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SBI Gold policy report: सोने के दाम नई ऊंचाइयों पर पहुंच चुके हैं और अब देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने सुझाव दिया है कि भारत को जल्द से जल्द एक व्यापक “राष्ट्रीय गोल्ड पॉलिसी” (Comprehensive Gold Policy) लानी चाहिए. SBI की Economic Research Department की नई रिपोर्ट (Coming of (A Turbulent) Age: The Great Global Gold Rush) में कहा गया है कि भारत दुनिया के सबसे बड़े सोने के बाजारों में से एक है, जहां सोना न केवल निवेश का माध्यम है बल्कि संस्कृति, सुरक्षा और भावना का भी प्रतीक है. ऐसे में अब समय है कि भारत अपने इस “स्वर्ण संबंध” को नीतिगत रूप से संगठित करे.
रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में सोने की कीमतों में 50% से अधिक की तेजी देखी गई है. अक्टूबर में कुछ दिनों के लिए कीमतें USD 4,000 प्रति औंस से नीचे गई थीं, लेकिन नवंबर में फिर से इसके ऊपर पहुंच गईं.
⦁ भू-राजनीतिक तनाव (Geo-political Tensions)
⦁ वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता (Economic Uncertainty)
⦁ कमजोर होता अमेरिकी डॉलर (Weakening US Dollar)
रिपोर्ट कहती है कि इन परिस्थितियों में सोना एक बार फिर “सेफ हेवन एसेट” बन गया है — यानी बाजार में डर या अस्थिरता के दौर में निवेशक सबसे पहले सोने की ओर भागते हैं.
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SBI की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने 2024 में 802.8 टन सोना खरीदा, जो वैश्विक मांग का 26% है. इससे भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गोल्ड कंज़्यूमर बन गया. पहले नंबर पर चीन है, जिसकी मांग 815.4 टन रही. दिलचस्प बात यह है कि भारत की घरेलू गोल्ड सप्लाई अभी भी बहुत सीमित है. देश की कुल सोने की जरूरतों का करीब 86% हिस्सा आयात (import) के जरिए पूरा होता है. SBI रिपोर्ट के अनुसार, FY25 में भारत में सिर्फ 1,627 किलोग्राम सोना खुदाई के जरिए निकाला गया, जबकि बाकी सारा सोना बाहर से लाया गया.
रिपोर्ट कहती है कि सोना भारतीय परिवारों में संजोया जाता है, निवेशक इससे खुश रहते हैं, सेंट्रल बैंक इसे संचित करते हैं और सटोरिए इस पर दांव लगाते हैं. यह समय है कि भारत एक समर्पित दीर्घकालिक गोल्ड पॉलिसी बनाए जो लोकलाइजेशन और संतुलित निवेश को बढ़ावा दे.
SBI ने कहा कि अब जरूरी है कि भारत यह परिभाषित करे कि “सोना आखिर है क्या - Commodity (वस्तु) या Money (मुद्रा)?” क्योंकि जब तक इसका आर्थिक चरित्र तय नहीं होता, तब तक गोल्ड सेक्टर पर एकीकृत नीति बनाना मुश्किल है.
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रिपोर्ट में चीन का उदाहरण देते हुए कहा गया कि वहां गोल्ड ट्रेडिंग, स्टोरेज, वैल्यूएशन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को लेकर एक समग्र नीति (Comprehensive National Policy) है, जो उनके आर्थिक और भू-राजनीतिक लक्ष्यों के अनुरूप काम करती है. भारत में अब तक गोल्ड नीति की कोशिशें सिर्फ “फिजिकल गोल्ड की खपत घटाने” पर केंद्रित रही हैं. जैसे Sovereign Gold Bond (SGB) और गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम्स, जिनका असर सीमित रहा है.
SBI की रिपोर्ट में कहा गया है कि सोना पूंजी निर्माण (Capital Formation) में प्रत्यक्ष योगदान नहीं देता, क्योंकि यह निष्क्रिय रहता है. अगर सोने का मोनेटाइजेशन किया जाए. यानी इसका उपयोग पेंशन फंड, बॉन्ड या फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स के रूप में हो तो यह भविष्य के निवेशों को सकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है.
रिपोर्ट में यहां तक सुझाव दिया गया है कि भारत को एक “Gold-Backed Pension Scheme” जैसी नई नीति पर भी विचार करना चाहिए, जो वित्तीय सुधारों और पूंजी खाते (Capital Account Convertibility) से जुड़ सके.
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रिपोर्ट ने यह भी बताया कि भले ही SGB स्कीम का उद्देश्य फिजिकल गोल्ड की खरीद घटाना था, लेकिन इससे सरकार पर कर्ज का बोझ (Government Debt) बढ़ गया है. SBI के अनुमान के अनुसार, SGB से जुड़े कैपिटल लॉस का मूल्य ₹93,284 करोड़ तक पहुंच गया है.
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रिपोर्ट के अनुसार, RBI ने 2026 तक अपनी गोल्ड होल्डिंग को बढ़ाकर 15.2% कर लिया है (FY25 में 13.8%, FY24 में 9.1%). पिछले दो वित्त वर्षों में ₹52 बिलियन डॉलर मूल्य का इजाफा हुआ, मुख्यतः वैल्यूएशन गेन से. RBI ने अब गोल्ड रिजर्व के स्टोरेज को लोकलाइज करने पर भी ध्यान बढ़ाया है ताकि वैश्विक नीतिगत जोखिमों से सुरक्षा मिल सके.
रिपोर्ट कहती है कि अगर भारत को 2047 तक $5 ट्रिलियन इकोनॉमी बनना है, तो उसे अपने स्वर्ण भंडार और सोने के प्रवाह को व्यवस्थित नीति के तहत लाना होगा.
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FAQs
1. SBI ने गोल्ड पॉलिसी की जरूरत क्यों बताई है?
क्योंकि भारत सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है और 86% सोना आयात करता है.
2. क्या भारत के पास अभी कोई गोल्ड पॉलिसी है?
नहीं, अभी तक गोल्ड से जुड़ी योजनाएं (SGB, GMS) हैं, लेकिन कोई व्यापक नीति नहीं.
3. चीन की नीति से भारत क्या सीख सकता है?
चीन ने गोल्ड ट्रेड, स्टोरेज और वैल्यूएशन को नीतिगत ढांचे में शामिल किया है.
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4. क्या सोना निवेश के लिए सुरक्षित रहेगा?
रिपोर्ट के मुताबिक, सोना अब भी “Safe Haven” है, लेकिन भारत को इसे औपचारिक निवेश संपत्ति के रूप में देखना चाहिए.
5. गोल्ड पॉलिसी के क्या फायदे होंगे?
आयात पर नियंत्रण, रिजर्व लोकलाइजेशन, वित्तीय स्थिरता और निवेश में विविधता.
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