West Asia संकट पर भारत का 'एक्शन प्लान'! राजनाथ सिंह की बड़ी बैठक, क्या महंगी होगी रसोई गैस और खाद?

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार एक्शन मोड में है. रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की अगुवाई में हुई बैठक में LPG, क्रूड और फर्टिलाइजर की सप्लाई को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है. वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी अर्थव्यवस्था पर इसके असर को लेकर अहम जानकारी दी है.
West Asia संकट पर भारत का 'एक्शन प्लान'! राजनाथ सिंह की बड़ी बैठक, क्या महंगी होगी रसोई गैस और खाद?

West Asia संकट पर भारत का 'एक्शन प्लान' (ANI)

पूरी दुनिया की नजरें इस वक्त पश्चिम एशिया (West Asia) पर टिकी हैं. वहां छिड़ा तनाव न सिर्फ दो देशों के बीच की जंग है, बल्कि इससे पूरी दुनिया की सप्लाई चेन हिलने का खतरा पैदा हो गया है. भारत के लिए यह मामला और भी गंभीर है क्योंकि हमारी एनर्जी और खेती की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर आता है.

इसी संकट को देखते हुए भारत सरकार ने अपनी कमर कस ली है. आज शाम 5 बजे दिल्ली के कर्तव्य भवन में एक बेहद अहम बैठक हुई. इस बैठक की कमान खुद रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के हाथों में थी. सरकार का सीधा मकसद है कि सरहद पर चाहे जो भी हो, भारत के आम आदमी की रसोई और किसान के खेत पर इसका बुरा असर नहीं पड़ना चाहिए. चलिए जानते हैं कि इस हाई-लेवल मीटिंग में क्या-क्या बड़े फैसले लिए गए.

रक्षामंत्री की अगुवाई में IMG की दूसरी बैठक

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पश्चिम एशिया के हालातों पर नजर रखने के लिए बनाए गए इंटर-मिनिस्टीरियल ग्रुप (IMG) की यह दूसरी बड़ी बैठक थी. इससे ठीक एक दिन पहले प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में CCS (कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी) ने भी हालातों की समीक्षा की थी और कई सुझाव दिए थे.

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बैठक के मुख्य बिंदु कुछ इस तरह रहे-

सप्लाई पर फोकस: LPG और फर्टिलाइजर की सप्लाई में कोई रुकावट न आए, इसके लिए फुलप्रूफ प्लान तैयार किया गया है.

होर्डिंग पर लगाम: संकट का फायदा उठाकर कोई कालाबाजारी या जमाखोरी न करे, इसके लिए सख्त निर्देश दिए गए हैं.

रोजाना मॉनिटरिंग: वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बताया कि इंटर-मिनिस्टीरियल ग्रुप अब रोजाना सुबह 10 बजे मिलता है ताकि पल-पल की खबर रहे.

भारत ने खुद को झटके से बचाया

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने साफ कहा कि पश्चिम एशिया के हालातों का असर पूरी दुनिया के साथ भारत पर भी है, लेकिन भारत ने बेहतरीन तरीके से खुद को इस आर्थिक झटके (Shock) से बचाया है. जेनेवा में WTO की बैठक से लौटे मंत्री ने बताया कि वहां भी सभी देशों का जोर इस बात पर रहा कि युद्ध की स्थिति को आम सहमति से खत्म किया जाए.

उन्होंने कुछ खास सेक्टर्स के बारे में बताया जो इस संकट से प्रभावित हो सकते हैं-

एक्सपोर्ट पर असर: फूड एंड एग्रीकल्चर, इंजीनियरिंग गुड्स, जेम्स एंड ज्वैलरी.

इंपोर्ट पर दबाव: एनर्जी, पेट्रोलियम, केमिकल और फार्मा सेक्टर.

पेट्रोलियम मंत्रालय का भरोसा

पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने देश को भरोसा दिलाया कि घबराने की कोई बात नहीं है. सरकार के पास पर्याप्त स्टॉक है और सप्लाई चैन को लेकर लगातार काम किया जा रहा है. सुजाता शर्मा ने यह भी बताया कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने नियमों का पालन न करने वाले 600 LPG डिस्ट्रीब्यूटर को नोटिस भी जारी किया है.

नए ट्रेड एग्रीमेंट पर बड़ा अपडेट

एक तरफ जहां सरकार युद्ध के संकट को संभाल रही है, वहीं दूसरी तरफ नए व्यापारिक रिश्तों को भी फास्ट्रैक (Fast track) पर लाया जा रहा है. वाणिज्य सचिव ने बताया कि कई देशों के साथ चर्चा सकारात्मक रही है:

चिली (Chile): FTA (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट) पर चर्चा को तेज करने की बात हुई है.

साउथ अफ्रीका: प्रेफरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट पर बहुत पॉजिटिव रिस्पॉन्स मिला है.

अंगोला (Angola): मतभेदों को खत्म कर बातचीत को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी है.

अमेरिका (USA): पीयूष गोयल ने कहा कि अमेरिका के साथ हमारे रिश्ते सही दिशा में हैं और होने वाली डील किसी भी अन्य देश से बेहतर होगी.

आम आदमी और मैन्युफैक्चरिंग को राहत

सरकार का पूरा जोर इस बात पर है कि घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित रहे. एडिशनल सेक्रेटरी लव अग्रवाल ने संकेत दिया कि अगर जरूरत पड़ी तो सरकार ड्यूटी में कटौती (Duty cuts) कर सकती है और एक्सपोर्ट को रेगुलेट कर सकती है.

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को राहत देने के लिए कुछ अहम कदम उठाए गए हैं-

कस्टम ड्यूटी में छूट: कच्चा माल महंगा न हो, इसके लिए कई अहम कदम उठाए जा रहे हैं.

शिपिंग कॉस्ट: बढ़ते भाड़े को लेकर मंत्रालयों के बीच चर्चा जारी है ताकि लागत को काबू में रखा जा सके.

सस्टेनेबल प्रैक्टिस: भारत सालों से सस्टेनेबल तरीके अपनाता आ रहा है, जिसका फायदा अब मिल रहा है.

Conclusion

कुल मिलाकर सरकार का रुख एकदम साफ है. पीएम मोदी के नेतृत्व में सभी मुख्य मुद्दों पर समय रहते फैसले लिए जा रहे हैं. चाहे वो पश्चिम एशिया का संकट हो या WTO में भारत का पक्ष रखना, हर जगह प्राथमिकता देश के छोटे आर्टिसन, मछुआरों और आम उपभोक्ताओं को दी जा रही है. LPG और क्रूड की लगातार सप्लाई यह सुनिश्चित कर रही है कि भारत की रफ्तार धीमी न पड़े. सरकार हर उस कदम के लिए तैयार है जिससे बाजार में स्थिरता बनी रहे और आम आदमी की जेब पर बोझ न बढ़े.

FAQs

Q- रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई मीटिंग का मुख्य उद्देश्य क्या था?

A- इस बैठक का मुख्य उद्देश्य पश्चिम एशिया संकट के बीच देश में LPG, फर्टिलाइजर और कच्चे तेल की निर्बाध सप्लाई सुनिश्चित करना और किसी भी तरह की कालाबाजारी को रोकना था.

Q- क्या देश में गैस और ईंधन की कमी होने वाली है?

A- नहीं, पेट्रोलियम मंत्रालय ने साफ किया है कि LPG, LNG और क्रूड की सप्लाई चैन अच्छी है और डिस्ट्रीब्यूटर्स के पास पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है.

Q- पेट्रोल और डीजल की अंडर रिकवरी का क्या मतलब है?

A- वर्तमान में पेट्रोल पर 24 रुपये और डीजल पर 104 रुपये प्रति किलो लीटर की अंडर रिकवरी है. इसका मतलब है कि लागत के मुकाबले बिक्री मूल्य में यह अंतर बना हुआ है.

Q- पश्चिम एशिया संकट से भारत के कौन से सेक्टर प्रभावित हो सकते हैं?

A- इस संकट का असर मुख्य रूप से इंजीनियरिंग गुड्स, जेम्स एंड ज्वैलरी, केमिकल, फार्मा और एग्रीकल्चर एक्सपोर्ट पर पड़ सकता है.

Q- सरकार घरेलू बाजार में सामान की उपलब्धता के लिए क्या कदम उठा सकती है?

A- सरकार जरूरत पड़ने पर इंपोर्ट ड्यूटी (Duty cuts) में कटौती कर सकती है और घरेलू मांग को पूरा करने के लिए एक्सपोर्ट पर नियंत्रण (Regulate exports) लगा सकती है.

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