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क्रेडिट रेटिंग एजेंसी Moody’s Ratings ने भारत की लॉन्ग-टर्म लोकल और फॉरेन करेंसी इशूअर रेटिंग को Baa3 पर बरकरार रखा है. साथ ही, आउटलुक (Outlook) को स्थिर (Stable) बनाए रखा गया है. एजेंसी ने यह भी साफ किया है कि भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था, बड़ी जनसंख्या और घरेलू मांग उसे वैश्विक चुनौतियों से लड़ने की ताकत देती है.
Baa3 इन्वेस्टमेंट ग्रेड रेटिंग की सबसे निचली कैटेगरी है. इसका सीधा अर्थ है कि भारत की अर्थव्यवस्था निवेश योग्य है और निवेशकों के लिए सुरक्षित मानी जाती है. हालांकि, रेटिंग में सुधार तभी संभव है जब सरकार राजस्व बढ़ाने और कर्ज का बोझ घटाने में और ज्यादा सफल होगी.
मूडीज़ का मानना है कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसका तेजी से बढ़ता घरेलू बाजार और जनसांख्यिकी लाभ है. बड़ी आबादी और लगातार बढ़ती खपत भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूती देती है. रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत की जीडीपी ग्रोथ 6.5% रही, जो कि 9.2% से कम है, लेकिन इसके बावजूद भारत अभी भी G20 देशों में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना हुआ है.
मूडीज़ ने अनुमान लगाया है कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की ग्रोथ दर (GDP) 6.5% बनी रहेगी. सरकार का कैपिटल एक्सपेंडिचर बढ़ाने का फोकस, महंगाई में कमी और ब्याज दरों में नरमी आने वाले समय में खपत और निवेश को मजबूत करेंगे. यानी आने वाले 2-3 साल भारत की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूती दिखाएगी.
रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका ने भारत से आने वाले कुछ सामान पर 50% तक ऊंचे टैरिफ लगाए हैं, जबकि एशिया-पैसिफिक के अन्य देशों पर यह दर 15-20% है. इससे भारत के मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट सेक्टर पर दबाव आ सकता है. हालांकि, मूडीज़ को उम्मीद है कि आने वाले समय में बातचीत के जरिए इन टैरिफ को कम किया जाएगा.
भारत की सबसे बड़ी मजबूती उसकी घरेलू मांग (Domestic Demand) है. रिपोर्ट बताती है कि भारत का घरेलू उपभोग (Consumption) इतना मजबूत है कि वह वैश्विक झटकों को झेल सकता है. यही वजह है कि भारत की अर्थव्यवस्था पर बाहरी संकट का ज्यादा असर नहीं पड़ता.
भारत सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में फिस्कल डेफिसिट 4.4% जीडीपी पर रखा है. सरकार का लक्ष्य इसे घटाकर 4.5% पर लाने का है, जो महामारी के बाद से लगातार फोकस में है. हालांकि, मूडीज़ का कहना है कि सरकार का कर्ज (Debt) और ब्याज भुगतान अभी भी ज्यादा है, जिसकी वजह से राजकोषीय मजबूती (Fiscal Strength) कमजोर बनी हुई है.
सरकार ने हाल ही में इनकम टैक्स स्लैब बढ़ाकर कई मध्यमवर्गीय परिवारों को टैक्स फ्री किया है, साथ ही सितंबर 2025 में GST दरों का सरलीकरण किया गया. इससे आम लोगों की खपत बढ़ेगी, लेकिन सरकार के पास टैक्स से मिलने वाला राजस्व कम हो सकता है. इसका सीधा असर कर्ज चुकाने की क्षमता (Debt Affordability) पर पड़ेगा.
मूडीज़ ने कहा कि भारत की क्रेडिट प्रोफाइल मजबूत है, लेकिन कमजोरियां भी हैं. सरकार का कर्ज बहुत ज्यादा है और ब्याज भुगतान का बोझ अन्य देशों की तुलना में अधिक है. यही कारण है कि भारत की रेटिंग फिलहाल Baa3 पर अटकी हुई है और इसमें जल्दी अपग्रेड की संभावना कम है.
भारत अभी भी दुनिया की सबसे भरोसेमंद उभरती अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का डिफॉल्ट रिस्क बहुत कम है क्योंकि 1983 के बाद से भारत ने कभी अपने कर्ज पर डिफॉल्ट नहीं किया. यह बात अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए भरोसा पैदा करती है.
Moody’s ने भारत की रेटिंग क्या रखी है?
Baa3 और स्थिर आउटलुक रखा गया है.
Baa3 रेटिंग का मतलब क्या है?
यह निवेश योग्य रेटिंग है, जो निवेशकों के लिए सुरक्षित मानी जाती है.
भारत की सबसे बड़ी ताकत क्या मानी गई है?
बड़ी जनसंख्या, मजबूत घरेलू मांग और निरंतर GDP ग्रोथ.
भारत की कमजोरियां क्या हैं?
उच्च कर्ज, ब्याज भुगतान का बोझ और राजस्व कम होना.
Moody’s की रिपोर्ट का निवेशकों के लिए मतलब क्या है?
भारत निवेश के लिए भरोसेमंद है, लेकिन कर्ज और राजस्व सुधार पर नजर रखना जरूरी है.