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2047 तक $30 ट्रिलियन इकोनॉमी के लिए भारत को चाहिए ₹3500 लाख करोड़: SBI चेयरमैन
भारत को विकसित देश बनाने और 2047 तक $30 ट्रिलियन इकोनॉमी बनने के लक्ष्य के लिए आने वाले वर्षों में रिकॉर्ड स्तर के निवेश की जरूरत होगी. इस बीच State Bank of India के चेयरमैन Challa Sreenivasulu Setty ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि भारत को इस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए करीब ₹3,000 से ₹3,500 लाख करोड़ तक के कैपिटल इन्वेस्टमेंट की जरूरत पड़ सकती है.
उन्होंने कहा कि सिर्फ ‘विकसित भारत’ मिशन को आगे बढ़ाने के लिए ही 2035 तक करीब ₹600-650 लाख करोड़ की पूंजी जुटानी होगी. इतनी बड़ी फंडिंग जरूरत सिर्फ बैंकों के भरोसे पूरी नहीं की जा सकती. इसके लिए देश के पूरे फाइनेंशियल सिस्टम को मिलकर काम करना होगा.
SBI चेयरमैन ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है और इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग, एनर्जी, ट्रांसपोर्ट और डिजिटल सेक्टर में बड़े स्तर पर निवेश की जरूरत होगी. लेकिन बैंकों की बैलेंस शीट की भी अपनी सीमाएं होती हैं.
उन्होंने साफ कहा कि आने वाले समय में सिर्फ बैंक लोन के जरिए इतनी बड़ी पूंजी उपलब्ध कराना संभव नहीं होगा. ऐसे में बॉन्ड मार्केट, म्यूचुअल फंड, इंश्योरेंस और पेंशन फंड्स की भूमिका काफी अहम होने वाली है.
CS Setty ने कहा कि भारत में घरेलू बचत का पैटर्न भी तेजी से बदल रहा है. पहले ज्यादातर लोग अपनी बचत बैंक डिपॉजिट में रखते थे, लेकिन अब निवेशकों का रुझान म्यूचुअल फंड, इंश्योरेंस और पेंशन प्रोडक्ट्स की तरफ बढ़ रहा है.
उन्होंने कहा कि यह बदलाव भारतीय फाइनेंशियल सिस्टम के लिए बड़ा संकेत है. इससे लंबी अवधि के निवेश के लिए नया पैसा मार्केट में आ सकता है. यही पूंजी आगे चलकर इंफ्रास्ट्रक्चर और बड़े प्रोजेक्ट्स की फंडिंग में इस्तेमाल हो सकती है.
SBI चेयरमैन ने कहा कि अगर भारत को लंबे समय तक तेज आर्थिक ग्रोथ बनाए रखनी है तो बॉन्ड मार्केट को और गहरा बनाना होगा. उन्होंने कहा कि रियल इकॉनमी की फंडिंग के लिए मजबूत बॉन्ड मार्केट बेहद जरूरी है.
भारत में अभी भी कॉर्पोरेट बॉन्ड मार्केट विकसित देशों के मुकाबले काफी छोटा माना जाता है. बड़ी कंपनियां और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स अगर सीधे बॉन्ड मार्केट से पैसा जुटाते हैं तो बैंकों पर दबाव कम हो सकता है.
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इंश्योरेंस कंपनियों, पेंशन फंड्स और म्यूचुअल फंड्स की ज्यादा भागीदारी जरूरी होगी, क्योंकि ये संस्थाएं लॉन्ग टर्म कैपिटल उपलब्ध करा सकती हैं.
CS Setty ने सरकार के बढ़ते कैपिटल एक्सपेंडिचर यानी कैपेक्स की भी तारीफ की. उन्होंने कहा कि FY15 में सरकार का कैपेक्स करीब ₹2 लाख करोड़ था, जो FY27 के बजट में बढ़कर ₹12.2 लाख करोड़ तक पहुंच गया है.
यानी पिछले कुछ सालों में पब्लिक कैपेक्स में 600% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है. सरकार लगातार रोड, रेलवे, एयरपोर्ट, डिफेंस, एनर्जी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ा रही है.
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उन्होंने कहा कि सरकारी कैपेक्स अभी भी प्राइवेट सेक्टर निवेश के लिए बड़ा कैटलिस्ट बना हुआ है. जब सरकार बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर खर्च बढ़ाती है तो उससे प्राइवेट कंपनियों को भी निवेश बढ़ाने का भरोसा मिलता है.
भारत सरकार ने 2047 तक देश को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य रखा है. इसके लिए तेज आर्थिक ग्रोथ, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, रोजगार सृजन और मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने पर फोकस किया जा रहा है. इसी दिशा में सरकार लगातार कैपेक्स बढ़ा रही है और निजी निवेश को आकर्षित करने की कोशिश कर रही है. हालांकि इतनी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के लिए भारी मात्रा में पूंजी की जरूरत होगी.
SBI चेयरमैन के बयान से यह साफ संकेत मिलता है कि आने वाले समय में भारत का फाइनेंशियल सिस्टम सिर्फ बैंकिंग पर आधारित नहीं रहेगा, बल्कि कैपिटल मार्केट की भूमिका भी तेजी से बढ़ेगी. मार्केट जानकारों के मुताबिक अगर भारत को अगले दो दशकों में दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होना है, तो बैंक, बॉन्ड मार्केट, म्यूचुअल फंड, इंश्योरेंस और पेंशन सेक्टर- सभी को मिलकर काम करना होगा.