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नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री (MNRE) प्रल्हाद जोशी ने मंगलवार को कहा कि राज्यों के साथ 40 गीगावाट रिन्यूएबल एनर्जी कैपेसिटी के लिए बिजली खरीद समझौते (PPA) पर हस्ताक्षर करने के लिए बातचीत चल रही है. जोशी ने यहां राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान में सोलर पीवी मॉड्यूल परीक्षण सुविधा के उद्घाटन के मौके पर संवाददाताओं से कहा, ‘‘हम 2030 तक 500 गीगावाट के लक्ष्य को पूरा करने के लिए सालाना 50 गीगावाट रिन्यूएबल एनर्जी कैपेसिटी का लक्ष्य बना रहे हैं. कुल लक्ष्य में 292 गीगावाट सौर ऊर्जा क्षमता शामिल है.’’
देश में 2024-25 में 29.52 गीगावाट (एक गीगावाट बराबर 1,000 मेगावाट) रिन्यूएबल एनर्जी कैपेसिटी जोड़ी गयी. नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री ने कहा कि 2032 तक बिजली की अधिकतम मांग वर्तमान स्तर से दोगुनी हो जाएगी. बिजली की अधिकतम मांग बीते वर्ष मई में 250 गीगावाट के सर्वकालिक उच्चस्तर पर पहुंच गई थी. विद्युत मंत्रालय ने इन गर्मियों में बिजली की अधिकतम मांग 270 गीगावाट तक जाने का अनुमान लगाया है.
जोशी ने कहा कि भारत को उपलब्ध भूमि संसाधनों से सौर ऊर्जा उत्पादन को अधिकतम करने के लिए अनूठे उपाय करने की जरूरत है. मंत्री ने ऊंची इमारतों में उपलब्ध सीमित स्थान से सौर ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए कांच जैसी निर्माण सामग्री का उपयोग करने के लिए अभिनव समाधानों का उपयोग करने का भी आह्वान किया.
उन्होंने कहा कि 40 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए बिजली खरीद समझौते पर हस्ताक्षर करने को लेकर राज्यों के साथ बातचीत चल रही है. जोशी ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत 12 लाख घरों की छत पर सौर ऊर्जा प्रणाली स्थापित की गयी है.