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मिडिल ईस्ट के युद्ध की आग अब भारत के रेस्टोरेंट्स की रसोइयों तक पहुंच गई है. गैस सप्लाई में बाधा और बढ़ती कीमतों के बीच, नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) ने अपने सदस्यों के लिए एक 'आपातकालीन गाइडलाइन' जारी की है.
इसका उद्देश्य कम से कम गैस में काम चलाना और इस संकट के दौर में रेस्टोरेंट्स को पूरी तरह बंद होने से बचाना है. आइए, समझते हैं कि अब आपके पसंदीदा रेस्टोरेंट में क्या बदलाव आने वाले हैं और NRAI ने क्या सुझाव दिए हैं.
NRAI ने सुझाव दिया है कि रेस्टोरेंट्स को तुरंत अपने मेन्यू की समीक्षा करनी चाहिए.
कम कुकिंग टाइम: ऐसे खानों को प्राथमिकता दें जो कम समय में पकते हैं.
डीप फ्राई पर रोक: लंबे समय तक पकने वाले या बहुत ज्यादा डीप फ्राई होने वाले आइटम्स को कुछ समय के लिए मेन्यू से हटाया जा सकता है.
तैयारी का तरीका: दाल, चावल और अनाज को पहले से भिगोकर रखें, ताकि उन्हें पकाने में कम गैस खर्च हो. प्रेशर कुकर का अधिकतम इस्तेमाल करें.
चूंकि LPG की उपलब्धता अनिश्चित है, इसलिए NRAI ने बिजली से चलने वाले उपकरणों को 'प्लान-B' के तौर पर अपनाने को कहा है:
उपकरण: इंडक्शन कुकिंग, इलेक्ट्रिक ग्रिल, कॉम्बी ओवन, इलेक्ट्रिक राइस कुकर और स्टीमर्स का इस्तेमाल बढ़ाएं.
फायदा: इससे LPG पर निर्भरता कम होगी और सप्लाई पूरी तरह रुकने पर भी किचन चालू रह सकेगा.
गैस की एक-एक बूंद बचाने के लिए NRAI ने किचन स्टाफ को खास निर्देश दिए हैं:
पायलट फ्लेम: उपयोग न होने पर बर्नर की पायलट फ्लेम को बंद रखें.
बैच कुकिंग: एक-एक ऑर्डर पकाने के बजाय 'बैच कुकिंग' (एक साथ ज्यादा मात्रा में पकाना) को बढ़ावा दें.
बर्नर का सही चुनाव: बर्तन के साइज के हिसाब से ही बर्नर का उपयोग करें. ढक्कन लगाकर खाना पकाएं, ताकि भाप से खाना जल्दी पके.
मेंटेनेंस: बर्नर और पाइपलाइन की रोज जांच करें, ताकि लीकेज की रत्ती भर भी संभावना न रहे.
इस मुश्किल समय में NRAI ने 'साझा संसाधनों' (Resource Sharing) की बात कही है:
ग्रेवी और सॉस: पास के आउटलेट्स एक-दूसरे के साथ तैयार ग्रेवी या सॉस साझा कर सकते हैं, ताकि हर जगह अलग से गैस न जले.
बल्क खरीदारी: स्थानीय चैप्टर मिलकर LPG की उपलब्धता पर नजर रखेंगे और जरूरत पड़ने पर एक-दूसरे की मदद करेंगे.
NRAI ने साफ किया है कि अगर मेन्यू में कोई बदलाव होता है या कुछ डिशेज उपलब्ध नहीं हैं, तो ग्राहकों को इसके बारे में पहले ही स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए. इससे ग्राहकों का भरोसा बना रहेगा.
NRAI का कहना है कि यह सेक्टर लाखों लोगों को रोजगार देता है- चाहे वो शेफ हों, वेटर हों या सप्लायर.
Essential Sector: एसोसिएशन सरकार से संपर्क में है, ताकि रेस्टोरेंट इंडस्ट्री को 'आवश्यक क्षेत्र' (Essential Sector) की मान्यता मिले.
सप्लाई गारंटी: मांग की गई है कि अस्पतालों और स्कूलों की तरह रेस्टोरेंट्स के लिए भी कमर्शियल LPG की एक 'इमरजेंसी सप्लाई' सुनिश्चित की जाए.
गैस का यह संकट केवल ईंधन की कमी नहीं है, बल्कि यह लाखों घरों की रोजी-रोटी का सवाल है. NRAI की यह एडवाइजरी बताती है कि आने वाले दिन चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं. यदि रेस्टोरेंट मालिक 'अनुशासन' और 'वैकल्पिक ऊर्जा' के सुझावों को अपनाते हैं, तो इस संकट के दौर में भी वे अपनी सेवाओं को जारी रख पाएंगे.
1- क्या रेस्टोरेंट में खाना अब महंगा होगा?
गैस की कमी और इलेक्ट्रिक विकल्पों की लागत के कारण कुछ रेस्टोरेंट अपने दामों में मामूली बढ़ोतरी कर सकते हैं.
2- क्या मेन्यू से मेरी पसंदीदा डिश गायब हो जाएगी?
हो सकता है कि बहुत ज्यादा गैस खपत वाली डिशेज कुछ समय के लिए 'आउट ऑफ स्टॉक' रहें.
3- क्या इंडक्शन पर बना खाना गैस वाले खाने जैसा ही स्वादिष्ट होता है?
आधुनिक तकनीक (जैसे कॉम्बी ओवन) से स्वाद में बहुत बदलाव नहीं आता, लेकिन कुकिंग का तरीका जरूर बदल जाता है.
4- NRAI की मुख्य चिंता क्या है?
मुख्य चिंता सप्लाई पूरी तरह ठप होने पर होने वाली छंटनी (Layoffs) और बिजनेस बंद होने को लेकर है.
5- क्या मैं अभी भी रेस्टोरेंट में टेबल बुक कर सकता हूं?
हां, लेकिन जाने से पहले चेक कर लें क्योंकि कई रेस्टोरेंट्स ने ऑफ-पीक समय में अपना समय सीमित कर दिया है.
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