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Crude Oil Price Rally
Crude Oil Price: वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच सरकार ने संसद में बताया है कि फिलहाल भारत में महंगाई पर इसका बड़ा असर नहीं दिख रहा है. लोकसभा में एक सवाल के जवाब में वित्त मंत्रालय ने कहा कि पिछले एक साल तक क्रूड की कीमतें अपेक्षाकृत कम थीं, लेकिन 28 फरवरी 2026 को पश्चिम एशिया में शुरू हुए भू-राजनीतिक तनाव के बाद तेल के दाम बढ़ने लगे.
सरकार के मुताबिक फरवरी के अंत से 2 मार्च 2026 तक भारतीय बास्केट क्रूड ऑयल की कीमत 69.01 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 80.16 डॉलर प्रति बैरल हो गई. हालांकि मौजूदा समय में देश में महंगाई दर काफी नियंत्रण में है, इसलिए इस बढ़ोतरी का असर अभी बहुत ज्यादा नहीं माना जा रहा.
सरकार ने बताया कि रिजर्व बैंक के आकलन के मुताबिक अगर कच्चे तेल की कीमतों में 10% की बढ़ोतरी होती है, तो महंगाई करीब 0.30% (30 बेसिस पॉइंट) तक बढ़ सकती है. लेकिन आगे चलकर इसका असली असर कई बातों पर निर्भर करेगा- जैसे रुपये की विनिमय दर, वैश्विक मांग-आपूर्ति की स्थिति, मौद्रिक नीति और घरेलू बाजार में कीमतों का कितना असर ग्राहकों तक पास-ऑन होता है.
सरकार के आंकड़ों के अनुसार हाल के वर्षों में खुदरा महंगाई में लगातार कमी आई है.
यह दर RBI के 4% (±2%) के लक्ष्य के निचले स्तर के करीब है, यानी फिलहाल महंगाई काफी हद तक नियंत्रण में है.
सरकार ने बताया कि महंगाई को नियंत्रण में रखने के लिए कई प्रशासनिक और आर्थिक कदम उठाए गए हैं:
सरकार ने बताया कि फरवरी 2025 से अब तक पॉलिसी रेट में 125 बेसिस पॉइंट की कटौती की जा चुकी है, जिससे आर्थिक गतिविधियों को सपोर्ट मिला है.
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महंगाई के दबाव को कम करने के लिए सरकार ने टैक्स और नीतिगत स्तर पर भी कुछ फैसले लिए हैं:
कुल मिलाकर सरकार का कहना है कि फिलहाल महंगाई नियंत्रण में है. हालांकि अगर वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ती हैं, तो उसका असर भविष्य में दिख सकता है. इसलिए सरकार और रिजर्व बैंक दोनों स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं.
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