जब भारत का बजट पेश करने वाले इस व्यक्ति को पाकिस्तान ने बनाया पीएम, दिलचस्प है पहले बजट की कहानी

क्या आपको पता है कि पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री लियाकत अली खान ने एक समय भारत का आम बजट पेश किया था? यह देश का पहला बजट था. चलिए देश के पहले बजट से जुड़े इस अनसूनी कहानी के बारे में जानते हैं.
जब भारत का बजट पेश करने वाले इस व्यक्ति को पाकिस्तान ने बनाया पीएम, दिलचस्प है पहले बजट की कहानी

1 फरवरी 2024 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण देश का आम बजट पेश करने जा रही हैं. सरकार की तरफ से बजट को लेकर तैयारी अपने आखिरी चरण में चल रही है. ऐसे में आइए देश के पहले बजट से जुड़े एक अनसूनी कहानी के बारे में जानते हैं. क्या आपको पता है कि पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री लियाकत अली खान ने एक समय भारत का आम बजट पेश किया था? यह देश का पहला बजट था. यह दिलचस्प ऐतिहासिक तथ्य 2 फरवरी 1946 का है, जब लियाकत अली खान ने भारत के तत्कालीन लेजिस्लेटिव असेंबली भवन (आज का संसद भवन) में बजट पेश किया था. यह बजट उनके द्वारा अंतरिम सरकार के वित्त मंत्री के रूप में पेश किया गया था, जो कि जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में बनी थी.

लियाकत अली का भारतीय राजनीति में योगदान

लियाकत अली खान, जो ऑल इंडिया मुस्लिम लीग के वरिष्ठ नेता और मोहम्मद अली जिन्ना के करीबी माने जाते थे, ने स्वतंत्रता पूर्व भारत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. वे उत्तर प्रदेश के मेरठ और मुजफ्फरनगर से चुनाव लड़ते थे और मुस्लिम लीग के नुमाइंदे के रूप में अंतरिम सरकार का हिस्सा बने. पंडित नेहरू ने उन्हें वित्त मंत्रालय का प्रभार दिया था.

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पुअर मैन बजट

लियाकत अली खान के बजट को "पुअर मैन बजट" कहा गया. उन्होंने इसे "सोशलिस्ट बजट" बताया, लेकिन उनके कठोर कर प्रस्तावों ने उद्योग जगत की नाराजगी को जन्म दिया. उन पर आरोप लगे कि उन्होंने कर प्रणाली को ऐसा बनाया जिससे बड़े व्यापारिक घरानों को नुकसान हुआ. सरदार पटेल ने तो यहां तक कहा कि बिना लियाकत अली की मंजूरी के एक चपरासी की नियुक्ति भी संभव नहीं थी.

आलोचना और समर्थन

हालांकि, लियाकत अली पर हिन्दू विरोधी होने के आरोप भी लगे, लेकिन उनके बचाव में यह कहा गया कि उनकी पत्नी गुल-ए-राना मूल रूप से एक हिन्दू परिवार से थीं, हालांकि उनका परिवार बाद में ईसाई हो गया था. देश के विभाजन और जिन्ना की मृत्यु के बाद, लियाकत अली खान पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री बने और वहां के सबसे बड़े नेता के रूप में उभरे. 1951 में रावलपिंडी में एक सभा को संबोधित करते समय उनकी हत्या कर दी गई. यह वही स्थान था जहां बाद में बेनजीर भुट्टो की भी हत्या हुई.

लियाकत अली खान का भारतीय राजनीति और बजट में योगदान उनके नेतृत्व और कूटनीतिक कौशल को दर्शाता है. उनकी जीवनगाथा भारत और पाकिस्तान दोनों के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय है.

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