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भारत के कॉफी निर्यात ने पिछले 11 वर्षों में जबरदस्त उछाल दिखाया है. केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार, देश का कॉफी निर्यात वर्ष 2014-15 के 80 करोड़ डॉलर से बढ़कर 2023-24 में 1.8 अरब डॉलर तक पहुंच गया है. यानी करीब 125 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है. यह बढ़त भारतीय कॉफी बोर्ड द्वारा उठाए गए अनेक सुधारात्मक और प्रो-एक्सपोर्ट कदमों का परिणाम है.
भारत से सबसे अधिक कॉफी का निर्यात यूरोप को होता है. प्रमुख आयातक देशों में इटली, जर्मनी, बेल्जियम, और पश्चिम एशिया, साथ ही दक्षिण कोरिया और जापान जैसे देश शामिल हैं. ये देश भारतीय कॉफी की गुणवत्ता और विविधता की वजह से इसे प्राथमिकता देते हैं.
कॉफी बोर्ड ने निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कई इनोवेशन किए हैं. इनमें आरसीएमसी (पंजीकरण सह सदस्यता प्रमाणपत्र), निर्यात परमिट और उत्पत्ति प्रमाणपत्र जैसे जरूरी दस्तावेजों को ऑनलाइन और डिजिटल हस्ताक्षर के जरिए जारी करना शामिल है. इससे न केवल प्रक्रिया में पारदर्शिता आई है, बल्कि निर्यातकों के लिए काम भी आसान हुआ है. इसके अलावा, निर्यातकों के साथ नियमित संवाद और वैश्विक बाजार की जानकारी उपलब्ध कराना भी एक प्रमुख पहल रही है.
कॉफी बोर्ड ने मूल्यवर्धित कॉफी के निर्यात को भी प्रोत्साहित किया है. इसके तहत पारगमन और माल ढुलाई पर सहायता प्रदान की जाती है, ताकि कॉफी की प्रोसेसिंग, पिसाई, पैकेजिंग जैसी सुविधाएं विकसित हो सकें. इसके लिए बोर्ड 40 प्रतिशत तक मशीनरी की लागत का अनुदान देता है, जिसकी अधिकतम सीमा 15 लाख रुपये है. यह सहायता व्यक्तिगत उत्पादकों, स्वयं सहायता समूहों और कॉफी व्यवसाय से जुड़े उद्यमियों को दी जाती है.
सरकार ने नकद प्रोत्साहन योजनाएं भी शुरू की हैं. मूल्यवर्धित उत्पादों के निर्यात पर तीन रुपये प्रति किलोग्राम, जबकि अमेरिका, कनाडा, जापान, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप के दूरवर्ती बाजारों में हरी कॉफी के निर्यात पर दो रुपये प्रति किलोग्राम की सहायता दी जाती है. इसका उद्देश्य उच्च गुणवत्ता की कॉफी को प्रोत्साहित करना है, ताकि भारत का नाम वैश्विक स्तर पर और मजबूत हो सके.
यह उपलब्धि सिर्फ निर्यात आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे हजारों किसानों, उत्पादकों और छोटे उद्यमियों को भी फायदा पहुंचा है. मूल्यवर्धन, ब्रांडिंग और वैश्विक मार्केटिंग के जरिए भारत ने कॉफी उद्योग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है.