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वित्त वर्ष 26 की जुलाई-सितंबर अवधि में अर्थव्यवस्था की विकास दर 8.2 प्रतिशत रहने के कारण आरबीआई दिसंबर की अपनी मौद्रिक नीति में रेपो रेट को 5.5 प्रतिशत पर बरकरार रख सकता है. यह जानकारी एसबीआई रिसर्च की ओर से रविवार को दी गई. एसबीआई रिसर्च ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि कुछ दिनों पहले दिसंबर की मौद्रिक नीति में 0.25 प्रतिशत की कटौती की संभावना जताई गई थी, लेकिन सितंबर तिमाही में जीडीपी के मजबूत आंकड़े आने के कारण अब इसकी संभावना कम हो गई है.
रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की ओर से ब्याज दरों पर स्थिर रुख बनाया जा रहा है. हालांकि, ब्याज दरों में कटौती फैसले अभी भी लिए जा रहे हैं, लेकिन इनकी संख्या पहले के मुकाबले काफी कम हो गई है.
बाजार की धारणा को बदलना भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकारी बॉन्ड बाजार तेजी से अव्यवस्थित हो रहा है. ओवरनाइट रेपो दर और 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड के बीच का अंतर 40-50 बीपीएस से बढ़कर 100-110 बीपीएस हो गया है.
न्यूट्रल रीजम जरूरी
भारतीय अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 26 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर अवधि) में 8.2 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर हासिल की है, जो कि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की विकास दर 5.6 प्रतिशत से काफी अधिक है. सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया कि रियल जीडीपी वृद्धि दर के आठ प्रतिशत से ऊपर निकलने की वजह द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्र का मजबूत प्रदर्शन था.
सवाल: दिसंबर की बैठक में रेपो रेट क्या रहने की उम्मीद है?
जवाब: एसबीआई रिसर्च के अनुसार, आरबीआई रेपो रेट को 5.5% पर बरकरार रख सकता है.
सवाल: ब्याज दरों में कटौती की संभावना क्यों कम हो गई है?
जवाब: सितंबर तिमाही में देश की जीडीपी विकास दर 8.2% रही है, इन मजबूत आंकड़ों के कारण कटौती की संभावना कम है.
सवाल: आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की बैठक कब है?
जवाब: यह बैठक 3 से 5 दिसंबर के बीच आयोजित होगी.
सवाल: वित्त वर्ष 26 की दूसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ कितनी रही?
जवाब: जुलाई-सितंबर अवधि में भारतीय अर्थव्यवस्था ने 8.2% की मजबूत वृद्धि दर्ज की है.
सवाल: पहले रेपो रेट को लेकर क्या अनुमान था?
जवाब: जीडीपी के आंकड़े आने से पहले बाजार को 0.25% की कटौती की उम्मीद थी.