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भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता है. (फोटो: AI generated)
मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव और तेल सप्लाई पर मंडराते खतरे के बीच भारत ने वैकल्पिक ऊर्जा सप्लाई के विकल्प तलाशने शुरू कर दिए हैं. इसी बीच करीब 95 लाख बैरल रूसी कच्चा तेल (Russian crude) भारतीय समुद्री क्षेत्र के पास मौजूद बताया जा रहा है, जिसे जरूरत पड़ने पर भारत की रिफाइनरियों तक भेजा जा सकता है.
सरकारी और उद्योग सूत्रों के मुताबिक यह कदम इसलिए उठाया जा रहा है क्योंकि पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष की वजह से होर्मुज स्ट्रेट से तेल सप्लाई बाधित होने का खतरा बढ़ गया है.
रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय महासागर और एशियाई जलक्षेत्र में करीब 9.5 मिलियन बैरल रूसी तेल टैंकरों में मौजूद है, जिसे जरूरत पड़ने पर जल्दी भारत भेजा जा सकता है.
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मिडिल ईस्ट में संघर्ष लंबा खिंचता है तो भारतीय रिफाइनरियां रूसी ग्रेड के तेल की ओर फिर से रुख कर सकती हैं, क्योंकि यह पहले भी भारत की बड़ी जरूरत को पूरा करता रहा है.
भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता होर्मुज स्ट्रेट है.
यही वजह है कि भारत सरकार और तेल कंपनियां वैकल्पिक सप्लाई प्लान तैयार कर रही हैं.
ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े सूत्रों के मुताबिक:
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यूक्रेन युद्ध के बाद रूस ने भारी डिस्काउंट पर तेल बेचकर भारत को बड़ा ग्राहक बना लिया था.
2022 से पहले भारत के तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी 1% से भी कम थी.
लेकिन बाद में रूस भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बन गया.
हाल के महीनों में अमेरिका से टैरिफ के दबाव के कारण भारत ने रूसी तेल की खरीद थोड़ी कम की थी, लेकिन मौजूदा संकट में रूस फिर दोस्ती निभाई है.
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अगर मिडिल ईस्ट से तेल सप्लाई बाधित होती है तो भारत के पास कई विकल्प हैं:
1. रूसी तेल की सप्लाई बढ़ाना
भारतीय जलक्षेत्र के पास मौजूद रूसी तेल कार्गो को तेजी से मंगाया जा सकता है.
2. रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार का इस्तेमाल
भारत जरूरत पड़ने पर अपने SPR से तेल निकाल सकता है.
3. दूसरे देशों से खरीद
अमेरिका, पश्चिम अफ्रीका और वेनेजुएला से अतिरिक्त तेल खरीदा जा सकता है.
4. सऊदी अरब से वैकल्पिक रूट
कुछ सप्लाई रेड सी पाइपलाइन के जरिए होर्मुज को बायपास करके भेजी जा सकती है.
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता है और अपनी जरूरत का करीब 90% कच्चा तेल आयात करता है.
ऐसे में वैश्विक संकट का असर सीधे देश की अर्थव्यवस्था, महंगाई और पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ सकता है.
ऊर्जा विशेषज्ञों के मुताबिक अगर पश्चिम एशिया का तनाव लंबा चलता है तो:
भारत फिलहाल “डाइवर्सिफाइड सोर्सिंग” रणनीति पर काम कर रहा है. सरकारी अधिकारियों का कहना है कि तेल की खरीद राष्ट्रीय हित और बाजार की परिस्थितियों के आधार पर तय की जाती है. यानी जरूरत पड़ने पर भारत रूस, मिडिल ईस्ट, अमेरिका या किसी अन्य स्रोत से तेल खरीद सकता है.