पेट्रोलियम रिजर्व पर आ गया मोदी सरकार का बड़ा बयान! बता दिया कितने दिन तक नहीं रुकेगा देश

भारत के पास अब 74 दिनों का कच्चा तेल और पेट्रोलियम रिजर्व मौजूद है. जानिए कैसे मोदी सरकार युद्ध जैसे हालात से निपटने के लिए बना रही है मेगा स्टोरेज प्लान.
पेट्रोलियम रिजर्व पर आ गया मोदी सरकार का बड़ा बयान! बता दिया कितने दिन तक नहीं रुकेगा देश

पेट्रोलियम रिजर्व पर आ गया मोदी सरकार का बड़ा बयान. (Image Source- ANI)

कल्पना कीजिए कि अगर कल को दुनिया के किसी कोने में छिड़ी जंग की वजह से कच्चे तेल की सप्लाई रुक जाए, तो क्या होगा? क्या हमारी गाड़ियां थम जाएंगी? क्या बिजली गुल हो जाएगी? इन सवालों का जवाब सोमवार को संसद में सरकार ने बहुत ही भरोसे के साथ दिया है. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने राज्यसभा में बताया कि भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को इतना मजबूत कर लिया है कि किसी भी आपात स्थिति में देश के पास 74 दिनों का बैकअप प्लान तैयार है.

जब मिडिल ईस्ट से लेकर यूरोप तक भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Conflicts) चरम पर है, तब भारत की यह तैयारी किसी वरदान से कम नहीं है. सरकार सिर्फ आज की जरूरतें पूरी नहीं कर रही, बल्कि भविष्य के लिए विशालकाय भूमिगत गुफाएं (Strategic Reserves) भी बना रही है. यह खबर हर उस नागरिक के लिए सुकून देने वाली है जो पेट्रोल और डीजल की कीमतों और उसकी उपलब्धता को लेकर फिक्रमंद रहता है.

कहां कितना जमा है तेल?

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भारत की ऊर्जा सुरक्षा मुख्य रूप से दो हिस्सों में बंटी हुई है. एक वो जो सरकार ने इमरजेंसी के लिए बचा कर रखा है और दूसरा वो जो हमारी तेल कंपनियों के टैंकों में हर वक्त मौजूद रहता है.

रणनीतिक रिजर्व (SPR)9.5 दिन5.33 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता
तेल कंपनियां (OMCs)64.5 दिनरिफाइनरी और डिपो में मौजूद स्टॉक
कुल राष्ट्रीय क्षमता74 दिनकिसी भी संकट से निपटने के लिए पर्याप्त

चंडीखोल और पादुर में बनेंगी 'तेल की तिजोरियां'

सरकार इतने पर ही नहीं रुकने वाली है. जुलाई 2021 में ही कैबिनेट ने दो नए और विशालकाय स्टोरेज सेंटर बनाने को हरी झंडी दे दी थी. ये प्रोजेक्ट्स पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मोड पर तैयार किए जा रहे हैं.

चंडीखोल (ओडिशा): यहां 4 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) की क्षमता वाला रिजर्व बनेगा.

पादुर (कर्नाटक): यहां 2.5 MMT की अतिरिक्त क्षमता तैयार की जाएगी.

फायदा: इन दोनों सेंटर्स के शुरू होते ही भारत के पास 12 दिनों के अतिरिक्त आयात के बराबर तेल जमा रखने की ताकत आ जाएगी.

सप्लाई चैन को टूटने से बचाने के 3 मास्टर प्लान

सिर्फ तेल जमा करना ही काफी नहीं है, बल्कि उसे सही समय पर देश तक लाना भी एक चुनौती है. इसके लिए सरकार ने तीन स्तरों पर सुरक्षा कवच तैयार किया है:

आयात का विविधीकरण (Diversification): भारत अब सिर्फ एक या दो देशों पर निर्भर नहीं है. हम दुनिया के अलग-अलग कोनों से तेल खरीद रहे हैं ताकि एक जगह युद्ध हो तो दूसरी जगह से सप्लाई जारी रहे.

खतरनाक रास्तों से तौबा: युद्ध वाले इलाकों या संघर्ष वाले समुद्री रास्तों को बाईपास करके सुरक्षित रूट से तेल भारत लाया जा रहा है.

मजबूत कूटनीति: भारत लगातार IEA (इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी), OPEC और IEF जैसे संगठनों के साथ तालमेल बिठा रहा है ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की सप्लाई में कोई रुकावट न आए.

भारत के अपने खजाने की क्या है स्थिति?

भले ही हम आयात पर निर्भर हैं, लेकिन देश के भीतर भी तेल और गैस की खोज लगातार जारी है. 1 अप्रैल 2025 तक के आंकड़ों के मुताबिक, भारत के पास अपनी जमीन और समुद्र के भीतर काफी भंडार मौजूद है:

कच्चा तेल (Crude Oil): भारत का प्रमाणित भंडार (Proven Reserves) 423.1 मिलियन मीट्रिक टन है.

प्राकृतिक गैस (Natural Gas): गैस का प्रमाणित भंडार 595.4 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) आंका गया है.

हालांकि, हमारी खपत इतनी ज्यादा है कि हम अपनी जरूरत का 85% से 88% कच्चा तेल विदेशों से मंगाते हैं. वहीं, गैस (LNG) के मामले में हमारी निर्भरता करीब 48% से 50% के बीच रहती है.

तेल सप्लाई पर सरकार की नजर

पेट्रोलियम मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक देश में पेट्रोल, डीज़ल और LPG का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और मौजूदा हालात में रिटेल स्तर पर पेट्रोल-डीज़ल के दाम बढ़ने की संभावना नहीं है. हालांकि मिडिल ईस्ट में तनाव और पहली बार Strait of Hormuz के बंद होने का असर ग्लोबल सप्लाई पर साफ दिख रहा है.

पहले जहां इस रास्ते से रोज करीब 138 जहाज गुजरते थे, वहीं अब यह संख्या घटकर तीन से भी कम रह गई है. इसके बावजूद घरेलू उपभोक्ताओं के लिए LNG की कीमतों में किसी बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है और इंडस्ट्रियल सप्लाई को जरूरत के हिसाब से डायवर्ट किया गया है ताकि घरेलू खपत प्रभावित न हो.

LPG और क्रूड पर रणनीति

सरकार ने ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को LPG उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं ताकि घरेलू मांग आसानी से पूरी हो सके. फिलहाल करीब 10% LPG अमेरिका से आ रही है और इसके अलावा कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, नॉर्वे और अल्जीरिया जैसे देशों से भी सप्लाई बढ़ाने की तैयारी है. मंत्रालय का कहना है कि मौजूदा स्थिति में स्टॉक को लेकर कोई बड़ी चिंता नहीं है.

LPG डिलीवरी का समय 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन करने का मकसद कालाबाजारी और होर्डिंग को रोकना है. वहीं सूत्रों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 130 डॉलर प्रति बैरल तक भी पहुंचती हैं, तब भी घरेलू बाजार में कीमतें बढ़ने की संभावना फिलहाल कम है.

भविष्य में कैसे रहेगी भारत की स्थिति

74 दिनों का यह तेल भंडार भारत के लिए एक सुरक्षा ढाल की तरह है. भू-राजनीतिक अस्थिरता के इस दौर में, जहां पल-भर में सप्लाई चैन ठप हो जाती है, भारत का यह 'बफर स्टॉक' अर्थव्यवस्था को पटरी पर रखने में मदद करेगा.

चंडीखोल और पादुर जैसे नए प्रोजेक्ट्स आने के बाद भारत की स्थिति और भी मजबूत हो जाएगी. यह सिर्फ तेल का भंडार नहीं है, बल्कि देश की आत्मनिर्भरता और किसी भी वैश्विक दबाव के खिलाफ खड़ा होने की हमारी बढ़ती ताकत का प्रतीक है.

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