पेट्रोलियम मंत्रालय के नए आदेश से इन सेक्टर्स की हो गई चांदी! फार्मा, फूड और ग्लास सेक्टर को अब मिलेगी 70% गैस

सरकार ने फार्मा, फूड, ग्लास और एरोसोल जैसे बड़े औद्योगिक सेक्टरों के लिए नॉन-डोमेस्टिक LPG की सप्लाई में बड़ी बढ़ोतरी का ऐलान किया है. जानिए इस नई पॉलिसी से आपकी इंडस्ट्री पर क्या असर पड़ेगा.
पेट्रोलियम मंत्रालय के नए आदेश से इन सेक्टर्स की हो गई चांदी! फार्मा, फूड और ग्लास सेक्टर को अब मिलेगी 70% गैस

फार्मा, फूड और ग्लास सेक्टर को अब मिलेगी 70% गैस

अगर आप किसी फैक्ट्री के मालिक हैं या इंडस्ट्रियल सेक्टर की खबरों पर नजर रखते हैं, तो आज की सुबह आपके लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी लेकर आई है. सरकार ने इंडस्ट्रियल यूनिट्स की नब्ज पहचानते हुए गैस सप्लाई के नियमों में बड़ा बदलाव किया है. अब फार्मा, फूड प्रोसेसिंग, ग्लास और एरोसोल जैसी कंपनियों के प्लांट में गैस की किल्लत बीते दिनों की बात होने वाली है.

डॉ. नीरज मित्तल की ओर से जारी ताजा चिट्ठी ने साफ कर दिया है कि सरकार अब उद्योगों को उनके पुराने कंजम्पशन लेवल का 70% हिस्सा मुहैया कराने जा रही है. यह कदम न सिर्फ प्रोडक्शन की रफ्तार बढ़ाएगा बल्कि उन सेक्टर्स को भी संजीवनी देगा जहां नेचुरल गैस का इस्तेमाल संभव नहीं था. चलिए, इस पूरी खबर को विस्तार से समझते हैं कि आखिर इस फैसले के पीछे की कहानी क्या है और यह कैसे काम करेगा.

क्या है 70% गैस सप्लाई का नया गणित?

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सरकार ने अपनी पिछली कई चिट्ठियों (16, 18, 21 और 27 मार्च 2026) का हवाला देते हुए अब एक फाइनल ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है. राज्यों को अब जो LPG अलॉट की गई है, उसमें बेस सप्लाई के साथ-साथ 'रिफॉर्म बोनस' को भी जोड़ा गया है.

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इस नए नियम के तहत सप्लाई को दो हिस्सों में बांटा गया है-

60% रेगुलर सप्लाई: यह उन सभी पात्र उद्योगों को मिलेगी जो निर्धारित मानकों को पूरा करते हैं.

10% एडिशनल सप्लाई: यह हिस्सा उन राज्यों या यूनिट्स को मिलेगा जो PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) को बढ़ावा देने के लिए जरूरी सुधारों को लागू करेंगे.

कुल कोटा: इस तरह कुल मिलाकर कंपनियां 70% तक नॉन-डोमेस्टिक LPG हासिल कर सकेंगी.

इन 16 सेक्टर्स की किस्मत चमकेगी

सरकार ने साफ कर दिया है कि यह सुविधा चुनिंदा और महत्वपूर्ण सेक्टर्स के लिए है. अगर आपकी कंपनी नीचे दी गई टेबल में शामिल किसी भी काम से जुड़ी है, तो आपको इस 70% कोटे का सीधा फायदा मिलेगा.

मुख्य सेक्टर्स (Major Sectors)अन्य महत्वपूर्ण सेक्टर्स (Other Allied Sectors)
फार्मा (Pharma) और फूड (Food)एग्रीकल्चर और सीड (Seed)
पॉलिमर (Polymer) और ग्लास (Glass)पेंट और पैकेजिंग
स्टील और मेटलसेरामिक और फाउंड्री
यूरेनियम और हैवी वाटरफोर्जिंग और एरोसोल

किसे मिलेगी प्राथमिकता और क्या हैं शर्तें?

इस गैस अलॉटमेंट में सरकार ने 'जरूरत' को सबसे ऊपर रखा है. सबको एक ही तराजू में नहीं तोला जाएगा. कुछ खास यूनिट्स को लाइन में सबसे आगे रखा जाएगा.

स्पेशलाइज्ड पर्पज: ऐसी यूनिट्स जहां LPG का कोई दूसरा विकल्प मौजूद नहीं है, उन्हें इंटर-से प्रायोरिटी (Inter-se priority) दी जाएगी.

प्रोसेस की अनिवार्यता: जहां मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस में LPG का इस्तेमाल एक जरूरी इनपुट की तरह होता है और वहां नेचुरल गैस काम नहीं कर सकती, उन्हें विशेष छूट मिलेगी.

OMC रजिस्ट्रेशन: 21 मार्च 2026 के पत्र के अनुसार, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के साथ रजिस्ट्रेशन होना अनिवार्य है.

सेक्टर की लिमिट: सरकार ने पूरे सेक्टर के लिए 0.2 TMT प्रति दिन की एक कुल सीमा तय की है, ताकि डिस्ट्रीब्यूशन बैलेंस बना रहे.

PNG आवेदन से किसे मिलेगी छूट?

आमतौर पर सरकार चाहती है कि कंपनियां LPG से PNG की तरफ शिफ्ट हों, लेकिन कुछ तकनीकी मजबूरियों को सरकार ने भी समझा है.

जिन उद्योगों में LPG का इस्तेमाल एक 'इंटीग्रल इनपुट' के रूप में होता है, उन्हें PNG के लिए आवेदन करने की शर्त से आजाद कर दिया गया है.

अगर आपके काम में नेचुरल गैस, LPG को रिप्लेस नहीं कर सकती, तो आपको बिना किसी अतिरिक्त आवेदन के इस कोटे का लाभ मिलता रहेगा.

बाकी अन्य यूनिट्स को CGD (सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन) संस्थाओं के पास PNG के लिए अप्लाई करना ही होगा, जैसा कि 21 मार्च के आदेश में कहा गया था.

राज्यों और विभागों के लिए क्या है टास्क?

सिर्फ कंपनियों को गैस देना ही मकसद नहीं है, डॉ. नीरज मित्तल ने राज्यों के मुख्य सचिवों और केंद्र के सचिवों को कुछ जरूरी काम भी सौंपे हैं. सरकार चाहती है कि सिस्टम में पारदर्शिता और रफ्तार बनी रहे.

आदेश का प्रसार: 'नेचुरल गैस और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स डिस्ट्रीब्यूशन ऑर्डर 2026' को तुरंत सभी संबंधित विभागों तक पहुंचाना होगा.

रिफॉर्म की रफ्तार: जो राज्य 10% एक्स्ट्रा कोटे का फायदा उठाना चाहते हैं, उन्हें सुधारों को तेजी से लागू करना होगा.

CBG पॉलिसी: 6 अप्रैल 2026 को भेजे गए ड्राफ्ट के आधार पर कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) स्टेट पॉलिसी को जल्द से जल्द नोटिफाई करना होगा.

सरकार का यह फैसला इंडस्ट्रियल ग्रोथ और क्लीन फ्यूल के बीच एक बेहतरीन बैलेंस बनाने की कोशिश है. मार्च 2026 से पहले के खपत स्तर का 70% हिस्सा वापस मिलना उन कंपनियों के लिए राहत की बात है जो फ्यूल की कमी के कारण अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रही थीं. विशेष रूप से फार्मा और फूड जैसे सेंसिटिव सेक्टर्स के लिए यह किसी बूस्टर डोज से कम नहीं है. अब गेंद राज्यों के पाले में है कि वे कितनी जल्दी सुधारों को लागू कर इस कोटे का पूरा लाभ अपनी इंडस्ट्रीज तक पहुंचाते हैं.

आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

Q1 क्या सभी कंपनियों को 70% LPG सप्लाई मिलेगी?

नहीं, यह उन्हीं कंपनियों को मिलेगी जो स्पेसिफाइड सेक्टर्स जैसे फार्मा, फूड, ग्लास आदि में आती हैं और जिनका रजिस्ट्रेशन OMCs के साथ है.

Q2 वह 10% अतिरिक्त गैस कैसे मिल सकती है?

यह 10% हिस्सा सुधारों से जुड़ा है. अगर राज्य सरकारें PNG को बढ़ावा देने के रिफॉर्म्स पूरे करती हैं, तभी यह एडिशनल कोटा रिलीज होगा.

Q3 क्या मुझे PNG के लिए अप्लाई करना जरूरी है?

अगर आपका काम ऐसा है जहां LPG को नेचुरल गैस से नहीं बदला जा सकता, तो आपको PNG आवेदन की शर्त से छूट मिलेगी. अन्यथा, यह जरूरी है.

Q4 इस सप्लाई की कुल डेली लिमिट क्या है?

पूरी इंडस्ट्री के लिए नॉन-डोमेस्टिक बल्क LPG की कुल सीमा 0.2 TMT प्रति दिन तय की गई है.

Q5 CBG पॉलिसी का इस मामले से क्या लेना-देना है?

सरकार बायोगैस को भी बढ़ावा दे रही है. राज्यों को निर्देश दिया गया है कि वे 6 अप्रैल 2026 के ड्राफ्ट के आधार पर अपनी CBG पॉलिसी को जल्द नोटिफाई करें.

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