सस्ता होगा घर की छत पर सोलर सिस्टम लगाना, रिन्यूबल एनर्जी पर जीएसटी घटने का मिलेगा फायदा

Cheap Rooftop Solar System: रिन्यूबल एनर्जी पर जीएसटी 12% से घटाकर 5% कर दिया गया है. 3 किलोवाट रूफटॉप सोलर सिस्टम 9,000 से 10,500 रुपये तक सस्ता हो सकता है.
सस्ता होगा घर की छत पर सोलर सिस्टम लगाना, रिन्यूबल एनर्जी पर जीएसटी घटने का मिलेगा फायदा

सरकार ने रिन्यूबल एनर्जी पर जीएसटी 12% से घटाकर 5% कर दिया है. इससे सोलर मॉड्यूल, इन्वर्टर, स्ट्रक्चर और बैलेंस ऑफ सिस्टम पर टैक्स बोझ कम होगा. मिनिस्ट्री ऑफ न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी के अनुसार सिर्फ टैक्स रेट में यह बदलाव उपभोक्ता और डेवलेपर दोनों के लिए तत्काल लागत राहत देता है. खासकर छोटे घरों के लिए 1 से 3 किलोवाट रूफटॉप सोलर अब ज्यादा सुलभ होंगे.

बता दें कि जब से सरकार ने जीएसटी कटौती का ऐलान किया है, अलग-अलग सेक्टर में बूम है. सबसे ज्यादा फायदा FMCG और ऑटो सेक्टर को देखने को मिल रहा है. इसका असर अब रिन्यूबल एनर्जी को लेकर भी देखने को मिल रहा है.

कितना सस्ता हो जाएगा रूफटॉप लगाना?

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3 किलोवाट तक के रूफटॉप सोलर सिस्टम की कीमत में 9,000 से 10,500 रुपये तक की कमी आने का अनुमान है. इससे पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत इंस्टॉलेशन कॉस्ट और नेट पेआउट कम होंगे. छोटे शहरों और कस्बों में जहां बजट सेंसिटिव कंज्यूमर हैं वहां एडॉप्शन स्पीड अप होने की संभावना बढ़ती है.

यूटिलिटी स्केल प्रोजेक्ट की बचत

एक मेगावाट सोलर प्लांट की पूंजीगत लागत आम तौर पर 3.5 से 4 करोड़ रुपये आंकी जाती है. जीएसटी में कटौती से प्रति मेगावाट 20 से 25 लाख रुपये तक की बचत निकल सकती है. 500 मेगावाट के सोलर पार्क स्केल पर यह राहत 100 करोड़ रुपये से भी अधिक बैठती है जिससे लेवलाइज्ड कॉस्ट ऑफ एनर्जी नीचे आएगी.

डिस्कॉम और उपभोक्ता को फायदा

जीएसटी कटौती से एलसीओई घटने की वजह से बिजली खरीद की औसत लागत कम होगी. अनुमान है कि डिस्कॉम्स की वार्षिक खरीद लागत में 2,000 से 3,000 करोड़ रुपये तक की बचत हो सकती है. इसका फायदा अंततः उपभोक्ता टैरिफ पर दबाव कम करके और स्वच्छ बिजली की पहुंच बढ़ाकर दिखाई देगा.

किसानों और कुसुम योजना पर प्रभाव

पीएम कुसुम स्कीम के तहत 5 एचपी सौर पंप जिसकी सामान्य लागत करीब 2.5 लाख रुपये मानी जाती है वह अब लगभग 17,500 रुपये तक सस्ता पड़ सकता है. 10 लाख सोलर पंप के स्केल पर किसान समुदाय को मिलकर करीब 1,750 करोड़ रुपये की बचत हो सकती है. सिंचाई की लागत घटने से कृषि आय और स्थिरता दोनों को सपोर्ट मिलेगा.

मेक इन इंडिया और मैन्युफैक्चरिंग

कम जीएसटी से मॉड्यूल और कंपोनेंट्स की लागत में 3 से 4 फीसदी तक कमी का असर पड़ सकता है. इससे घरेलू उपकरण निर्माताओं की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी. देश का लक्ष्य 2030 तक 100 गीगावाट सोलर मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का है और टैक्स रेशनलाइजेशन नई कैपेसिटी में निवेश को प्रेरित करेगा.

रोजगार और इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम

अनुमान है कि हर 1 गीगावाट मैन्युफैक्चरिंग क्षमता से लगभग 5,000 रोजगार सृजित होते हैं. इस आधार पर अगले दशक में 5 से 7 लाख तक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार बनने की संभावनाएं मजबूत होती हैं. सप्लाई चेन, लॉजिस्टिक्स, ईपीसी और सर्विसिंग में भी मल्टीप्लायर इफेक्ट देखने को मिलेगा.

प्रोजेक्ट पाइपलाइन और फाइनेंसिंग

टैक्स कटौती से प्रोजेक्ट रिटर्न प्रोफाइल सुधरने की वजह से निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा. इससे पावर परचेज एग्रीमेंट्स के साइन होने की रफ्तार तेज हो सकती है और प्रोजेक्ट्स की वित्तीय क्लोजर और कमीशनिंग टाइमलाइन छोटी हो सकती है. परिणामस्वरूप इंस्टॉलेशन रन-रेट और ग्रिड पर स्वच्छ ऊर्जा का हिस्सा तेजी से बढ़ेगा.

FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

Q1. जीएसटी दर में क्या बदलाव हुआ है?

A1. नवीकरणीय ऊर्जा उपकरणों पर जीएसटी 12% से घटाकर 5% कर दिया गया है..

Q2. 3 किलोवाट रूफटॉप सोलर कितने का सस्ता होगा?

A2. लगभग 9,000 से 10,500 रुपये तक की कमी का अनुमान है..

Q3. बड़े सोलर प्रोजेक्ट्स पर कितना असर पड़ेगा?

A3. प्रति मेगावाट 20 से 25 लाख रुपये तक कैपेक्स घट सकता है और 500 मेगावाट पार्क पर 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की बचत बनती है..

Q4. डिस्कॉम्स को सालाना कितनी बचत हो सकती है?

A4. बिजली खरीद लागत में अनुमानित 2,000 से 3,000 करोड़ रुपये तक की वार्षिक बचत संभव है..

Q5. किसानों को कुसुम योजना में क्या सीधा लाभ मिलेगा?

A5. 5 एचपी सौर पंप लगभग 17,500 रुपये सस्ता पड़ेगा और 10 लाख पंप के पैमाने पर करीब 1,750 करोड़ रुपये की सामूहिक बचत होगी.

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