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नवंबर महीने की रिटेल इन्फ्लेशन (Retail Inflation) रिपोर्ट सामने आ गई है और इसमें साफ दिख रहा है कि लोगों की जेब पर दबाव और बढ़ गया है. जहां पिछले महीने खुदरा महंगाई 0.25% थी, वह नवंबर में बढ़कर 0.71% पर पहुंच गई है. सबसे बड़ा झटका सब्जियों (Vegetables) और दालों (Pulses) की कीमतों में भारी उछाल से लगा है.
सरकार की तरफ से जारी नए आंकड़ों के मुताबिक, शहरी (Urban Inflation) और ग्रामीण (Rural Inflation) दोनों ही इलाकों में महंगाई बढ़ी है. कोर इन्फ्लेशन (Core Inflation) हालांकि स्थिर रही है, लेकिन खाद्य महंगाई (Food Inflation) में तेज उछाल आने वाले महीनों की चिंताओं को बढ़ा रहा है.
नवंबर में शहरी महंगाई दर 0.88% से बढ़कर 1.40% पर पहुंच गई है. यानी शहरों में रहने वाले लोगों के लिए रोजमर्रा के खर्च पहले के मुकाबले ज्यादा बढ़े हैं. यातायात, किराना, मेडिकल और अन्य सेवाओं की लागत ने शहरी उपभोक्ताओं के बजट पर दबाव बढ़ाया है.
ग्रामीण महंगाई दर -0.25% से बढ़कर 0.10% पर पहुंच गई है. गांवों में कीमतें धीरे-धीरे बढ़ रही हैं. परिवहन, खाद्य वस्तुओं और घरेलू सामान की बढ़ती लागत इसकी मुख्य वजह रही है. हालांकि, रफ्तार धीमी है, लेकिन यह ट्रेंड आने वाले महीनों की चिंता बढ़ा सकता है.
खाद्य महंगाई दर -5.02% से उछलकर 3.91% हो गई है. यह एक बड़ा बदलाव है और इसका सीधा असर हर घर के बजट पर पड़ रहा है. सब्जियां, दालें और कुछ अन्य फूड आइटम्स ने रसोई का खर्च काफी बढ़ा दिया है.
सब्जियों की महंगाई -27.57% से उछलकर 22.20% पर पहुंच गई है. यह बदलाव बेहद तेज है. दालों की महंगाई -16.15% से उछलकर 15.86% तक पहुंच गई है. ये दोनों आंकड़े साफ दिखाते हैं कि खाने-पीने की चीजें महंगी होने से उपभोक्ताओं की जेब पर बड़ा असर पड़ा है.
बिजली और ईंधन (Fuel Inflation) की महंगाई 1.98% से बढ़कर 2.32% हो गई है. इससे घरों का बिजली बिल, वाहनों का खर्च और उद्योगों की लागत सभी पर असर पड़ रहा है.
हाउसिंग महंगाई 2.96% से मामूली घटकर 2.95% हुई है. कपड़ा और जूता (Clothing & Footwear Inflation) 1.70% से घटकर 1.49% हुआ है. इन सेक्टरों में कीमतों का दबाव ज्यादा नहीं बढ़ा है, लेकिन ये भी स्थिरता नहीं दिखा पा रहे हैं.
फलों की महंगाई 6.69% से बढ़कर 6.87% पर पहुंच गई है. भले ही बढ़त कम हो, लेकिन लगातार वृद्धि दिखाती है कि ताजा फलों की सप्लाई और मांग दोनों पर असर है.
अनाज महंगाई 0.92% से घटकर 0.10% हो गई है. यह उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है, लेकिन इसका असर अन्य बढ़ती कीमतों के मुकाबले बहुत हल्का है.
कई जरूरी सामानों और सेवाओं की महंगाई में हल्का बदलाव देखने को मिला है. दूध और दूध से बने उत्पादों की महंगाई दर इस बार थोड़ी बढ़ी है. यह 2.35% से बढ़कर 2.45% हो गई है, जो दिखाती है कि डेयरी सेक्टर में कीमतों में धीमी लेकिन लगातार बढ़ोतरी जारी है. इसी तरह मसालों की महंगाई भी -3.29% से सुधरकर -2.89% पर पहुंच गई है. यानी मसालों के दाम अब भी पहले से कम हैं, लेकिन गिरावट की रफ्तार थोड़ी धीमी हो गई है.
शिक्षा क्षेत्र में इस बार थोड़ी राहत दिखी है. Education inflation 3.49% से घटकर 3.38% पर आ गई है, यानी फीस और अन्य शैक्षणिक खर्चों में मामूली कमी देखने को मिली है. फूड एंड बेवरेज महंगाई भी -3.72% से बढ़कर -2.78% हो गई है, जिसका मतलब है कि खाद्य कीमतों में गिरावट जारी है, लेकिन रफ्तार कम हो गई है. दूसरी ओर ट्रांसपोर्ट और कम्युनिकेशन की महंगाई थोड़ा कम होकर 0.94% से 0.88% पर आ गई है, जो ईंधन और यात्रा लागत में मामूली राहत की ओर इशारा करती है.
खाद्य तेल की महंगाई में सबसे बड़ा बदलाव देखने को मिला है. यह 11.17% से घटकर 7.87% पर आ गई है, यानी तेल के दामों पर दबाव कम हुआ है और उपभोक्ताओं को इसमें ठोस राहत मिली है. कुल मिलाकर, कुछ आवश्यक चीजों में कीमतें बढ़ी हैं, जबकि कई कैटेगरी में गिरावट जारी है, जिससे आम लोगों के खर्च पर मिला-जुला असर पड़ रहा है.
| कैटेगरी | पिछला | नया |
|---|---|---|
| शहरी महंगाई | 0.88% | 1.40% |
| ग्रामीण महंगाई | -0.25% | 0.10% |
| खाद्य महंगाई | -5.02% | 3.91% |
| सब्जियां | -27.57% | 22.20% |
| दालें | -16.15% | 15.86% |
| फलों की महंगाई | 6.69% | 6.87% |
| अनाज | 0.92% | 0.10% |
| हाउसिंग | 2.96% | 2.95% |
| बिजली और ईंधन | 1.98% | 2.32% |
| खुदरा महंगाई | 0.25% | 0.71% |
नवंबर की महंगाई रिपोर्ट साफ दिखाती है कि लोगों की जेब पर दबाव बढ़ रहा है. सब्जियों और दालों के दामों में तेज उछाल ने घरेलू बजट बिगाड़ दिया है. शहरी और ग्रामीण दोनों सेक्टरों में महंगाई बढ़ रही है. अनाज की कीमतों में राहत है, लेकिन उसका असर बाकी बढ़ोतरी पर भारी नहीं पड़ रहा. आने वाले महीने चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं जब तक सरकार और मार्केट दोनों मिलकर सप्लाई को नियंत्रित नहीं कर लेते.
कीमतों में एक निश्चित अवधि में हुए बदलाव को महंगाई दर कहा जाता है.
खाद्य पदार्थ, ईंधन, कपड़ा, सेवाएं और रोजमर्रा की वस्तुएं.
सप्लाई कम होने या मांग बढ़ने से.
मौसम, परिवहन और आपूर्ति बाधाएं मुख्य कारण हैं.
उत्पादन घटने और आयात लागत बढ़ने से.
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