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भारत का मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट (Trade Deficit) यानी निर्यात और आयात के बीच का अंतर सितंबर 2025 में और बढ़ गया है. यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (UBI) की एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, यह घाटा अगस्त के 26.5 अरब डॉलर से बढ़कर सितंबर में 28 अरब डॉलर पहुंच गया है.
रिपोर्ट में बताया गया है कि इस बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह रही गोल्ड इम्पोर्ट्स (Gold Imports) में जबरदस्त उछाल, जो पिछले महीने की तुलना में लगभग दोगुने हो गए हैं. यह बढ़ोतरी तब हुई है जब सोने की कीमतें पहले से ही रिकॉर्ड स्तर पर थीं.
UBI की रिपोर्ट के मुताबिक, सोने की मांग में यह तेज़ी त्योहारी और शादी के सीजन के कारण आई है. भारत में अक्टूबर से जनवरी तक का समय पारंपरिक रूप से गोल्ड की खरीद के लिए सबसे सक्रिय रहता है, क्योंकि इस दौरान दशहरा, दिवाली और शादी समारोह जैसे अवसर आते हैं.
रिपोर्ट में कहा गया है कि, “सितंबर 2025 में भारत का ट्रेड डेफिसिट 28 अरब डॉलर रहा, जबकि अगस्त में यह 26.5 अरब डॉलर था. यह वृद्धि मुख्य रूप से गोल्ड इम्पोर्ट्स में आई तेज़ी की वजह से हुई.”
दिलचस्प बात यह है कि सितंबर में वैश्विक स्तर पर कमोडिटी प्राइस में बहुत बड़ा बदलाव नहीं हुआ. CRY Index, जो प्रमुख वैश्विक कमोडिटी की कीमतों को ट्रैक करता है, 296.64 से बढ़कर 301.78 तक ही गया. इसके बावजूद भारत में गोल्ड की डिमांड बढ़ने से आयात बिल पर दबाव बढ़ा.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि ट्रेड डेफिसिट पर असर डालने वाला एक और कारण अमेरिका-भारत व्यापार समझौते (US-India trade deal) में हो रही देरी है. अमेरिका भारत के कुल निर्यात का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा रखता है. इस समझौते में रुकावट की वजह से निर्यात (Exports) की रफ्तार धीमी पड़ी है.
UBI की रिपोर्ट चेतावनी देती है कि निकट भविष्य में ट्रेड डेफिसिट ऊंचा बना रह सकता है. त्योहारी सीजन में गोल्ड इम्पोर्ट्स के मजबूत रहने, ऊर्जा की स्थिर मांग और इलेक्ट्रॉनिक्स तथा कैपिटल गुड्स के आयात पर निर्भरता के कारण घाटा फिलहाल घटने की संभावना कम है. रिपोर्ट के मुताबिक, “कमोडिटी प्राइस में मामूली नरमी और इंपोर्ट सब्स्टीट्यूशन प्रोग्राम्स से कुछ राहत जरूर मिल सकती है, लेकिन कमजोर एक्सपोर्ट ग्रोथ के कारण दबाव बना रहेगा.”
वैश्विक बाजार में डिमांड की कमजोरी और टैरिफ संबंधी चुनौतियां भारत के निर्यात को प्रभावित कर रही हैं. कई देशों में धीमी आर्थिक रिकवरी और व्यापारिक नीतियों में बदलाव के चलते भारतीय उत्पादों की मांग घट रही है.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत और अमेरिका के बीच चल रही ट्रेड डील बातचीत निकट भविष्य में सुधार की दिशा दिखा सकती है. दोनों देशों के बीच पहले चरण के व्यापार समझौते (Phase-I Trade Agreement) पर नवंबर 2025 तक चर्चा जारी रहने की उम्मीद है. वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी हाल में कहा कि अमेरिका के साथ रचनात्मक बातचीत जारी है, लेकिन भारत अपने मुख्य हितों की रक्षा को प्राथमिकता देगा.
अगर यह समझौता लागू होता है, तो टैरिफ बाधाओं (tariff barriers) में कमी से भारत के निर्यात को नया बल मिल सकता है, खासकर अमेरिका जैसे बड़े व्यापारिक साझेदार के लिए. UBI की रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल भारत का ट्रेड डेफिसिट आयात की मजबूती और निर्यात की कमजोरी के कारण दबाव में रहेगा. सोने, ऊर्जा और इलेक्ट्रॉनिक्स के बढ़ते आयात से घाटा ऊंचा बना रहेगा, जबकि कमोडिटी कीमतों में नरमी और नई ट्रेड डील्स भविष्य में कुछ राहत दे सकती हैं.
1. सितंबर 2025 में भारत का ट्रेड डेफिसिट कितना रहा?
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक 28 अरब डॉलर.
2. अगस्त 2025 में यह घाटा कितना था?
अगस्त में भारत का ट्रेड डेफिसिट 26.5 अरब डॉलर था.
3. घाटा बढ़ने की सबसे बड़ी वजह क्या रही?
गोल्ड इम्पोर्ट्स में आई तेज़ी और अमेरिकी ट्रेड डील में देरी.
4. क्या आगे भी घाटा ऊंचा रह सकता है?
हां, त्योहारी मांग और आयात पर निर्भरता के कारण घाटा फिलहाल ऊंचा रह सकता है.
5. अमेरिका-भारत ट्रेड डील से क्या फायदा होगा?
समझौता लागू होने पर टैरिफ बाधाएं कम होंगी और भारतीय निर्यात को बढ़ावा मिलेगा.