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FY26 की पहली तिमाही में देश की जीडीपी विकास दर 7.8 फीसदी रही, जो बाजार के अनुमान 6.6 फीसदी से काफी ऊपर है. यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में तेज विकास के कारण संभव हो पाई है. तेजी की यह दर देश की आर्थिक मजबूती और विकास की सकारात्मक दिशा का संकेत देती है, जो हालिया आर्थिक सुधारों और मांग आधारित वृद्धि को प्रतिबिंबित करती है.
CareEdge Ratings की रिपोर्ट के अनुसार, सर्विसेज सेक्टर के अंतर्गत ट्रेड, होटल्स, ट्रांसपोर्ट, कॉमर्स और ब्रॉडकास्टिंग सर्विसेज, वित्तीय सेवाएं, रियल एस्टेट और कंसल्टेंसी सर्विसेज का ग्रोथ रेट भी अनुमान से अधिक रहा. ट्रेड, होटल्स और ट्रांसपोर्ट में 8.6 फीसदी विकास हुआ जबकि फाइनेंशइयल और रियल एस्टेट सेक्टर 9.5 फीसदी की वृद्धि के साथ आगे रहा. इसके अतिरिक्त सार्वजनिक प्रशासन एवं रक्षा क्षेत्र में 9.8 फीसदी की वृद्धि दर्ज हुई.
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही में 7.7 फीसदी की विकास दर हासिल की, जो पिछले साल की पहली तिमाही के 4.8 फीसदी के मुकाबले काफी अधिक है. यह तेजी घरेलू खपत और विकसित देशों में निर्यात में वृद्धि के कारण आई है. टैरिफ लगाए जाने से पहले अतिरिक्त निर्यात ने इस सेक्टर को मजबूती दी है. मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की यह प्रगति अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है.
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुछ क्षेत्रों जैसे खनन और बिजली क्षेत्र में अपेक्षित विकास नहीं हो पाया. कुल मिलाकर, ग्रॉस वैल्यू एडेड (GVA) की वृद्धि दर 7.6 फीसदी रही, जो विकास दर के अनुकूल है. जीवीए और जीडीपी के बीच अंतर अप्रत्यक्ष करों में वृद्धि एवं सब्सिडी में बढ़ोतरी के कारण है.
सेवाओं के मजबूत निर्यात, केंद्रीय राजस्व व्यय में वृद्धि, ई-वे बिल संग्रह, और माल यातायात में तेजी से यह स्पष्ट होता है कि आर्थिक गतिविधियां तेज गति से बढ़ रही हैं. ये उच्च आवृत्ति संकेतक मांग में वृद्धि को दर्शाते हैं, जिससे सरकार के आर्थिक सुधारों और घरेलू बाज़ार की मजबूती का पता चलता है. साथ ही, ये आंकड़े भविष्य में भी व्यापक आर्थिक विकास की संभावनाओं को मजबूत करते हैं. इस प्रकार, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज सेक्टर की बेहतर प्रगति ने देश की विकास दर को नई ऊंचाई पर पहुंचाया है, जो आर्थिक सुदृढ़ता और व्यापक रोजगार सृजन के लिए सकारात्मक संकेत हैं.