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Representative Image (Source: Pexels)
खराब सड़कों के चलते होने वाले रोड एक्सीडेंट्स पर सख्ती दिखाते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने बड़ा फैसला लिया है. प्राधिकरण ने नया फैसला लिया है कि वो रोड इंजीनियरिंग के कामों में खामी के चलते खराब सड़क पर होने वाली किसी भी घातक या गंभीर दुर्घटनाओं के लिए अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराएगा. NHAI ने एक सर्कुलर में कहा कि प्राधिकरण ने प्रोविजनल सर्टिफिकेट जारी करने की प्रक्रिया में शामिल NHAI के प्रतिनिधियों की ओर से ड्यूटी को नजरअंदाज करने की प्रवृत्ति के प्रति गंभीरता से विचार किया है, जिसके कारण यात्रियों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है.
सर्कुलर में कहा गया है, ''यह ध्यान में आया है कि रोड मार्किंग, रोड साइनेज, क्रैश बैरियर के अंतिम उपचार जैसे सुरक्षा कार्यों को पंच लिस्ट में रखकर प्रोविजनल कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी किए जा रहे हैं, जिससे न सिर्फ यूजर्स की सुरक्षा से समझौता होता है, बल्कि दुर्घटना / मौत होने पर NHAI का नाम भी खराब होता है.''
दरअसल, पेंडिंग कामों को एक कैटेगरी के तहत रखा जाता है, जिसे पंच लिस्ट कहा जाता है. प्राधिकरण ने कहा कि पंच लिस्ट में वही काम शामिल करने चाहिए, जो सड़क सुरक्षा से जुड़े हुए नहीं हैं और इस लिस्ट के कामों को 30 दिनों के भीतर पूरा करना चाहिए.
NHAI ने कहा, ''यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि प्रोविजनल कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी करने से पहले सड़क सुरक्षा से संबंधित सभी काम पूरे हैं. घटिया सड़क इंजीनियरिंग कार्यों के चलते हुई किसी भी घातक सड़क दुर्घटना के लिए क्षेत्रीय अधिकारी परियोजना निदेशक/स्वतंत्र अभियंता जिम्मेदार होंगे.''
अगर भारत में रोड एक्सीडेंट्स के आंकड़ों पर नजर डालें तो नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के आंकड़े हैरान करने वाली तस्वीर खींचते हैं. पिछले साल यानी 2021 में पूरे भारत में 1.55 लाख लोगों की रोड एक्सीडेंट में मौत हुई थी. इसके हिसाब से अगर औसतन देखें तो एक दिन में 426 और हर घंटे 18 लोगों ने सड़क दुर्घटना में जान गंवाई. यह आंकड़े अब तक के सबसे ज्यादा हैं.