मजबूत स्थिति में इंडियन बैंक्स, ग्लोबल अनसर्टेनिटी के असर को झेलने के लिए बेहतर स्थिति में : S&P

रेटिंग एजेंसी S&P ने कहा कि ग्लोबल अनसर्टेनिटी को झेलने के लिए भारतीय बैंकिंग सिस्टम मजबूत स्थिति में है. अगले 2 सालों में भारतीय बैंकों के नए NPA 1.7-1.8% के दायरे में रहने की उम्मीद है.
मजबूत स्थिति में इंडियन बैंक्स, ग्लोबल अनसर्टेनिटी के असर को झेलने के लिए बेहतर स्थिति में : S&P

एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने इंडियन बैंकिंग सेक्टर को लेकर एक रिपोर्ट जारी की है. रेटिंग एजेंसी ने कहा कि भारतीय बैंक वैश्विक अनिश्चितता, टैरिफ, ब्याज दरों में कटौती और कमजोर होते रुपए से निपटने के लिए एक मजबूत और अच्छी स्थिति में है. ग्लोबल रेटिंग फर्म ने कहा कि भारतीय कंपनियों की फाइनेंशियल मजबूती में सुधार हो रहा है.

NPA 1.7-1.8% के दायरे में रहने की उम्मीद

रेटिंग एजेंसी ने कहा कि अगले 2 सालों में भारतीय बैंकों के नए NPA 1.7-1.8% के दायरे में रहने की उम्मीद है. रिटेल स्लिपेजेज के कारण नए नॉन परफॉर्मिंग असेट्स यानी NPA देखा जाएगा. जीएसटी में कटौती का जो फैसला लिया गया है उससे बैंकिंग सेक्टर के क्रेडिट ग्रोथ में सुधार की उम्मीद है. चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में क्रेडिट ग्रोथ हेल्दी रहने की उम्मीद है.

11.5-12.5% रह सकता है क्रेडिट ग्रोथ

S&P का मानना है कि FY26, FY27 में बैंकों की क्रेडिट ग्रोथ 11.5-12.5% के दायर में रह सकता है. ग्लोबल अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय बैंकों की स्थिति मजबूत लग रही है. भारतीय बैंक टैरिफ, कमजोर रुपए से निपटने में सक्षम नजर आ रहे हैं. भारतीय बैंकों की मजबूती में योगदान देने वाले प्रमुख कारकों में टैरिफ-हिट सेक्टर में उनका कम निवेश, कंपनियों का कर्ज कम करना और सुरक्षित खुदरा ऋण पर ध्यान केंद्रित करना शामिल है.

कॉर्पोरेट लोन सेगमेंट में NPL का 1.1% रह सकता है

एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स की क्रेडिट विश्लेषक गीता चुघ ने कहा, "हमने 2,000 से अधिक भारतीय कंपनियों के क्रेडिट मॉडल स्कोर पर एशिया-प्रशांत कॉर्पोरेट डिफॉल्ट रेट्स को लागू किया. हमारे परिदृश्य विश्लेषण से पता चलता है कि भारतीय बैंक संभावित चूक को आसानी से सहन कर सकते हैं, जो उन्हें विकास के लिए तैयार बनाता है." चुग ने आगे कहा, "हमारे परिदृश्य विश्लेषण से पता चलता है कि कॉर्पोरेट ऋण में नए नॉन परफॉर्मिंग लोन (NPL) का निर्माण अगले दो वर्षों में औसतन 1.1 फीसदी प्रति वर्ष होगा."

(आईएएनएस इनपुट के साथ)

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