नई सरकार घटा सकती है कर संग्रह लक्ष्य, फिलहाल 13.80 लाख करोड़ वसूली की थी तैयारी

लोकसभा चुनाव के बाद केंद्र में बनने वाली नई सरकार पूर्ण बजट में चालू वित्त वर्ष के लिए निर्धारित 13.80 लाख करोड़ रुपये के प्रत्यक्ष कर संग्रह लक्ष्य में कटौती कर सकती है. यह संकेत सूत्रों ने दिया है.
नई सरकार घटा सकती है कर संग्रह लक्ष्य, फिलहाल 13.80 लाख करोड़ वसूली की थी तैयारी

नई केेंद्र सरकार कर सकती है प्रत्यक्ष करों के लिए निर्धारित लक्ष्य में कमी (फाइल फोटो)

लोकसभा चुनाव के बाद केंद्र में बनने वाली नई सरकार पूर्ण बजट में चालू वित्त वर्ष के लिए निर्धारित 13.80 लाख करोड़ रुपये के प्रत्यक्ष कर संग्रह लक्ष्य में कटौती कर सकती है. यह संकेत सूत्रों ने दिया है.

लक्ष्य में की जा सकती है कटौती
सूत्रों ने बताया, "राजस्व विभाग बजट में 13.80 लाख करोड़ रुपये के वर्तमान प्रत्यक्ष कर संग्रह लक्ष्य में कटौती करने की दिशा में कोशिश कर सकता है, क्योंकि 21 फीसदी की वृद्धि (वास्तविक संशोधित 11.4 लाख करोड़ रुपये प्रत्यक्ष कर संग्रह लक्ष्य के मुकाबले) हासिल करना कठिन है. मौजूदा लक्ष्य को पूरा करना कठिन है. पिछले वित्त वर्ष में 12 लाख करोड़ रुपये का लक्ष्य पूरा नहीं हो सका था. इसलिए कटौती के परिमाण पर विचार किया जा सकता है."

13.80 लाख करोड़ रुपये का रखा गया लक्ष्य
फरवरी में पेश किए गए अंतरिम बजट में चालू वित्त वर्ष में प्रत्यक्ष करों से 13.80 लाख करोड़ रुपये संग्रह करने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह लक्ष्य 12 लाख करोड़ रुपये था. प्रत्यक्ष करों में कॉरपोरेट कर और व्यक्तिगत आयकर शामिल है.

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राजस्व सचिव ने कही ये बात
सूत्र ने बताया कि राजस्व लक्ष्य राजस्व विभाग द्वारा आर्थिक मामलों के विभाग के बजट संभाग के परामर्श से तय किया जाता है. अंतरिम बजट के दौरान राजस्व सचिव ए. बी. पांडेय ने कहा था कि 13.80 लाख करोड़ रुपये लक्ष्य चालू वित्त वर्ष के लिए उचित है.

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औद्योगिक उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई
देश में औद्योगिक उत्पादन में भारी गिरावट दर्ज हुई है. फरवरी महीने में औद्योगिक उत्पादन दर 1.4 फीसदी से गिरकर 0.1 प्रतिशत पर आ गई. पिछले 20 महीने में यह सबसे कम है. एक तरफ जहां उत्पादन में कमी आई है वहीं महंगाई बढ़ी है. देश में महंगाई दर 2.57 प्रतिशत से बढ़कर 2.86 प्रतिशत पर पहुंच गई है. सोमवार को शेयर बाजार खुलने पर इन आंकड़ों का असर बाजार पर देखा जा सकता है. बाजार के जानकारों के अनुसार इन कमजोर आंकड़ों के आने से शेयर बाजार में गिरावट की आशंका बनी हुई है. यदि बाजार में गिरावट आती है तो म्युचूअल फंड्स के रिटर्न पर भी इसका असर देखा जाएगा. औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) का किसी भी देश की अर्थव्यवस्था में काफी महत्व होता है. इससे पता चलता है कि उस देश की अर्थव्यवस्था में औद्योगिक वृद्धि किस गति से हो रही है.

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