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भारत इस समय एक असाधारण ऊर्जा संकट (Energy Crisis) का सामना कर रहा है. मध्य पूर्व (Middle East) में चल रहे युद्ध ने वैश्विक सप्लाई चेन को तोड़ दिया है, जिसका असर आपकी रसोई से लेकर शहर के बड़े रेस्टोरेंट्स तक पहुंच गया है. सरकार ने स्थिति को देखते हुए गैस राशनिंग का ऐतिहासिक फैसला लिया है.
इस बीच सरकार भी तेजी से इस समस्या से निपटने की कोशिश में लगी है. आइए जानते हैं क्या-क्या कदम उठाए जा रहे हैं और पेट्रोलिम मंत्रालय की तरफ से इस ऊर्जा संकट पर क्या बयान आया है.
पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा है कि पहले हम क्राइसिस में थे, लेकिन अब उसके बाहर निकल गए हैं. मंत्रालय के अनुसार LPG को लेकर स्थिति बेहतर हुई है.
उत्पादन बढ़ा, निर्भरता घटी: LPG उत्पादन करीब 10% बढ़ा है. यह भी कहा है कि Strait of Hormuz पर निर्भरता कम हुई है.
कई देशों से बात: कई अन्य देशों से LNG,LPG के लिए बात भी चल रही है. बयान के अनुसार उन देशों के कंसाइनमेंट आना शुरू भी हो गए हैं.
रेस्तरां और होटल से बातचीत: इस संकट से रेस्तरां और होटल को हुई परेशानी के बाद अब उनसे OMCs की कमेटी बातचीत करेगी.
जारी रहेगी कटौती: सरकार ने साफ किया है कि होटल, रेस्तरां को जो सप्लाई में कमी थी, उनके 6 महीने के औसत के आधार पर है. अभी यह कटौती जारी रहेगी. OMCs की कमेटी उनसे बात करेगा, जिसके हिसाब से अगर जरूरी हुआ तो स्टॉक को डायवर्ट किया जाएगा.
महाराष्ट्र के फूड एंड सिविल सप्लाई मिनिस्टर छगन भुजबल ने कहा- 'होटल इंडस्ट्री मेरे पास आई थी, उनका मुझसे कहना था कि एलपीजी की सप्लाई का 25% आप कम कर दीजिए. इससे ज़्यादा नहीं.. वरना होटल इंडस्ट्री को बहुत नुकसान होगा. मैंने इस संदर्भ में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से बात की है, लेकिन केंद्र सरकार का जो आदेश आया है उसके मुताबिक पेट्रोल कंपनियों को साफ आदेश है कि फिलहाल LPG गैस की होम सप्लाई पर ही ध्यान केंद्रित किया जाए. मुख्यमंत्री महोदय 2-4 दिन में फिर से मीटिंग बुलाने वाले हैं.'
कैबिनेट में आज ईरान-यूएस और इजराइल युद्ध के इंपैक्ट को लेकर चर्चा हुई. पेट्रोल्यूम मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और वित्त मंत्रालय ने अपनी कंडीशन के बारे में बताया. इसके साथ ही पेट्रोलियम मंत्रालय ने बताया कि कैसे पेट्रोल और एलपीजी के लिए किए पुराने करार का फायदा मिल रहा है.
LPG Cylinder पर पेट्रोलियम मंत्रालय के सूत्रों ने गैस की किल्लत ना होने की बात कही है.
पर्याप्त स्टॉक: मंत्रालय के अनुसार देश में हर डिपो पर पर्याप्त स्टॉक है. रिफिल के लिए औसत 2.5 दिन का समय अभी भी बरकरार है. आज भी पहले की तरह रोजाना 60 लाख सिलिंडर सप्लाई हो रहे हैं.
शॉर्टेज कर रहे मैनेज: सरकार ने कहा है कि शॉर्टेज को मैनेज करने की कोशिश जारी है. युद्ध अभी बंद नहीं हुआ है, सरकार की प्राथमिकता घरेलू उपभोक्ता हैं.
कच्चे तेल पर सरकारी सूत्रों ने कहा है कि पहले हम क्राइसिस में थे, अब बाहर आ रहे हैं.
70% सप्लाई दूसरे रास्तों से: हॉर्मूज से सप्लाई को अन्य जगहों से मैनेज किया जा रहा है. 70% सप्लाई अब अन्य रास्तों के जरिए हो रही है.
रूस से तेल खरीद: 22 फरवरी से अब तक रूस से तेल खरीद जारी है. यह खरीद टेंडर के जरिए होती है.
एक्सपोर्ट जारी रहेगा: सभी रिफाइनरी 100% क्षमता से काम कर रही हैं. सप्लाई पर्याप्त है, इसलिए अभी एक्सपोर्ट रोकने का कोई इरादा नहीं है.
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने अनिवार्य वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत एक अधिसूचना जारी की है. इसका सीधा मतलब है कि अब गैस की सप्लाई 'जरूरत और प्राथमिकता' के आधार पर होगी. प्राथमिकता वाले क्षेत्र (जिन्हें 100% सप्लाई मिलेगी):
घरेलू PNG और CNG: आम जनता के घरों की रसोई और पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर असर न पड़े, इसलिए इन्हें पूरी सप्लाई मिलेगी.
LPG उत्पादन: देश में गैस सिलेंडर की कमी न हो, इसके लिए उत्पादन इकाइयों को प्राथमिकता दी गई है.
अस्पताल और शिक्षण संस्थान: इन्हें 'अनिवार्य गैर-घरेलू' श्रेणी में रखा गया है.
उर्वरक (Fertilizer) संयंत्र: इन्हें केवल 70% आपूर्ति मिलेगी.
पावर प्लांट और रिफाइनरी: गैर-प्राथमिकता वाले इन क्षेत्रों से गैस हटाकर जरूरी क्षेत्रों में भेजी जाएगी.
पेट्रोकेमिकल प्लांट: यहां भी गैस की कटौती की जाएगी.
इस राशनिंग का सबसे तीखा प्रहार 'फूड इंडस्ट्री' पर हुआ है. इंडियन ऑयल (IOCL) ने स्पष्ट किया है कि गैर-घरेलू सेक्टर (होटल/रेस्टोरेंट) की मांगों की समीक्षा ओएमसी (OMC) के कार्यकारी निदेशकों की एक कमेटी करेगी. बेंगलुरु और मुंबई की स्थिति भी जान लें.
बेंगलुरु: होटल्स एसोसिएशन ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि गैस न होने की वजह से 10 मार्च को पूरे शहर के होटल बंद रहेंगे.
मुंबई: आर्थिक राजधानी मुंबई में लगभग 20% रेस्टोरेंट आज गैस की किल्लत के कारण बंद हो गए हैं. जो खुले हैं, वे स्टॉक में बची गैस के भरोसे चल रहे हैं.
देश की राजधानी और उसके आसपास के इलाकों (Noida, Gurgaon) में स्थिति और भी चिंताजनक है. सप्लाई में कमी का फायदा बिचौलिए उठा रहे हैं.
आधिकारिक रेट: कमर्शियल सिलेंडर का सरकारी दाम लगभग ₹1883 है.
कालाबाजारी: सूत्रों के अनुसार, कल तक जो सिलेंडर ₹2300 में मिल रहा था, आज उसकी कीमत कई जगहों पर ₹3000 तक पहुंच गई है.
इंडस्ट्री का दर्द: नोएडा NRAI के चैप्टर हेड वरुण खेरा ने बताया कि गैस 'ब्लैक' में भी नहीं मिल रही है. होटल मालिकों का कहना है कि अगर दो दिन और सप्लाई नहीं सुधरी, तो पूरा कामकाज ठप हो जाएगा.
गैस की किल्लत ने रेस्टोरेंट मालिकों को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया है. देसी वाइब्स (Desi Vibes) के को-फाउंडर वरुण खेरा ने बताया कि ऑल्टरनेट फ्यूल (जैसे बिजली या कोयला) पर तुरंत शिफ्ट होना मुमकिन नहीं है.
मेन्यू में कटौती: कई रेस्टोरेंट अपने मेन्यू से उन डिशेज को हटा रहे हैं जिन्हें बनाने में ज्यादा गैस लगती है.
दामों में बढ़ोतरी: इनपुट कॉस्ट बढ़ने और गैस की कालाबाजारी के कारण आने वाले दिनों में बाहर खाना 10-15% महंगा हो सकता है.
मांग: एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि सप्लाई कम कर दें, लेकिन पूरी तरह बंद न करें.
भारत के लिए यह समय 'एनर्जी सिक्योरिटी' (Energy Security) की अग्निपरीक्षा जैसा है. जहाँ एक तरफ सरकार को आम जनता की रसोई और अस्पतालों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी है, वहीं दूसरी तरफ लाखों लोगों को रोजगार देने वाली होटल इंडस्ट्री को भी डूबने से बचाना है. पेट्रोलियम मंत्रालय के सूत्रों से मिली 'राहत की खबर' यदि हकीकत में बदलती है, तो अगले 15 दिनों में स्थिति सामान्य हो सकती है. तब तक, उपभोक्ताओं को सतर्क रहने और फिजूलखर्ची से बचने की जरूरत है.
1- क्या घरेलू (Domestic) सिलेंडर की सप्लाई बंद होगी?
नहीं, सरकार ने घरेलू उपयोग (PNG/LPG) को 100% प्राथमिकता दी है. घरेलू सप्लाई में कोई कटौती नहीं की जाएगी.
2- दिल्ली-NCR में कमर्शियल सिलेंडर का रेट अचानक क्यों बढ़ा?
सप्लाई चेन टूटने और मांग बढ़ने के कारण कालाबाजारी शुरू हो गई है, जिससे आधिकारिक रेट ₹1883 के मुकाबले सिलेंडर ₹3000 तक पहुंच गया है.
3- गैस राशनिंग कितने समय तक लागू रहेगी?
यह आदेश 9 मार्च 2026 से प्रभावी है और अगले आदेश तक या अंतरराष्ट्रीय स्थिति सामान्य होने तक जारी रहेगा.
4- रेस्टोरेंट मालिकों को गैस कैसे मिलेगी?
उन्हें तेल कंपनियों (OMCs) की विशेष कमेटी को ईमेल करना होगा, जो मेरिट और जरूरत के आधार पर आवंटन तय करेगी.
5- क्या आने वाले समय में खाने के दाम बढ़ेंगे?
हां, गैस की कमी और बढ़ती लागत के कारण रेस्टोरेंट्स अपने मेन्यू के दाम बढ़ाने और कुछ डिशेज कम करने पर विचार कर रहे हैं.
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