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नियम सब पर समान लागू होंगे, चाहे डिजिटल प्लेटफॉर्म हों या टेलीकॉम कंपनियां. (फोटो: AI generated)
डिजिटल इंडिया के दौर में सरकार अब दो मोर्चों पर एक साथ एक्शन मोड में दिख रही है, एक तरफ सोशल मीडिया ऐप्स के लिए सख्त अनुपालन, और दूसरी तरफ टेलीकॉम स्पेक्ट्रम को राष्ट्रीय संपत्ति मानते हुए कड़ा रुख.
Zee Business को सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, सोशल मीडिया ऐप्स को लेकर जारी निर्देशों में कोई एक्सटेंशन देने का विचार नहीं है. इतना ही नहीं, लॉगआउट नियम में भी किसी तरह की ढील नहीं दी जाएगी.
उधर, टेलीकॉम सेक्टर में स्पेक्ट्रम को लेकर बड़ी तैयारी है- TRAI ने अपनी सिफारिशें जारी कर दी हैं और DoT जल्द आगे की प्रक्रिया शुरू करेगा.
सोशल मीडिया अब सिर्फ संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि डेटा, विज्ञापन और इन्फ्लुएंस की ताकत बन चुका है.
स्पेक्ट्रम सिर्फ तकनीकी संसाधन नहीं, बल्कि रणनीतिक राष्ट्रीय संपत्ति है.
सरकार का संकेत साफ है- “नियम सब पर समान लागू होंगे, चाहे डिजिटल प्लेटफॉर्म हों या टेलीकॉम कंपनियां.”
क्या निर्देशों में एक्सटेंशन मिलेगा?
सूत्रों के मुताबिक- नहीं. सरकार एक्सटेंशन देने के मूड में नहीं है.
लॉगआउट नियम में ढील?
यहां भी स्पष्ट संकेत- कोई राहत नहीं.
इसका मतलब:
सरकार का दावा है कि ये कदम बिना तैयारी नहीं उठाए गए.
लक्ष्य क्या है?
अब बात टेलीकॉम सेक्टर की.
सूत्रों के मुताबिक,
क्या तय होना है?
ये फैसले जल्द लिए जा सकते हैं.
स्पेक्ट्रम:
इसीलिए इसे “राष्ट्रीय संपत्ति” कहा जा रहा है.
एक और बड़ा संकेत- जो कंपनियां IBC (Insolvency and Bankruptcy Code) में गई हैं, उनसे स्पेक्ट्रम वापस लिया जा सकता है.
इसका मतलब:
तो सरकार स्पेक्ट्रम रीक्लेम कर सकती है.
संदेश साफ है- “स्पेक्ट्रम किसी की निजी मिल्कियत नहीं, यह राष्ट्रीय संसाधन है.”
अगर आप:
तो आने वाले समय में:
डिजिटल प्लेटफॉर्म से लेकर टेलीकॉम नेटवर्क तक सरकार का संदेश साफ है: “अनुपालन अनिवार्य है, राष्ट्रीय संसाधन सर्वोपरि है.” आने वाले महीनों में डिजिटल और टेलीकॉम सेक्टर में तेज हलचल दिख सकती है. यह सिर्फ पॉलिसी अपडेट नहीं, बल्कि डिजिटल गवर्नेंस का अगला चरण है.