रास लाफान में हमले से 17% घटा कतर का LNG प्रोडक्शन, मरम्मत में लग सकते हैं 3-5 साल, भारत में गहरा सकता है संकट

ईरान ने कतर के रास लाफान इंडस्ट्रियल एरिया पर मिसाइल अटैक किया है. इस हमले ने ग्लोबल एनर्जी सप्लाई को बुरी तरह से प्रभावित किया है. इस वैश्विक संकट का सबसे ज्यादा असर जिन देशों पर पड़ने वाला है उनमें एक भारत भी है.
रास लाफान में हमले से 17% घटा कतर का LNG प्रोडक्शन, मरम्मत में लग सकते हैं 3-5 साल, भारत में गहरा सकता है संकट

ईरान ने कतर के रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी पर मिसाइल अटैक किया था. 18 मार्च 19 मार्च की शुरुआत में हुए इन विनाशकारी हमलों ने ग्लोबल एनर्जी सप्लाई को बुरी तरह प्रभावित किया है. कतर एनर्जी ने आधिकारिक बयान के मुताबिक, इन हमलों के सीधे प्रभाव से कतर की LNG निर्यात क्षमता में अचानक 17 फीसदी की भारी गिरावट आई है. इसके चलते देश को सालाना 20 बिलियन यूएस डॉलर का भारी-भरकम रेवेन्यू का नुकसान हो रहा है. वहीं, इस वैश्विक संकट का असर सबसे ज्यादा भारत पर भी पड़ने का खतरा मंडरा रहा है, जो अपनी बढ़ती ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है.

भू-राजनीतिक तनाव से खतरे मे ऊर्जा सुरक्षा

कतर के गैस उत्पादन में इतनी बड़ी सेंध लगे का सीधा मतलब है कि भू-राजनीतिक तनाव के दौर में भारत की ऊर्जा सुरक्षा खतरे में है. घरेलू मोर्चे पर भारत पहले ही गैस की किल्लत से जूझ रहा है.

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27.8 MMT LNG का किया गया आयात

  • पेट्रोलियम योजना और विश्लेषण सेल (PACC) और वाणिज्य मंत्रालय के आधिकारिक आकड़ों के मुताबिक, भारत अपने कुल LNG आयात का लगभग आधा हिस्सा कतर से खरीदता है.
  • साल 2024 में भारत ने कुल 27.8 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) LNG का आयात किया था. इसमें से अकेले कतर ने 11.30 MMT गैस की सप्लाई की थी. इसकी कीमत 6.40 बिलियन अमेरिकी डॉलर थी.
  • भारत के कुल LNG आयात का यह लगभग 47 फीसदी हिस्सा है. साल 2025-26 के आधिकारिक आंकड़ों ने पुष्टि की है कि कतर भारत का पहला गैस सप्लाई वाला देश बना हुआ है.
  • कतर से सप्लाई में रुकावट होने के कारण भारत के घरेलू मार्केट में गैस की उपलब्धता में कमी आ सकती है और कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल सकता है.
  • बढ़ते हुए भू राजनीतिक तनाव के बीच, अपने सबसे बड़े सप्लायर से सप्लाई में कमी आना भारत के ऊर्जा एक्सपोर्ट को बेहद संवेदनशील बना रहा है.

17% कम हो गई क्षमता

कतर के ऊर्जा मामलों के राज्यमंत्री और कतर एनर्जी के अध्यक्ष और सीईओ, साद शेरिदा अल-काबी ने कहा, "मिसाइल हमलों से कतर की LNG निर्यात क्षमता 17 फीसदी कम हो गई है. इससे सालाना 20 बिलियन अमेरिकी डॉलर के रेवेन्यू का नुकसान होने का अनुमान है."

3 से 5 साल तक का लग सकता है वक्त

  • मंत्री अल काबी के मुताबिक प्रोडक्शन सुविधाओं को हुए इस भारी नुकसान की मरम्मत करने में 3 से 5 साल तक का वक्त लग सकता है.
  • लंबी अवधि और प्रोडक्शन क्षमता घटने के कारण, कंपनी को अपने कुछ लंबे वक्त के लिए LNG कॉन्ट्रैक्ट पर 5 साल तक के लिए फोर्स मैज्योर (अप्रत्याक्षित परिस्थित) घोषित करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा.
  • रुकावट का सीधा असर भारत के साथ-साथ चीन, दक्षिण कोरिया, इटली और बेल्जियम पर भी पड़ेगा.

17% एक्सपोर्ट जितना पहुंचा नुकसान

कतर के आधिकारिक बयान के मुताबिक, हमले में दो प्रमुख LNG प्रोडक्शन सुविधाओं को नुकसान पहुंचा है, जो कतर के कुल एक्सपोर्ट का 17 फीसदी है.

12.8 मिलियन टन प्रति वर्ष प्रोडक्शन क्षमता

  • ट्रेन 4 और ट्रेन 6 दोनों की कुल प्रोडक्शन क्षमता 12.8 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) है.
  • ट्रेन 4 कतर एनर्जी (6 फीसदी) और एक्सॉनमोबिल (34%) का संयुक्त उद्यम है, जबिक ट्रेन 6 कतरएनर्जी (70%) और एक्सॉनमोबिल (30%) का साझा प्लांट है.
  • शेल द्वारा संचालित पर्ल GTL प्लांट को भी निशाना बनाया गया है. यह प्लांट LNG को क्लीनर ईंधन और प्रीमियम इंजन ऑयल बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले बेस ऑयल में बदलता है.
  • अल काबी के मुताबिक पर्ल जीटीए की दो में से एक ट्रेन को नुकसान पहुंचाया है, जिसका आकलन किया जा रहा है. इसके कम से कम एक साल तक बंद रहने का आंशका है.

(ANI इनपुट्स के साथ)

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