महंगा क्रूड, लेकिन फिलहाल राहत! पेट्रोल-डीजल कीमतों पर क्यों लगा ब्रेक

Petrol-Diesel Price: रिपोर्ट के अनुसार, मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) के बंद होने के चलते FY27 में कच्चे तेल की कीमतों पर जोखिम बढ़ गया है. ऐसे में तेल कंपनियों को महंगे इम्पोर्ट, बढ़े हुए फ्रेट कॉस्ट और इंश्योरेंस प्रीमियम को खुद ही उठाना पड़ सकता है.
महंगा क्रूड, लेकिन फिलहाल राहत! पेट्रोल-डीजल कीमतों पर क्यों लगा ब्रेक

(File Image)

Petrol-Diesel Price: भारतीय ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के लिए आने वाला समय चुनौतीपूर्ण हो सकता है. मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और एलपीजी (LPG) की किल्लत के चलते बने निगेटिव सेंटिमेंट्स के कारण तेल कंपनियों को अब पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी करना काफी मुश्किल नजर आ रहा है. कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की रिपोर्ट के मुताबिक, कच्चे तेल की बढ़ती इम्पोर्ट कॉस्ट का बोझ अब तेल कंपनियों को खुद उठाना पड़ सकता है

कीमतें बढ़ाना क्यों है मुश्किल?

रिपोर्ट के अनुसार, मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) के बंद होने के चलते FY27 में कच्चे तेल की कीमतों पर जोखिम बढ़ गया है. ऐसे में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को महंगे इम्पोर्ट, बढ़े हुए फ्रेट कॉस्ट और इंश्योरेंस प्रीमियम को खुद ही उठाना पड़ सकता है.

Add Zee Business as a Preferred Source

कमाई पर असर

  • रिपोर्ट में कहा गया है कि LPG की कमी के चलते जनता में निगेटिव सेटिमेंट बना हुआ है.
  • इससे पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी करना कंपनियों के लिए मुश्किल हो गया है.
  • पिछले कुछ वर्षों में कंपनियों को बेहतर मार्केटिंग मार्जिन का फायदा मिला था, लेकिन अब कमजोर अर्निंग कंपनी पर दबाव बना सकती है.

LPG स्टोरेज बढ़ाने पर निवेश की जरूरत

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस संकट के बाद तेल कंपनियों को एलपीजी स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए नए सिरे से कैपेक्स करने की जरूरत होगी ताकि भविष्य में ऐसी किल्लत से बचा जा सके. फिलहाल, युद्ध के कारण ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ती तल्ख ने ग्लोबर एनर्जी मार्केट को अनिश्चितता के दौर में धकेल दिया है.

Live TV

क्रूड की कीमतों का अनुमान बदला

  • रिपोर्ट में तेल कीमतों के अनुमान भी बढ़ाए गए हैं.
  • अब FY27 के लिए कच्चे तेल का अनुमान 85 डॉलर प्रति बैरल
  • FY28 के लिए 75 डॉलर
  • लॉन्ग-टर्म के लिए 65 डॉलर प्रति बैरल कर दिया गया है.
  • पहले यह अनुमान FY2027-28 के लिए 65 डॉलर और लॉन्ग-टर्म के लिए 70 डॉलर था.

एनर्जी इंफ्रा पर हमले से बढ़ी चिंता

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव ने हालात और बिगाड़ दिए हैं. ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष के बीच एनर्जी इंफ्रा पर हमले तेज हो गए हैं. खासतौर पर कतर में गैस इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों से ग्लोबल सप्लाई प्रभावित हुई है. कतर के LNG प्लांट के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचा है, जिससे उसके करीब 17% निर्यात पर असर पड़ा है. यह भारत के लिए चिंता की बात है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक कतर पर निर्भर है.

  • कतर के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुए हमलों और सप्लाई बाधित होने की आशंका ने घरेलू बाजार में उपलब्धता और कीमतों को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं, जिससे OMCs के पिछले कुछ वर्षों के मुनाफे पर दबाव बढ़ना तय है.
  • हमलों में एलएनजी (LNG) उत्पादन करने वाली 'ट्रेन 4' और 'ट्रेन 6' को नुकसान पहुंचा है, जिनकी ज्वाइंट उत्पादन क्षमता 12.8 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) है. यह कतर के कुल निर्यात का लगभग 17% है.
  • 'ट्रेन 4' QatarEnergy (66%) और ExxonMobil (34%) के बीच एक ज्वाइंट वेंचर है, जबकि 'ट्रेन 6' QatarEnergy (70%) और ExxonMobil (30%) के बीच का ज्वाइंट वेंचर है.

भारत की बढ़ी चिंता

इस हमले ने भारत की चिंताएं बढ़ा दी हैं, क्योंकि भारत अपनी एनर्जी जरूरतों के लिए कतर पर बहुत अधिक निर्भर है. अपने सबसे बड़े आपूर्तिकर्ताओं में से एक से आपूर्ति में कमी आने का असर घरेलू बाजार में उपलब्धता और कीमतों, दोनों पर पड़ सकता है.

(ANI इनपुट के साथ)

(ताजा खबरों के लिए आप हमारे WhatsApp Channel को सब्सक्राइब जरूर करें)

  1. 1
  2. 2
  3. 3
  4. 4
  5. 5
  6. 6