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रेयर अर्थ मैग्नेट के लिए मोदी सरकार खोलेगी अपना खजाना
चीन पर निर्भरता कम करने और हाई-टेक इंडस्ट्री को मजबूती देने की दिशा में भारत सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है. भारी उद्योग और इस्पात मंत्री (Union Minister for Heavy Industries and Steel) एच. डी. कुमारस्वामी ने बताया कि सरकार देश में रेयर अर्थ मैग्नेट (Rare Earth Magnets) के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए 1,345 करोड़ रुपये की सब्सिडी स्कीम लाने की तैयारी कर रही है. ये स्कीम फिलहाल मंत्रालयों के बीच चर्चा में है और जल्द ही इसे लागू किया जा सकता है.
क्या है रेयर अर्थ मैग्नेट और क्यों जरूरी हैं?
रेयर अर्थ मैग्नेट वो खास तरह के चुंबक होते हैं जो इलेक्ट्रिक व्हीकल, विंड टरबाइन, MRI मशीन, मोबाइल फोन, कंप्यूटर और दूसरी हाई-टेक मशीनों में इस्तेमाल होते हैं. फिलहाल दुनिया में इनका सबसे बड़ा उत्पादक देश चीन है. लेकिन हाल ही में चीन ने इनकी सप्लाई पर सख्ती शुरू कर दी है, जिससे दुनियाभर में सप्लाई चेन को लेकर चिंता बढ़ी है.
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भारत में अगर इन मैग्नेट्स का प्रोडक्शन शुरू होता है, तो इससे देश को न सिर्फ आत्मनिर्भरता मिलेगी बल्कि इलेक्ट्रिक व्हीकल और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर को भी मजबूती मिलेगी.
किन कंपनियों को मिलेगा फायदा?
भारी उद्योग मंत्रालय के सेक्रेटरी कमरान रिज़वी ने बताया कि इस स्कीम के तहत सरकारी और प्राइवेट दोनों तरह की कंपनियों को मौका मिलेगा. फिलहाल दो मैन्युफैक्चरर्स को सपोर्ट देने की योजना है, लेकिन स्कीम फाइनल होने के बाद कंपनियों की संख्या बढ़ भी सकती है.
इस स्कीम में महिंद्रा एंड महिंद्रा और Uno Minda जैसी बड़ी कंपनियों ने रुचि दिखाई है. महिंद्रा, जो देश की बड़ी इलेक्ट्रिक गाड़ी बनाने वाली कंपनी है, मंत्रालय से बातचीत कर रही है. वो या तो मौजूदा प्रोड्यूसर के साथ साझेदारी करना चाहती है या फिर लंबे समय के लिए डोमेस्टिक सप्लायर से डील करना चाहती है. Uno Minda, जो मारुति सुजुकी जैसी कंपनियों को ऑटो पार्ट्स सप्लाई करती है, वो भी इस स्कीम में हिस्सा लेने पर विचार कर रही है.
सरकार का मकसद क्या है?
सरकार इस स्कीम के जरिए भारत में रेयर अर्थ ऑक्साइड से लेकर तैयार मैग्नेट तक की पूरी प्रोसेसिंग को देश में ही करना चाहती है. यानी कच्चे माल से लेकर फाइनल प्रोडक्ट तक सब कुछ देश के अंदर बने, ताकि विदेशों पर निर्भरता कम हो और सप्लाई चेन सुरक्षित रहे. ये स्कीम खास तौर पर EV, रिन्यूएबल एनर्जी, मेडिकल डिवाइसेज और इंडस्ट्रियल मशीनरी जैसी इंडस्ट्री को फायदा पहुंचाएगी, जो अब तेजी से बढ़ रही हैं.