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Petrol-Diesel Price: भारतीय ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के लिए आने वाला समय चुनौतीपूर्ण हो सकता है. मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और एलपीजी (LPG) की किल्लत के चलते बने निगेटिव सेंटिमेंट्स के कारण तेल कंपनियों को अब पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी करना काफी मुश्किल नजर आ रहा है. कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की रिपोर्ट के मुताबिक, कच्चे तेल की बढ़ती इम्पोर्ट कॉस्ट का बोझ अब तेल कंपनियों को खुद उठाना पड़ सकता है
रिपोर्ट के अनुसार, मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) के बंद होने के चलते FY27 में कच्चे तेल की कीमतों पर जोखिम बढ़ गया है. ऐसे में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को महंगे इम्पोर्ट, बढ़े हुए फ्रेट कॉस्ट और इंश्योरेंस प्रीमियम को खुद ही उठाना पड़ सकता है.
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रिपोर्ट में कहा गया है कि इस संकट के बाद तेल कंपनियों को एलपीजी स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए नए सिरे से कैपेक्स करने की जरूरत होगी ताकि भविष्य में ऐसी किल्लत से बचा जा सके. फिलहाल, युद्ध के कारण ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ती तल्ख ने ग्लोबर एनर्जी मार्केट को अनिश्चितता के दौर में धकेल दिया है.
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मिडिल ईस्ट में जारी तनाव ने हालात और बिगाड़ दिए हैं. ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष के बीच एनर्जी इंफ्रा पर हमले तेज हो गए हैं. खासतौर पर कतर में गैस इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों से ग्लोबल सप्लाई प्रभावित हुई है. कतर के LNG प्लांट के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचा है, जिससे उसके करीब 17% निर्यात पर असर पड़ा है. यह भारत के लिए चिंता की बात है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक कतर पर निर्भर है.
इस हमले ने भारत की चिंताएं बढ़ा दी हैं, क्योंकि भारत अपनी एनर्जी जरूरतों के लिए कतर पर बहुत अधिक निर्भर है. अपने सबसे बड़े आपूर्तिकर्ताओं में से एक से आपूर्ति में कमी आने का असर घरेलू बाजार में उपलब्धता और कीमतों, दोनों पर पड़ सकता है.
(ANI इनपुट के साथ)
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