देश में हाल ही के महीनों में नेचुरल गैस ट्रांसमिशन पाइपलाइन्स और सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क (CGD) में पाइपलाइन के फटने के कारण कई गंभीर घटनाएं सामने आई है. इन घटनाओं के कारण कई प्रमुख CGD नेटवर्क और दूसरे गैस उपभोक्ताओं की गैस सप्लाई में एक बड़ी रुकावट आई है. मामले की गंभीरता को देखते हुए पेट्रोलियम और नेचुरल गैस रेगुलेटरी बोर्ड (PNGRB) ने नेचुरल गैस की सुरक्षित सप्लाई को बनाए रखने के लिए कई सख्त कदम उठाने का फैसला किया है.
सुरक्षा ढांचे के लिए गंभीर खतरा
PNGRB के मुताबिक, पाइपलाइन फटने की घटनाएं गैस सप्लाई सुरक्षा ढांचे के लिए एक गंभीर खतरा पैदा कर रही है. इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए PNGRB ने एक खास इंडस्ट्री लेवल कमेटी का गठन किया है.
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डीटेल से जांच करेगी कमेटी
- कमेटी हाल ही में हुई पाइपलाइन फटने और एक्सपोजर वाली घटनाओं के मूल कारणों की डीटेल से जांच करेगी.
- भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूर शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म इंजीनियरिंग और तकनीकी उपाय सुझाने होंगे.
- मुख्य पाइपलाइन नेटवर्क में रुकावट की स्थिति में नेचुरल गैस और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की सप्लाई सुरक्षा और निरंतरता को मजबूत करन के लिए ठोस रणनीतियां प्रस्तावित करना है.
ऐसे हुआ गैस कंपनियों का चुनाव
PGNRB के मेंबर्स की अध्यक्षता में प्रमुख सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों के टॉप अधिकारियों के साथ स्ट्रक्चर्ड मीटिंग्स का दौर शुरू किया गया है.
तीन मानदंडों में से एक पूरा
- इन मीटिंग्स में उन कंपनियों को चुना गया है जो तीन मानदंडों में से कोई एक पूरा करती है.
- पहला मानदंड है 10,000 से ज्यादा PNG कनेक्शन, 50 से ज्यादा CNG स्टेशन या 10 MMSCM प्रति माह से ज्यादा गैस खपत.
- इन मानदंडों के आधार पर 41 भौगोलिक क्षेत्रों (GA) को कवर करने वाली 20 कंपनियों की पहचान की गई है.
- मीटिंग में सप्लाई सुरक्षा की स्थिति, जोखिम कम करने की पहल और किसी भी रुकावट के दौरान 100 फीसदी उपभोक्ताओं तक गैस सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए लॉन्ग टर्म प्लान की गहराई से समीक्षा की गई.
रणनीतिक कदम उठाने के दिए निर्देश
PNGRB ने CGD संस्थाओं को सप्लाई सुरक्षा के लिए कई रणनीतिक कदम उठाने के सख्त निर्देश दिए हैं. आपात स्थिति के लिए हर नेटवर्क में एक से ज्यादा स्वतंत्र सप्लाई के सोर्स होने चाहिए.
- इमरजेंसी हालत में सभी उपभोक्ताओं को कवर करन के लिए CNG कैस्केड, LNG/LCNG स्टेशन या मोबाइल डॉटर बूस्टर यूनिट्स के जरिए वैकल्पिक गैस सप्लाई करनी चाहिए.
- आपातकालीन परिस्थिति में आस-पास के भौगोलिक क्षेत्रों के CGD नेटवर्क के साथ इंटरकनेक्शन स्थापित किया जाना चाहिए.
- प्राथमिक कैटेगरी के कंज्यूमर्स के लिए एक श्रेणीबद्ध सप्लाई योजना और जोखिमों की पहचान करने वाली एक व्यापक भौगोलिक क्षेत्रवार सप्लाई सुरक्षा योजना तैयार की जानी चाहिए.
- इन सभी उपायों को रेगुलेटरी फ्रेमवर्क देने के लिए PNGRB ने 5 अप्रैल 2026 तक सभी हितधारकों से सुझाव और टिप्पणियां मांगी है.
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