दिवाली से ठीक पहले मोदी सरकार ने आम आदमी से लेकर किसान तक के हित में कई बड़े फैसले लिए. बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में 4 अहम प्रस्तावों को मंजूरी दे दी गई. इनमें किसान, दिल्ली की अवैध कालोनी, बीएसएनएल-एमटीएनएल और पेट्रोल-डीजल की रिटेल बिक्री से जुड़े फैसले हैं.
1/6दिल्ली में कुल 1,797 unauthorized colonies हैं. यहां रहने वाले लोग अपने मकान-दुकानों की रजिस्ट्री नहीं करा सकते हैं. बैंक भी यहां की प्रॉपर्टी पर लोन नहीं देते हैं. सरकार ने इन कालोनियों को नियमित करने का फैसला किया है. सरकार के इस फैसले का 40 लाख लोगों को फायदा मिलेगा. संसद के अगले सत्र में इस बारे में एक प्रस्ताव पेश किया जाएगा.
2/6पेट्रोल-डीजल की रिटेल बिक्री का हक अभी तक IOC, भारत पेट्रोलियम, HPCL समेत 7 कंपनियां के हाथ में है. सरकार ने पेट्रोल ट्रांसपोर्ट मार्केटिंग गाइडलाइंस में बदलाव किया है. अभी तक 2000 करोड़ रुपये के टर्नओवर वाली कंपनी ही पेट्रोल पंप की रिटेल बिक्री का लाइसेंस ले सकती थी, जिस घटाकर अब 250 करोड़ रुपये कर दिया गया है.
3/6भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) और महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड (MTNL) के 15000 करोड़ रुपये के रिवाइवल प्लान को मंजूरी दी गई है. इसके लिए 15,000 करोड़ रुपये का सॉवरेन बांड बनाया जाएगा. BSNL और MTNL का मर्जर होने में कुछ समय लगेगा.
4/6सरकार गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1840 रुपये से बढ़कर 1925 रुपये/क्विंटल कर दिया है. बाजरे का MSP 1440 रुपये से बढ़ाकर 1525 रुपये/क्विंटल, मसूर 4800 रुपये और सरसों की सरकारी खरीद कीमत 4425 रुपये/क्विंटल कर दी गई है. रबी फसलों के समर्थन मूल्य बढ़ाने के फैसले से सरकार पर 3000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा.
5/68 सालों से पेंडिंग पड़े भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के कैडर रिव्यू को मंजूरी दी गई है. आईटीबीपी में लगभग 90 हजार सैनिक हैं. कैडर रिव्यू से नए पद तैयार होंगे और यह आईटीबीपी के कर्मियों की कैपेसिटी और कार्य को बेहतर बनाने में मदद करेगा. भारत-तिब्बत सीमा पुलिस 3,488 किलोमीटर भारत-चीन सीमा की रक्षा के लिए एक अहम फोर्स है.
6/6भारत तथा सेंट विन्सेंट और ग्रेनेडाइंस के बीच चिकित्सा की पारंपरिक प्रणालियों में सहयोग पर समझौता ज्ञापन को मंजूरी दी गई. इससे चिकित्सा की पारंपरिक प्रणालियों में सहयोगपूर्ण अनुसंधान करने वाले चिकित्सकों और वैज्ञानिकों के प्रशिक्षण के लिए विशेषज्ञों के आदान-प्रदान से औषधि विकास और पारंपरिक चिकित्सा के पेशे में नए नवाचारों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.