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23 फरवरी से भारत का एक हाई-लेवल डेलिगेशन तीन दिनों के दौरे पर अमेरिका जा रहा है.
भारत और अमेरिका के रिश्तों में एक ऐसी गर्माहट आई है, जिसका असर आपकी जेब, देश की तरक्की और ग्लोबल मार्केट, तीनों पर दिखने वाला है. खबर है कि अप्रैल 2026 से भारत-अमेरिका ट्रेड डील का पहला हिस्सा यानी 'फर्स्ट ट्रेंच' लागू हो जाएगा. यह सिर्फ कागजी समझौता नहीं है, बल्कि दो महाशक्तियों का हाथ मिलाना है ताकि आने वाला वक्त 'सिलिकॉन और सॉफ्टवेयर' के दम पर राज कर सके.
अभी की सबसे बड़ी अपडेट यह है कि 23 फरवरी से भारत का एक हाई-लेवल डेलिगेशन तीन दिनों के दौरे पर अमेरिका जा रहा है. इस दल की अगुवाई कॉमर्स मिनिस्ट्री के जॉइंट सेक्रेटरी और चीफ नेगोशिएटर दर्पण जैन करेंगे. वहां जाकर ये लोग डील के कानूनी शब्दों (Legal Scrubing) को आखिरी रूप देंगे. इसके अलावा, इस महीने के अंत तक 18% टैरिफ का अमेरिकी एक्जीक्यूटिव ऑर्डर आने की उम्मीद भी है.
इस समझौते को आसान भाषा में समझें तो यह एक 'इंटरिम ट्रेड एग्रीमेंट' है. इसका मतलब है कि एक बड़ी और पूरी डील से पहले का जरूरी कदम. इस समझौते के तहत दोनों देश एक-दूसरे के सामान पर लगने वाली ड्यूटी (टैक्स) में भारी कटौती करेंगे.
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अमेरिका ने दिल खोलकर कदम बढ़ाया है. वह भारतीय सामानों पर लगने वाले टैरिफ को 25 परसेंट से घटाकर सीधा 18 परसेंट पर ले आएगा. इसमें कपड़े, जूते, लेदर, प्लास्टिक और घरेलू सजावट जैसे सामान शामिल हैं. एक बड़ी राहत यह भी मिली है कि भारत द्वारा रूस से कच्चा तेल खरीदने पर अमेरिका ने जो 25 परसेंट का दंडात्मक टैरिफ लगाया था, उसे अब हटा दिया गया है.
बदले में भारत ने भी बड़े वादे किए हैं. अगले पांच सालों में भारत अमेरिका से 500 अरब डॉलर का सामान खरीदेगा. इस लिस्ट में तेल, गैस, कोकिंग कोल के साथ-साथ हवाई जहाज और उनके पार्ट्स शामिल हैं. इतना ही नहीं, भविष्य की तकनीक यानी AI और डेटा सेंटर के लिए जरूरी 'ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट' (GPU) भी अमेरिका से आएंगे.
भारतीय किसानों और व्यापारियों के लिए भी अच्छी खबर है. भारत अब अमेरिका से आने वाले मेवों (Tree Nuts), ताजे फलों, सोयाबीन तेल और वाइन-स्पिरिट जैसे उत्पादों पर टैक्स कम करेगा. हालांकि, भारत ने अपनी खेती और किसानों के हितों का पूरा ध्यान रखा है. दालों (Pulses) को 'सेंसिटिव सेक्टर' में रखा गया है, यानी उन पर कोई समझौता नहीं होगा.
इस बीच 'इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026' में एक और बड़ा धमाका हुआ है. भारत आधिकारिक तौर पर 'Pax Silica' गठबंधन का हिस्सा बन गया है. यह नाम थोड़ा भारी लग सकता है, पर इसका काम बहुत सीधा है, दुनिया में सेमीकंडक्टर और AI की सप्लाई चेन को सुरक्षित करना.
आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बहुत पते की बात कही है. उन्होंने कहा कि हम सिर्फ एक मीटिंग नहीं कर रहे, बल्कि आने वाली पीढ़ी का भविष्य लिख रहे हैं. आज भारत के इंजीनियर 2-नैनोमीटर वाले चिप डिजाइन कर रहे हैं. आने वाले समय में इस इंडस्ट्री में 10 लाख प्रोफेशनल की जरूरत होगी, और भारत इसे पूरा करने के लिए तैयार है.
अमेरिका के अंडर सेक्रेटरी जैकब हेलबर्ग ने इसे 'Pax Silica' डिक्लेरेशन कहा है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अब आर्थिक सुरक्षा ही देश की सुरक्षा है. हम किसी भी देश की ब्लैकमेलिंग या सप्लाई चेन पर किसी एक के कब्जे को बर्दाश्त नहीं करेंगे. अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी इशारा किया है कि पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति की मुलाकात को लेकर 'Stay Tuned' रहें, यानी कुछ बड़ा होने वाला है.
इस पूरे मिशन का मकसद है कि AI और सेमीकंडक्टर जैसी तकनीक लोकतांत्रिक देशों के हाथ में रहे, ताकि इनका इस्तेमाल दुनिया की भलाई के लिए हो सके. टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और माइक्रोन जैसी दिग्गज कंपनियों के CEO भी इस बात को मान रहे हैं कि यह समझौता भारत को ग्लोबल टेक ईकोसिस्टम का लीडर बना देगा.
कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल के मुताबिक, इस समझौते पर मार्च तक साइन हो सकते हैं. इसके बाद जैसे ही भारत टैरिफ कटौती लागू करेगा, अमेरिकी मार्केट के 30 ट्रिलियन डॉलर के दरवाजे हमारे किसानों, मछुआरों और छोटे उद्योगों (MSME) के लिए खुल जाएंगे. यह एक 'विन-विन' वाली स्थिति है, जहां दोनों देशों की तरक्की एक-दूसरे से जुड़ी हुई है.