगी. इससे गुजरात के स्थानीय किसानों को अपने फल बेचने के लिए एक बहुत बड़ा और प्रीमियम बाजार मिल जाएगा.
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अक्सर ऐसी बड़ी डील्स में यह डर रहता है कि विदेशी सामान आने से हमारे किसानों का नुकसान न हो जाए. लेकिन इस बार सरकार ने बहुत ही चालाकी और मजबूती से अपना पक्ष रखा है.
डेयरी सेक्टर सुरक्षित: खेती और डेयरी फार्मिंग को इस समझौते के दायरे से बाहर रखा गया है.
आयात पर पाबंदी: नींबू (Citrus Fruits), आलू, मटर, बीन्स और जमी हुई सब्जियों (Frozen Vegetables) के भारत में आने पर सख्त नियम लागू रहेंगे. इसका सीधा मतलब यह है कि हमारी खेती सुरक्षित रहेगी और हमारे किसान बिना किसी विदेशी कंपटीशन के डर के अपना माल अमेरिका भेज सकेंगे.
सिर्फ किसान ही नहीं, बल्कि सूरत और आसपास के व्यापारी भी इस डील से बेहद उत्साहित हैं. व्यापारियों का कहना है कि अब अमेरिका के साथ सीधा व्यापार करना बहुत आसान हो जाएगा. बाबूभाई शेख ने पुरानी यादों को ताजा करते हुए बताया कि जब पहले टैरिफ बढ़े थे, तब व्यापार में लगभग 70 परसेंट की भारी गिरावट आई थी. फल और सब्जियों का आयात-निर्यात लगभग ठप पड़ गया था. लेकिन अब जीरो परसेंट टैरिफ के ऐलान के बाद व्यापार फिर से पटरी पर लौटेगा और किसानों को आगे बढ़ने का हौसला मिलेगा.
मार्केट के जानकारों ने टैरिफ स्ट्रक्चर में हुए बदलावों को भारत के लिए बहुत फायदेमंद बताया है. पहले अमेरिका ने भारतीय सामानों पर 25 परसेंट टैक्स लगाया था, जिसे बाद में बढ़ाकर 50 परसेंट कर दिया गया था. अब इस डील के बाद इसे सीधे घटाकर 18 परसेंट कर दिया गया है. दक्षिण गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड ट्रेड के अध्यक्ष निखिल मद्रासी का कहना है कि भारत की रणनीति बहुत सफल रही है. जब अमेरिका ने टैक्स बढ़ाए थे, तब भारत ने दूसरे देशों में नए बाजार खोज लिए थे. अब टैक्स कम होने के बाद हमें उन नए बाजारों का भी फायदा मिलेगा और अमेरिका का रास्ता भी खुल गया है.
भारत की विदेश नीति अब पहले जैसी नहीं रही कि किसी एक देश पर निर्भर रहा जाए. निखिल मद्रासी के अनुसार, भारत ने यह साफ कर दिया था कि वह व्यापार के मामले में झुकेगा नहीं, लेकिन बातचीत का रास्ता हमेशा खुला रखेगा. आज भारत अमेरिका को 86.5 अरब डॉलर का सामान एक्सपोर्ट करता है, जबकि वहां से आयात सिर्फ 45.3 अरब डॉलर का है. यह संतुलन दिखाता है कि भारत एक मजबूत स्थिति में है और यह डील इसी निरंतर संवाद का नतीजा है.
अगर आप दक्षिण गुजरात के किसान हैं, तो आपके पास अब अपने फलों को ग्लोबल लेवल पर ले जाने का सुनहरा मौका है. जीरो टैक्स का मतलब है ज्यादा मुनाफा. वहीं व्यापारियों के लिए अमेरिका के साथ सीधा बिजनेस करने का रास्ता साफ हो गया है. सबसे बड़ी बात यह है कि घर के बाजार में विदेशी सब्जियों का डर नहीं रहेगा.
इनपुट : IANS